राजस्थानी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेताओं की सूची

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यह सूची राजस्थानी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेताओं की है।[1]

२०१४ सुंदर नैण सुधा (कहानी संग्रह) रामपालसिंह राजपुरोहित
२०१३ आंथ्यो नहीं दिन हाल (कविता संग्रह) अम्बिका दत्त
२०१२ आँख हिंयै रा हरयल सपना(कविता संग्रह) आईदान सिंह भाटी
२०११ जूण जात्रा (उपन्यास) अतुल कनक
२०१० मीरा (महाकाव्य) मंगत बादल
२००९ माई ऐड़ा पूत जण (कहानी संग्रह) मेजर रतन जाँगिड़
२००८ पगारवा (कहानी संग्रह) दिनेश पांचाल ’दीप’
२००७ आलोचना री आँख सूं (आलोचना) कुंदन माली
२००६ पूर्णामिदम (नाटक) लक्ष्मी नारायण रंगा
२००५ किस्तुरी मिरग (कहानी संग्रह) चेतन स्वामी
२००४ सांम्ही खुलतो मारग (उपन्यास) नन्द भारद्वाज
२००३ सिमरण (कविता संग्रह) संतोष मायामोहन
२००२ जीव री जात (कहानी संग्रह) भरत ओला
२००१ घराणो (उपन्यास) अब्दुल वाहीद 'कमल'
२००० कंकू कबंध (नाटक) जया प्रकाश पांड्या 'ज्योतिपुँज'
१९९९ सीर रो घर (कविता संग्रह) वासु आचार्य
१९९८ उड़ जा रे सुआ (उपन्यास) शांति भारद्वाज ‘राकेश’
१९९७ उतरियो है आभो (कविता संग्रह) मालचंद तिवाड़ी
१९९६ ओळूं री अखियातां (संस्मरण) नेम नारायण जोशी
१९९५ कूख पड़ियै री पीड़ (कविता संग्रह) किशोर कल्पनाकांत
१९९४ माटी री महक (कहानी संग्रह) करणीदान बारहठ
१९९३ अधुरा सुपणा (कहानी संग्रह) नृसिंह राजपुरोहित
१९९२ धरमजुध (नाटक) डॉ॰ अर्जुनदेव चारण
१९९१ म्हारी कवितावाँ (कविता संग्रह) प्रेमजी प्रेम
१९९० उछाळो (कविता संग्रह) रेवतदान चारण 'कलपित'
१९९८९ जामरो (कहानी संग्रह) यादवेन्द्र शर्मा `चन्द्र'
१९८८ आणहद नाद (कविता संग्रह) भगवती लाल व्यास
१९८७ सागळां री पीड़ा स्वत मेघ (कविता संग्रह) नैण मल जैन
१९८६ द्वारका (खंड काव्य) महावीर प्रसाद जोशी
१९८५ एक दुनिया म्हारी (कहानी संग्रह) सांवर दइया
१९८४ मारु-मंगल (कविता संग्रह) सुमेरसिंह शेखावत
१९८३ गा-गीत (कविता संग्रह) मोहन आलोक
१९८२ चसमदीठ गवाह (कहानी संग्रह) मूलचन्द ‘प्रणेश’
१९८१ बरसाँ रा डीगोड़ा डूँगर लांघियाँ (कविता संग्रह) नारायण सिंह भाटी
१९८० म्हारो गाँव (कविता संग्रह) रमेश्वर दयाल श्रीमाली
१९७९ पागी (कविता संग्रह) डॉ॰ चन्द्र प्रकाश देवल
१९७८ मेवै रा रूंख (उपन्यास) अन्ना राम ‘सुदामा’
१९७७ बोल भारमली (कविता संग्रह) सत्य प्रकाश जोशी
१९७६ लीलटांस (कविता संग्रह) कन्हैयालाल सेठिया
१९७५ पगफेरौ (कविता संग्रह) मणि मधुकर
१९७४ बातां री फुलवारी भाग-१० (लोक कथाएँ) विजयदान देथा

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