राधेश्याम कोरी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
राधेश्याम कोरी

कार्यकाल
2004-2009
चुनाव-क्षेत्र घाटमपुर

जन्म 7 जुलाई 1939
सुजनीपुर -चिलौली ,डेरापुर,कानपुर,उत्तर प्रदेश
मृत्यु 12 अगस्त 2015(2015-08-12) (उम्र 76)
कानपुर
राजनीतिक दल समाजवादी पार्टी
जीवन संगी विलासी उर्फ़ सावित्री
निवास कानपुर
धर्म हिन्दू (कोरी )

राधेश्याम कोरी ( ७ जुलाई १९३९ -१२ अगस्त २०१५ ) घाटमपुर (सु ) से १४ वीं लोक सभा ( 2004-2009) के लिए निर्वाचित हुए थे [1]

प्रारंभिक जीवन[संपादित करें]

इनका जन्म जुलाई ७,१९३९ को उत्तरप्रदेश राज्य के कानपुर जिले की तहसील डेरापुर के ग्राम चिलौली के मजरा सुजनीपुर के अनुसूचित जाति (कोरी) के परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम घसीटे लाल था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक स्कूल चिलौली में तथा हाई स्कूल की शिक्षा आर पी एस इंटर कॉलेज रूरा ,कानपुर में हुई। अध्ययन में रूचि न होने के कारण यह प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शम्भू दयाल चतुर्वेदी ,बड़ागांव भिक्खी कानपुर के यहां उनके व्यक्तिगत सहायक बनकर उनके साथ रहने लगे और कुछ दिनों तक उन्हीं के जूनियर हाई स्कूल में शिक्षण कार्य भी किया। इसी गांव में मतदाता बनकर दो बार बड़ागांव भिक्खी के ग्राम प्रधान भी बने। ब्लॉक प्रमुख शंभू दयाल चतुर्वेदी की मृत्यु के पश्चात ब्लॉक डेरापुर के ब्लॉक प्रमुख भी रहे।

राजनीतिक गुरु[संपादित करें]

  • शम्भू दयाल चतुर्वेदी

राजनीतिक जीवन[संपादित करें]

कांग्रेस में[संपादित करें]

इसके बाद शम्भू डायल चतुर्वेदी इन्हें अपने साथ जिला कांग्रेस कार्यालय कानपुर ले जाने लगे। यहां यह कांग्रेस के सदस्य बने और शम्भू दयाल चतुर्वेदी ने अपने प्रयास से इन्हें शीघ्र ही जिले का महामंत्री बनवा दिया। अब इनका रुझान राजनीति की और बढ़ गया कालांतर में यह कांग्रेस के प्रदेशीय महामंत्री बने।

बहुजन समाज पार्टी में[संपादित करें]

कांग्रेस में अपना भविष्य न देख कर वर्ष १९९६ में कोरी बहुजन समाज पार्टी में सम्मिलित हो गए। बहुजन समाज पार्टी द्वारा टिकट मिलने पर यह भोगनीपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से वर्ष १९९६ में विधान सभा का चुनाव लड़े और विजयी रहे। [2]

समाजवादी पार्टी में[संपादित करें]

वर्ष २००४ में आप समाजवादी पार्टी में सम्मिलित हो गये। समाजवादी पार्टी ने वर्ष २००४ के लोक सभा के चुनाव में घाटमपुर (सु ) से उम्मीदवार बनाया और चुनाव में वजयी हुए। [3] राधेश्याम कोरी ने प्यारे लाल संखवार को पराजित किया। [4]

सन्दर्भ[संपादित करें]