राणा हम्मीर सिंह

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राणा हम्मीर सिंह
राणा
मेवाड़ के राणा
शासनावधि1326–1364 (38 वर्ष)
उत्तरवर्तीक्षेत्र सिंह
जन्म1314
निधन1364 (50 साल)
जीवनसंगीसोंगरी
राजवंशसिसोदिया
पिताअरी सिंह
माताउर्मिला
मेवाड़ के सिसोदिया राजपूत
(1326–1884)
राणा हम्मीर सिंह (1326–1364)
राणा क्षेत्र सिंह (1364–1382)
राणा लखा (1382–1421)
राणा मोकल (1421–1433)
राणा कुम्भ (1433–1468)
उदयसिंह प्रथम (1468–1473)
राणा रायमल (1473–1508)
राणा सांगा (1508–1527)
रतन सिंह द्वितीय (1528–1531)
राणा विक्रमादित्य सिंह (1531–1536)
बनवीर सिंह (1536–1540)
उदयसिंह द्वितीय (1540–1572)
महाराणा प्रताप (1572–1597)
अमर सिंह प्रथम (1597–1620)
करण सिंह द्वितीय (1620–1628)
जगत सिंह प्रथम (1628–1652)
राज सिंह प्रथम (1652–1680)
जय सिंह (1680–1698)
अमर सिंह द्वितीय (1698–1710)
संग्राम सिंह द्वितीय (1710–1734)
जगत सिंह द्वितीय (1734–1751)
प्रताप सिंह द्वितीय (1751–1754)
राज सिंह द्वितीय (1754–1762)
अरी सिंह द्वितीय (1762–1772)
हम्मीर सिंह द्वितीय (1772–1778)
भीम सिंह (1778–1828)
जवान सिंह (1828–1838)
सरदार सिंह (1828–1842)
स्वरूप सिंह (1842–1861)
शम्भू सिंह (1861–1874)
उदयपुर के सज्जन सिंह (1874–1884)
फतेह सिंह (1884–1930)
भूपाल सिंह (1930–1947)

राणा हम्मीर (1314–78), या हम्मीरा जो १४वीं शताब्दी में भारत के राजस्थान के मेवाड़ के एक योद्धा या एक शासक थे।[1] १३वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत ने गुहिलों की सिसौदिया राजवंश की शाखा को मेवाड़ से सत्तारूढ़ कर दिया था, इनसे पहले गुहिलों की रावल शाखा का शासन था जिनके प्रथम शासक बप्पा रावल थे और अंतिम रावल रतन सिंह थे | मेवाड़ राज्य के इस शासक को 'विषम घाटी पंचानन' के नाम से जाना जाता है, राणा हम्मीर को विषम घाटी पंचानन की संज्ञा राणा कुम्भा ने कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति में दी |

सीसोद गाँव के ठाकुर राणा हम्मीर सिसौदिया वंश के प्रथम शासक थे,  राणा हम्मीर आरिसिंह के पुत्र तथा लक्ष्मणसिंह के पौत्र है | जिन्होंने अपनी सैन्य क्षमता के आधार पर मेवाड़ के केलवाड़ा नामक स्थान को मुख्य केंद्र बनाया राजस्थान के इतिहास में राणा हम्मीर ने चित्तौड़ से मुस्लिम सत्ता को उखाड़ने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया | मेवाड़ की विषम परिस्थितियों के होते हुए भी इन्होंने चित्तौड़ पर विजयश्री प्राप्त की| इस प्रकार 1326 ई. में राणा हम्मीर को पुनः चित्तौड़ प्राप्त हुआ | इसी कारण राणा हम्मीर को विषम घाटी पंचानन के नाम से जाना जाता है |

हम्मीर इनके अलावा सिसोदिया राजवंश जो कि गुहिल वंश की ही एक शाखा है के प्रजनक भी बन गए थे ,इसके बाद सभी महाराणा सिसोदिया राजवंश के ही रहे।

इन्होंने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में स्थित चित्तौड़गढ़ दुर्ग में अन्नपूर्णा माता के मन्दिर का निर्माण भी करवाया था,  राणा हम्मीर के शासनकाल में दिल्ली के सुल्तान मौहम्मद बिन तुगलक ने मेवाड़ पर आक्रमण किया, दोनों के बीच सिंगोली नामक स्थान पर युद्ध लड़ा गया जिसे सिंगोली का युद्ध कहा जाता है, वर्तमान में सिंगोली नामक स्थान उदयपुर में स्थित है, इस युद्ध के बाद मेवाड़ में राणा हम्मीर के दिन सामान्य रहे तथा 1364 ई. में इनकी मृत्यु हो गयी |

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Sen, Sailendra (2013). A Textbook of Medieval Indian History. Primus Books. पपृ॰ 116–117. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-9-38060-734-4.