रंभा

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
(रम्भा से अनुप्रेषित)
Jump to navigation Jump to search

पुराणों में रंभा का चित्रण एक प्रसिद्ध अप्सरा के रूप में हुआ है। उसकी उत्पत्ति देवताओं और असुरों द्वारा किए गए विख्यात सागर मंथन से मानी जाती है। वह पुराण और साहित्य में सौंदर्य की एक प्रतीक बन चुकी है। इंद्र ने इसे अपनी राजसभा के लिए प्राप्त किया था। उसने एक बार रंभा को ऋषि विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए भेजा था। महर्षि ने उसे एक सहस्त्र वर्ष तक पाषाण के रूप में रहने का श्राप दिया। कहा जाता है ! कि एक बार जब वह कुबेर-पुत्र के यहाँ जा रही थी तो बीच मार्ग में रावण की भेंट उससे हुई कैलाश की ओर जाते हुए, रावण को बहुत प्यास लगी, गरमी के कारण रावण का गला सूख रहा था तो रंभा ने उसे एक कुएं का पता बताया था, इससे प्रसन्न होकर रावण ने रंभा को एक माणिक जड़ित सवर्णहार दिया था|

सन्दर्भ[संपादित करें]

हिंदी साहित्य कोश, भाग़- 2, पृष्ठ- 468