रघुनाथ विनायक धुलेकर

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रघुनाथ विनायक धुलेकर (7 जनवरी 1891 — 22 फरवरी, 1980) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी, लेखक, प्रथम लोकसभा के सदस्य तथा भारतीय संविधान सभा के सदस्य थे। उन्होने भारत छोड़ो आन्दोलन तथा दांडी मार्च में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

जीवन परिचय[संपादित करें]

धुलेकर जी का जन्म उत्तर प्रदेश के झाँसी में हुआ था। १० मई १९१२ को उनका विवाह जानकी से हुआ। उन्होने कोलकाता विश्वविद्यालय से १९१४ में बीए की डिग्री प्राप्त की और १९१६ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम ए की उपाधि प्रप्त की। झांसी में उन्होने वकालत करना शुरू किया।

हिन्दी का समर्थन[संपादित करें]

आर वी धुलेकर द्वारा हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित करने एवं जन मानस की भाषा बनाने के लिए 10 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में कहा गया था कि :

“अंग्रेज़ी से हम निकट आए हैं, क्योंकि वह एक भाषा थी। अंग्रेज़ी के स्थान पर हमने एक भारतीय भाषा को अपनाया है। इससे अवश्य हमारे संबंध घनिष्ठ होंगे, विशेषतः इसलिए कि हमारी परंपराएँ एक ही हैं, हमारी संस्कृति एक ही है और हमारी सभ्यता में सब बातें एक ही हैं। अतएव यदि हम इस सूत्र को स्वीकार नहीं करते तो परिणाम यह होता कि या तो इस देश में बहुत-सी भाषाओं का प्रयोग होता या वे प्रांत पृथक हो जाते जो बाध्य होकर किसी भाषा विशेष को स्वीकार करना नहीं चाहते थे। हमने यथासंभव बुद्धिमानी का कार्य किया है और मुझे हर्ष है, मुझे प्रसन्नता है और मुझे आशा है कि भावी संतति इसके लिए हमारी सराहना करेगी।”

राजनैतिक जीवन[संपादित करें]

  • 2. सन् 1946 से 1950 तक सदस्य, भारत की संविधान सभा के सदस्य।
  • 5. 20 जुलाई, 1958 से दिनांक 5 मई, 1964 तक सभापति, विधान परिषद्।

कृतियाँ[संपादित करें]

  • श्वेतश्वतरुपनिषद भाष्य
  • प्रश्नोपनिषद सरल भाष्यात्मदर्शी गीता भाष्य
  • चतुर्वेदानुगामी भाष्य
  • कठोपनिषद सरल भाष्य
  • पिलर्स ऑफ वेदान्त

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]