सामग्री पर जाएँ

रस्साकशी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
रस्साकशी (Tug of war)

फ्रांस में मुकाबला करतीं 'क्वीन मैरीज़ आर्मी ऑक्सिलरी कॉर्प्स' की सदस्य, 3 अगस्त 1918
सर्वोच्च नियंत्रण निकाय टग ऑफ वॉर इंटरनेशनल फेडरेशन
उपनाम टीओडब्ल्यू (TOW)
सबसे पहले खेला गया प्राचीन काल
विशेषताएँ
अनुबंध गैर-संपर्क
दल के सदस्य आठ (या अधिक) खिलाड़ी प्रति टीम
मिश्रित लिंग पुरुष, महिला और मिश्रित (4 पुरुष + 4 महिला)
वर्गीकरण टीम खेल, बाहरी (आउटडोर) / आंतरिक (इनडोर)
उपकरण मजबूत रस्सी और बूट (जूते)
ओलंपिक 1900 से 1920 तक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा
टगिंग अनुष्ठान और खेल
ल्बेंग थियन प्रॉट (खमेर)
पुन्नुक (फिलिपिनो)
जुल्दारिगी (कोरियाई)
केओ को (वियतनामी)
देशकंबोडिया, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, वियतनाम
संदर्भ01080
क्षेत्रएशिया और प्रशांत महासागर
समावेश इतिहास
समावेश2015 (10वें अधिवेशन)
सूचीप्रतिनिधि

रस्साकशी (Tug of war) एक लोकप्रिय टीम खेल है जिसमें दो टीमें एक रस्सी के विपरीत छोरों को अपनी ओर खींचकर प्रतिस्पर्धा करती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य रस्सी को एक निश्चित दूरी तक अपनी दिशा में खींचना होता है, जो विरोधी टीम के खिंचाव बल के विपरीत होता है। यह खेल प्राचीन कंबोडिया, मिस्र, ग्रीस, भारत और चीन में खेला जाता था। यह खेल वर्ष 1900 से 1920 तक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक का हिस्सा था, लेकिन बाद में इसे ओलंपिक कार्यक्रम से हटा दिया गया। वर्तमान में रस्साकशी स्कूलों, सामुदायिक आयोजनों और दुनिया भर में आयोजित आधिकारिक प्रतियोगिताओं में बड़े चाव से खेली जाती है।

रस्साकशी में आमतौर पर आठ या अधिक सदस्यों की टीमें शामिल होती हैं। रस्सी पर एक केंद्र रेखा और उससे समान दूरी पर दो अन्य चिह्न बने होते हैं। खेल का उद्देश्य विरोधी टीम के चिह्न को केंद्र रेखा के पार खींचना होता है। इसके कड़े नियम तकनीकों को नियंत्रित करते हैं; जैसे कि खींचने के दौरान लंबे समय तक जमीन को छूना या कोहनी को घुटने से नीचे ले जाना (जिसे 'लॉकिंग' कहा जाता है) एक फाउल या त्रुटि माना जाता है। इस खेल में कलीसियाई रूप से टीम के सदस्यों के बीच उत्कृष्ट समन्वय और शारीरिक शक्ति दोनों की आवश्यकता होती है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, इस खेल का संचालन टग ऑफ वॉर इंटरनेशनल फेडरेशन (TWIF) द्वारा किया जाता है, जो द्विवार्षिक रूप से राष्ट्रीय टीमों के लिए इनडोर और आउटडोर दोनों प्रतियोगिताओं के लिए विश्व चैंपियनशिप का आयोजन करता है। रस्साकशी कलीसियाई रूप से कई समाजों में एक महत्वपूर्ण धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अनुष्ठान (Ritual) के रूप में भी जुड़ी हुई है, और इसे यूनेस्को (UNESCO) द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) का दर्जा दिया गया है।

शब्द की उत्पत्ति (Terminology)

[संपादित करें]

ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के अनुसार, "टग ऑफ वॉर" (Tug of war) वाक्यांश का मूल अर्थ "एक निर्णायक संघर्ष या सर्वोच्चता के लिए कड़ा मुकाबला" होता था। केवल 19वीं शताब्दी में जाकर इस शब्द का प्रयोग दो टीमों के बीच रस्सी खींचने वाले एक एथलेटिक खेल के रूप में किया जाने लगा। इससे पहले, अंग्रेजी भाषी दुनिया में इस खेल को आमतौर पर "फ्रेंच एंड इंग्लिश" (French and English) के नाम से जाना जाता था।

इतिहास और उत्पत्ति

[संपादित करें]

रस्साकशी की सटीक उत्पत्ति अनिश्चित है, लेकिन ऐतिहासिक साक्ष्यों से पता चलता है कि यह प्राचीन सभ्यताओं में युद्ध के अभ्यास और धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा था। चीन के तांग राजवंश की एक पुस्तक 'नोट्स ऑफ फेंग' के अनुसार, चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में चू राज्य के सैन्य कमांडर योद्धाओं को प्रशिक्षित करने के लिए इस खेल का उपयोग करते थे। तांग सम्राट जुआनजोंग ने बड़े पैमाने पर रस्साकशी खेलों को बढ़ावा दिया, जिसमें 167 मीटर लंबी रस्सियों का उपयोग किया जाता था और रस्सी के प्रत्येक छोर पर 500 से अधिक लोग होते थे।

प्राचीन ग्रीस में शक्ति बढ़ाने और पूर्ण बख्तरबंद कवच (Armor) पहनकर युद्ध करने की क्षमता विकसित करने के लिए इस खेल का कड़ा अभ्यास किया जाता था। कंबोडिया के प्रसिद्ध अंकोरवाट (Angkor Wat) मंदिर के पत्थरों पर उकेरी गई नक्काशी में देवताओं (Devas) और असुरों (Asuras) के बीच समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग को रस्सी बनाकर खींचने की रस्साकशी को दर्शाया गया है।

भारत में भी इसके पुरातात्विक प्रमाण बहुत मजबूत हैं। ओड़िशा के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर (Konark Sun Temple) के पश्चिमी विंग की दीवारों पर पत्थर की नक्काशी (Stone Relief) मौजूद है, जिसमें साफ तौर पर रस्साकशी का खेल चलते हुए दिखाया गया है, जो इसके 12वीं शताब्दी के ऐतिहासिक जड़ों को प्रमाणित करता है।

क्षेत्रीय विविधताएं (Regional Variations)

[संपादित करें]

म्यांमार (बर्मा)

[संपादित करें]

म्यांमार में रस्साकशी को 'लुन ह्वे' (Lun hswe) कहा जाता है। यहाँ इसका उपयोग बौद्ध भिक्षुओं के अंतिम संस्कार के समय अंतिम संस्कार की चिता को विपरीत दिशाओं में खींचने के पारंपरिक अनुष्ठान के रूप में किया जाता है। इसके अलावा, वहाँ सूखे के समय बारिश को आकर्षित करने के लिए 'मो खॉ' (Mo khaw) नामक एक पारंपरिक वर्षा-अनुष्ठान के रूप में भी रस्साकशी खेली जाती है।

दक्षिण कोरिया में इसे जुल्दारिगी (Juldarigi) कहा जाता है। यह कृषि समुदायों के लिए एक अत्यंत पवित्र खेल है। इसमें चावल के भूसे से बनी दो विशाल रस्सियों को एक केंद्रीय खूंटे से जोड़ा जाता है, जिसे गांव के पूर्वी और पश्चिमी छोर का प्रतिनिधित्व करने वाली टीमें खींचती हैं। परंपरा के अनुसार, यदि पश्चिमी टीम जीतती है, तो उस वर्ष चावल की फसल बहुत अच्छी होती है।

इंडोनेशिया

[संपादित करें]

इंडोनेशिया में इसे 'तारिक तंबांग' (Tarik Tambang) कहा जाता है, जो स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय समारोहों का एक अनिवार्य हिस्सा है। इसमें एक अनूठा संस्करण खेला जाता है जहाँ दो खिलाड़ी जमीन से ऊपर रखे कंक्रीट के ब्लॉकों (Cinder blocks) पर खड़े होते हैं और रस्सी खींचते हैं। उद्देश्य विरोधी खिलाड़ी को ब्लॉक से नीचे गिराना या उसके हाथ से रस्सी खींचना होता है।

औपचारिक नियम और रणनीतियाँ

[संपादित करें]

विश्व चैंपियनशिप जैसी आधिकारिक प्रतियोगिताओं में, आठ खिलाड़ियों की दो टीमों का कुल वजन उस विशिष्ट श्रेणी के लिए निर्धारित अधिकतम वजन सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। रस्सी का घेरा (Circumference) लगभग 11 सेंटीमीटर होना चाहिए और उसमें कोई गांठ या पकड़ने की कृत्रिम सुविधा नहीं होनी चाहिए।

खींचने की प्रक्रिया के दौरान टीम की मांसपेशियों की ताकत के साथ-साथ उनका लय (Rhythm) सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए प्रत्येक टीम के पास एक 'ड्राइवर' (Driver) होता है, जो रस्सी नहीं खींचता बल्कि टीम के बगल में चलते हुए उन्हें निर्देश देता है कि कब पूरी ताकत से खींचना है और कब केवल रस्सी को थामकर आराम करना है (जिसे 'हैंगिंग' कहा जाता है)। जब विरोधी टीम थक जाती है, तो ड्राइवर के 'पुल' (Pull) चिल्लाते ही पूरी टीम एक साथ लयबद्ध तरीके से झटका देती है और मुकाबला जीत जाती है। खेल में खिलाड़ियों का वजन और उनके जूतों का जमीन के साथ घर्षण (Static Friction) जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है।

दुर्घटनाओं के जोखिम और चोटें

[संपादित करें]

अमेच्योर या अनौपचारिक आयोजनों के आयोजक अक्सर रस्सी खींचने के दौरान उत्पन्न होने वाले अत्यधिक तनाव (Tensile Strength) के भौतिकी नियमों को कम आंकते हैं। जब दोनों टीमें रस्सी को अपनी ओर खींचती हैं, तो हुक के नियम (Hook's Law) के अनुसार रस्सी के भीतर भारी मात्रा में संभावित ऊर्जा (Potential Energy) जमा हो जाती है।

यदि रस्सी अपनी अधिकतम सहनशीलता की सीमा को पार कर अचानक टूट जाती है, तो यह संभावित ऊर्जा तुरंत अत्यधिक तीव्र गति वाली गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) में बदल जाती है। इसके कारण टूटी हुई रस्सी के सिरे अत्यधिक तीव्र वेग से पीछे की ओर भागते हैं (जिसे Snapback कहा जाता है)। यदि रस्सी किसी खिलाड़ी के हाथ या कलाई पर लिपटी हो, तो यह हड्डियों को कुचल सकती है और उंगलियों या पूरे हाथ के कटने (Amputation) का कारण बन सकती है। इसी वित्तीय जोखिम के कारण, अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में केवल विशेष रूप से इंजीनियर की गई रस्सियों का ही उपयोग करने की अनुमति दी जाती है।

प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं

[संपादित करें]
  • 25 अक्टूबर 1997 (ताइपे, ताइवान): एक बड़े कलीसियाई उत्सव के दौरान अत्यधिक तनाव के कारण 2-इंच की नायलॉन रस्सी अचानक टूट गई। रस्सी के स्नैपबैक के झटके से दो पुरुषों के हाथ कंधे के नीचे से पूरी तरह कट गए थे।
  • 4 फरवरी 2013 (कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका): एक हाई स्कूल के खेल आयोजन के दौरान रस्सी टूटने और हाथ में लिपटे होने के कारण दो छात्रों की कुल 9 उंगलियां कट गईं।

इन्हें भी देखें

[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ

[संपादित करें]