रंग पंचमी

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महाराष्ट्र में होली के बाद पंचमी के दिन रंग खेलने की परंपरा है। यह रंग सामान्य रूप से सूखा गुलाल होता है। विशेष भोजन बनाया जाता है जिसमे पूरनपोली अवश्य होती है। मछुआरों की बस्ती मे इस त्योहार का मतलब नाच, गाना और मस्ती होता है। ये मौसम रिशते (शादी) तय करने के लिये मुआफिक होता है, क्योंकि सारे मछुआरे इस त्योहार पर एक दूसरे के घरों को मिलने जाते है और काफी समय मस्ती मे व्यतीत करते हैं।[1] राजस्थान में इस अवसर पर विशेष रूप से जैसलमेर के मंदिर महल में लोकनृत्यों में डूबा वातावरण देखते ही बनता है जब कि हवा में लाला नारंगी और फ़िरोज़ी रंग उड़ाए जाते हैं।[2] मध्यप्रदेश के नगर इंदौर में इस दिन सड़कों पर रंग मिश्रित सुगंधित जल छिड़का जाता है।[3] लगभग पूरे मालवा प्रदेश में होली पर जलूस निकालने की परंपरा है। जिसे गेर कहते हैं। जलूस में बैंड-बाजे-नाच-गाने सब शामिल होते हैं। नगर निगम के फ़ायर फ़ाइटरों के वाॅटर (पानी) ट्रकों में रंगीन पानी भर कर जुलूस के तमाम रास्ते भर लोगों पर रंग डाला जाता है। जुलूस में हर धर्म के, हर राजनीतिक पार्टी के लोग शामिल होते हैं, प्राय: महापौर (मेयर) ही जुलूस का नेतृत्व करता है। प्राचीनकाल में जब होली का पर्व कई दिनों तक मनाया जाता था तब रंगपंचमी होली का अंतिम दिन होता था और उसके बाद कोई रंग नहीं खेलता था।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "होली के रूप अनेक : भाग दो" (एचटीएम). मेरा पन्ना. अभिगमन तिथि 4 मार्च 2008. |access-date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. "Holi Rangapanchami" (एचटीएम) (अंग्रेज़ी में). इंडियालाइफ़.कॉम. अभिगमन तिथि 4 मार्च 2008. |access-date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  3. "Indore Festivals" (एचटीएमएल) (अंग्रेज़ी में). इंदौरसिटी.नेट. अभिगमन तिथि 4 मार्च 2008. |access-date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)