रक्तदंतिका

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रक्तदंतिका देवी माँ दुर्गा का ही एक स्वरूप है। वैप्रचिति नामक वंश के दानवो के संहार के लिए माँ ने अद्भुत रूप लिया था। इन दानवों का भक्षण करने के कारण देवी के दांत अनार की कली के समान लाल हो गये थे। अत: देवी रक्तदंतिका कहलाई।

मुर्ति रहस्य मे माँ के स्वरूप का विस्तृत वर्णन[संपादित करें]

माँ के स्वरूप का विस्तृत वर्णन श्री दुर्गा सप्तशती के अंत मे मुर्ति रहस्य के अंतर्गत मिलता है। माँ का स्वरूप रक्तवर्णी और चतुर्भुजी है।

दुर्गा सप्तशती मे वर्णन[संपादित करें]

दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय के अनुसार, , "वैवस्वत मन्वंतर के अट्ठाईसवें युग में शुम्भ और निशुम्भ नामक दो अन्य महादैत्य उत्पन्न होंगे। तब मैं नंद के घर में उनकी पत्नी यशोदा के गर्भ से जन्म लेकर दोनों असुरों का नाश करूँगी। तत्पश्चात् पृथ्वी पर अवतार लेकर मैं वैप्रचिति नामक दैत्य के दो असुर पुत्रों का वध करूँगी। उन महादैत्यों का भक्षण कर लाल दन्त (दांत) होने के कारण तब स्वर्ग में देवता और धरती पर मनुष्य सदा मुझे 'रक्तदंतिका' कह मेरी स्तुति करेंगे"