राजा किशोर सिंह

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

राजा किशोर सिंह लोधी 1857 की क्रांति के सूत्रधार रहे सन 1857 में देश को आजादी दिलाने में हिंडोरिया के राजा किशोर सिंह लोधी ने अंग्रेजी सेना से अपनी वीरता का लोहा मनवाया था और अपने प्राणों का बलिदान देकर मातृभूमि की रक्षा की। सेनानी क्रांति के सूत्रधार नायक हिंडोरिया रियासत के राजा किशोर सिंह लोधी थे, जिन्होंने ने अंग्रेजी सेना का विद्रोह करते हुए अपनी वीरता से अंग्रेजी सेना को नाकों चने चबाने को मजबूर कर दिया था।

दमोह जिले में हिंडोरिया में सन 1980 तक प्रदेश का सबसे बड़ा ग्राम था। वर्तमान यह नगरीय क्षेत्र है जहां के राजा किशोर सिंह लोधी की अगुवाई में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजा दिया। इस स्वतंत्रता संग्राम में दमोह के क्रांतिकारी भी अछूते नहीं थे। जिन्होंने किशोर सिंह लोधी के नेतृत्व में स्वाधीनता के लिए जंग छेड़ दी। उस समय सागर कमिश्नरी के रूप में हिंडोरिया जागीर के रूप में जानी जाती थी। अंग्रेजों की राज्य हड़प नीति के तहत 70 गांव की हिंडोरिया रियासत पर भी अपना कब्जा करना चाहते थे। इसलिए हिंडोरिया पर अंग्रेजों की सेना के द्वारा तोपों से हमला किया गया।

आज भी बने हैं तोप के निशान

इस हमला से क्षतिग्रस्त हिण्डोरिया गढ़ पर तोपों की मार के निशान आज भी बने हुए हैं। यहां पर पहाड़ी पर स्थित किला किशोर सिंह के पूर्वजों के द्वारा बनवाया गया था। इन्हीं के पूर्वज ठा. बुद्घ सिंह ने राजा छत्रसाल के समय में हिंडोरिया जागीर बसाई थी। जुलाई 1857 में कमिश्नर सागर के द्वारा अपने मुंशी मोहम्मद अलीमुद्दीन के हाथ किशोर सिंह को पत्र के माध्यम से संदेश दिया गया कि आप अंग्रेजी हुकूमत से बगावत का रास्ता छोड़ दें तो क्षतिपूर्ति का सारा का सारा खर्च खजाने से भरपाई कर दी जाएगी और पुरानी जागीरें भी वापिस कर दी जाएंगी। लेकिन ठाकुर किशोर सिंह लोधी की अपनी मातृभूमि के प्रति अटल श्रद्घा कम नहीं हुई और मातृभूमि पर से फिरंगियों को खदेडऩे तक युद्घ जारी रखने की मन ठान ली।

दमोह थाना को अंग्रेजी कब्जा से कराया था मुक्त

10 जुलाई को किशोर सिंह लोधी , राव साहब लोधी स्वरूप सिंह लोधी ने अपने सभी साथियों के साथ दमोह पर अंग्रेजी सेना पर धावा बोलकर दमोह थाना को अंग्रेजी सेना से मुक्त करवाकर अपना कब्जा कर लिया। जिसमें अंग्रेजी शासन का पूर्व का रिकार्ड जला दिया। जिससे खौफजदा अंग्रेजी हुकूमत ने भारी सेना-बल भेज दिया। इसके बाद भी किशोर सिंह ने अनेकों साथियों साथ अनेक ग्रामों व कुम्हारी थाना पर अपना कब्जा कर लिया और फिरंगी सेना को हर वार हार का सामना करना पड़ा।

जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर इनाम किया था घोषित

राजा किशोर सिंह लोधी के वंशज प्रद्युम्न सिंह लोधी अंग्रेजी सेना अपने मंसूबों पर पानी फिरता देख 20 जुलाई को लिखे गए पत्रों से अंदाजा लगाया जा सकता है। जिसमें लिखा है कि राजा किशोर सिंह लोधी को पकड़कर दंड देना जरूरी है। इसी के चलते अंग्रेज कमिश्नर ने दमोह के डिप्टी कमिश्नर को लिखा था कि आप हिंडोरिया कूच करके हिंडोरिया रियासत को जमीदोंज कर दें। साथ राजा किशोर सिंह लोधी को पकड़कर फांसी पर लटका दिया जाए। इसी दौरान अमर सेनानी राजा किशोर सिंह लोधी को जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर एक हजार का ईनाम घोषित किया था, लेकिन अंग्रेजी सेना इन्हें पकड़ नहीं पाई थी। जिसके बाद अंग्रेजी सेना द्वारा इनकी रियासत पर कब्जा कर लिया गया था। इसके बाद राजा किशोर सिंह लोधी चार माह तक कुम्हारी में रहते हुए अंग्रेजी सेना से विद्रोह करते रहे। बाद में उनका कोई पता नहीं चला। लेकिन अमर सेनानी की याद आज भी दमोह के क्रांतिकारियों में महानायक के रूप में की जाती है।