राईट या रोंग

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राईट या रोंग
निर्देशक नीरज पाठक
अभिनेता
प्रदर्शन तिथि(याँ)
  • 12 मार्च 2010 (2010-03-12)
देश भारत
भाषा हिन्दी

राईट या रोंग एक भारतीय हिन्दी फिल्म है, जिसका निर्देशन नीरज पाठक ने किया है। इस फिल्म को सिनेमाघरों में 12 मार्च 2010 को प्रदर्शित किया गया था।

[[चित्र:

राईट या रोंग - एक भारतीय हिन्दी फिल्म

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पटकथा[संपादित करें]

अजय श्रीधर (सनी देओल) और विनय पटनायक (इरफ़ान ख़ान) दोनों ही अच्छे दोस्त रहते हैं। दोनों पुलिस में रहते हैं और साथ में अपराधियों को पकड़ते हैं। लेकिन एक दिन ऐसे ही अपराधियों को पकड़ते समय दुर्घटना में अजय जख्मी हो जाता है और उसके बाद पता चलता है कि वह अब चल नहीं सकता। इसके बाद वह पुलिस से सेवानिर्वित हो जाता है। कुछ दिनों के बाद यह पता चलता है कि उसने अपने भाई और पत्नी को गोली मार दिया। इस पर अजय बोलता है कि उसे लगा था की रात को कोई चोर आया है और उससे बचने के लिए उसने गोली चला दी थी।

उसका दोस्त इस बात को नहीं मानता है और अपने ही दोस्त के खिलाफ सबूत ढूंढने लगता है। उसे कई सबूत भी मिल जाते हैं, जिससे वह न्यायालय में इस मामले को ले जाता है। लेकिन राधिका पटनायक (कोंकणा सेन शर्मा) को अजय के ऊपर भरोसा रहता है कि वह कोई गलत कार्य नहीं कर सकता है। इसके बाद विनय अदालत में अजय के खिलाफ कई सबूत पेश करता है और राधिका भी उसे बेगुनाह साबित करने के लिए कई सबूत पेश करती है। इसके बाद विनय उसे झूठ पकड़ने वाली मशीन द्वारा जाँच के लिए बोलता है और उसमें भी यही सामने आता है कि अजय निर्दोष है। न्यायालय उसे इस मामले से बाहर कर देती है। इसके बाद विनय को अपनी का एहसास होता है। वह अजय से क्षमा मांगता है। अजय उसे एक चिट्ठी दे देता है और दूसरे देश के लिए हवाई जहाज के ओर जाते रहता है।

चिट्ठी में लिखा होता है कि उसने ही अपनी पत्नी और भाई को मारा था। लेकिन अपने बच्चे के मोह के कारण वह अपने आप को कानून के हवाले नहीं कर सकता है। उसने इसके बाद लिखा कि वह जब चलने लगा तो वह अपने परिवार को यह सुसमाचार देने घर में बिना किसी को बतायें ही आ गया तो उसने देखा कि उसकी पत्नी और भाई एक ही बिस्तर में बिना कपड़ों के लेटे हुए थे और उससे आजादी पाने की योजना बना रहे थे। उसके बाद वह उन दोनों को आजादी देने के लिए अपने आप को ही मारने वाला था कि उसके बच्चे का चेहरा उसके सामने आ गया और वह रूक गया। इसके बाद उसने उन दोनों को मिला कर एक योजना बनाई जिससे उन दोनों को बीमा का पैसा मिल सके। वह दोनों पहले उसे मारने के लिए तैयार नहीं हुए लेकिन बाद में दोनों ही तैयार हो गए। उसके तहत उन दोनों को एक स्थान से बंदूक खरीदना था और फिल्म देखने के नाम पर एक स्थान पर जा के कुछ ही समय में वापस घर में आना था। जैसे ही वो दोनों घर आते हैं अजय दोनों को एक एक कर के मार देता है।

विनय पूरी तरह से चिट्ठी पढ़ने के बाद सोचता है कि क्या यह सही है या गलत और उसके बाद वह अजय को जाने देता है।

कलाकार[संपादित करें]

  • सनी देओल - अजय श्रीधर
  • इरफ़ान ख़ान - विनय पाठक
  • ईशा कोपिकर - अंशिता / अंशु श्रीधर
  • कोंकणा सेन शर्मा - राधिका पटनायक
  • आर्यन वैद - बोरिस
  • आरव चौधरी - संजय श्रीधर
  • सुरेन्द्र राजन - सुरक्षाकर्मी
  • विजय पाटकर - पुलिस
  • सतीश कश्यप - पुलिस
  • कमलेश सावंत - नौकर
  • परिक्षत साहनी - डॉक्टर

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]