राग सिंधुरा

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राग सिंधुरा एक चंचल प्रकृति का राग है। यह की राग काफी के बहुत निकट है। राग काफी से इसे अलग दर्शाने के लिए कभी कभी निषाद शुद्ध का प्रयोग आरोह में इस तरह से किया जाता है - म प नि नि सा'। राग काफी में म प ग१ रे यह स्वर समूह राग वाचक है जबकि सिंधुरा में म प ; म ग१ रे ; म ग१ रे सा इस तरह से लिया जाता है। [1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 3 अप्रैल 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 अक्तूबर 2019.