राग भूपाली

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राग परिचय--

थाट- कल्याण

वर्जित स्वर- म, नि

जाति- औडव-औडव

वादी- ग

संवादी-ध

गायन समय- रात्रि का प्रथम प्रहर

इस राग का चलन मुख्यत: मन्द्र और मध्य सप्तक के प्रतह्म हिस्से में होती है (पूर्वांग प्रधान राग)। इस राग में ठुमरी नहीं गायी जाती मगर, बड़ा खयाल, छोटा खयाल, तराना आदि गाया जाता है। कर्नाटक संगीत में इसे मोहन राग कहते हैं।

आरोह- सा, रे, ग, प, ध, सा।

अवरोह- सां, ध, प, ग, रे, सा।

पकड़- पडडग ध प ग, ग रे सा ध़, सा रे ग, प ग, ध प, ग रे सा

पकड- साऽऽ, ध़ऽ ध़ऽ सा, धसारेग सारेगऽऽ पऽ ग, धऽऽ पऽ ग, रे ग सा रे, ग धऽ धऽ सा ।