संग्राम सिंह द्वितीय

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मेवाड़, राजस्थान के शिशोदिया राजवंश के शासक थे।

मेवाड़ के सिसोदिया राजपूत
(1326–1884)
राणा हम्मीर सिंह (1326–1364)
राणा क्षेत्र सिंह (1364–1382)
राणा लखा (1382–1421)
राणा मोकल (1421–1433)
राणा कुम्भ (1433–1468)
उदयसिंह प्रथम (1468–1473)
राणा रायमल (1473–1508)
राणा सांगा (1508–1527)
रतन सिंह द्वितीय (1528–1531)
राणा विक्रमादित्य सिंह (1531–1536)
बनवीर सिंह (1536–1540)
उदयसिंह द्वितीय (1540–1572)
महाराणा प्रताप (1572–1597)
अमर सिंह प्रथम (1597–1620)
करण सिंह द्वितीय (1620–1628)
जगत सिंह प्रथम (1628–1652)
राज सिंह प्रथम (1652–1680)
जय सिंह (1680–1698)
अमर सिंह द्वितीय (1698–1710)
संग्राम सिंह द्वितीय (1710–1734)
जगत सिंह द्वितीय (1734–1751)
प्रताप सिंह द्वितीय (1751–1754)
राज सिंह द्वितीय (1754–1762)
अरी सिंह द्वितीय (1762–1772)
हम्मीर सिंह द्वितीय (1772–1778)
भीम सिंह (1778–1828)
जवान सिंह (1828–1838)
सरदार सिंह (1828–1842)
स्वरूप सिंह (1842–1861)
शम्भू सिंह (1861–1874)
उदयपुर के सज्जन सिंह (1874–1884)
फतेह सिंह (1884–1930)
भूपाल सिंह (1930–1947)

जन्म -24 मार्च, 1690 को। पिता - महाराणा अमर सिंह द्वितीय। शासन काल - 1710ई. से 1734 ई.।

इन्होंने उदयपुर में 'सहेलियों की बाड़ी' का निर्माण करवाया तथा उन्होंने मराठों के विरुद्ध भीलवाड़ा जिले में 'हुरडा सम्मेलन' की योजना बनाई मृत्यु - सन् 1734 ई.।

इन्होंने 18 बार युद्ध किए। Inke sasan kal me maratho ne pahli bar chouth(tax) vasuli ki thi Inhone seesaarma me vaidyanath Mandir banwaya tha Aur Roopbhatt dwara likhit vaidyanath prasasti lagwai

इन्हें भी देखें[संपादित करें]