राजा कोटिया भील

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कोटिया भील चंबल नदी के निकट स्थित अकेलगढ़ के शासक थे , उन्होंने कोटा में नीलकंठ महादेव मंदिर स्थापित किया था , राजा कोटिया भील और कोटा की कुलदेवी श्री नाहर सिंह माताजी थी , उनका मंदिर अभी भी कोटिया भील के किले में बना हुआ है । राजा कोटिया भील का गढ़ करीब 3 से 4 km के क्षेत्र में चंबल नदी किनारे फैला हुआ था । 1264 में उनकी धोखे से हत्या हो गई , उनकी हत्या के बाद तत्कालीन बूंदी के शासक जेत सिंह ने पुराना कोटा में बदलाव कर दिया और इसका नामकरण कोटिया भील के नाम पर रखा।[1][2][3]

इतिहास[संपादित करें]

' कोटिया ' , दर्शल कोटा के भील शासकों को दी जाने वाली उपाधि थी , भील शासकों के समय कोटा , अकेलगढ़ के नाम से जाना जाता था , भीलो ने अकेलगढ और दोलतगंज किलो का निर्माण करवाया , और अपने क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई ,

बूंदी उस दौरान मीणाओ के शासन का क्षेत्र था , बूंदी मीणाओ और कोटा भीलों के प्रमुख ठिकाने थे , हाड़ाओ ने मीणा से धोखे से बूंदी का शासन छीन लिया , और इसी तरह उन्होंने कोटा को भी छीना ।

जेत सिंह ने कोटिया भील को अपने यहां दावत पर बुलाया , वहां भीलो को खूब मदिरापान कराया गया , जब भील होशो हवास मै नहीं थे , तब जेत सिंह ने सालार गाजी के साथ अपने हाडा राजपूतों के साथ मिलकर , कोटिया भील और उनके लोगो पर हमला बोल दिया , कोटिया भील ने बड़ी ही बहादुरी से युद्ध किया , उन्होंने , सालार गाजी को मौत के घाट उतारा,और तभी जेत सिंह ने धोखे से कोटिया भील पर हमला बोल दिया , पहले कोटिया भील की गर्दन कटी ,पर उनका धड लड़ता रहा , फिर कमर कटी और उनके शरीर के तीन हिस्से हो गए , इस तरह से कोटिया भील की हत्या कर दी ।


कोटिया भील के बाद जेत सिंह कोटा का शासक बन गया , उसने कोटा गढ़ में कोटिया भील और सालार गाजी से जुड़े दरवाजों [ महल की अन्य जगहों के ] के नाम रखे ।

मंदिर[संपादित करें]

  • श्री नाहरसिंह माताजी का मंदिर अकेलगढ़ किले में स्थापित है । वे कोटिया भील और कोटावासियो

की कुलदेवी जी थी ।

  • राजा कोटिया भील की याद में उनका मंदिर स्थापित है , जहां राजा कोटिया भील , उनका परिवार और उनके सैनिकों की मूर्तियां स्थापित है ।जिनकी पूजा आज भी की जाती है ।

अनसुलझा रहस्य[संपादित करें]

राजा कोटिया भील के अकेलगढ किले से एक शिलालेख प्राप्त हुआ , जिसे आज तक पड़ा नहीं जा सका है , यदि वह शिलालेख पढ लिया जाए तो राजा कोटिया भील के बारे में , और उस दौरान की संस्कृति , इतिहास के बारे में बेहद कुछ ज्ञात हो सकता है ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "असल में कौन थे कोटा के संस्थापक कोटिया भील या राव जैतसी, पढ़ें खबर". Dainik Bhaskar. 2013-09-21. अभिगमन तिथि 2020-05-31.
  2. "जिनके नाम से कोटा का नाम पड़ा 300 साल बाद लगाई जाएगी उनकी प्रतिमा". दैनिक भास्कर. 30 जुलाई 2012. मूल से 17 जून 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 फ़रवरी 2020.
  3. "कोटिया भील ने नहीं बसाया था कोटा". दैनिक भास्कर. 21 सितम्बर 2013. मूल से 31 मई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 फ़रवरी 2020.