यूरोप पर मंगोलों का आक्रमण
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| यूरोप पर मंगोलों का आक्रमण | |||||||
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| सेनापति | |||||||
| बाटू खान, सुबुताई (Subutai) | किंग बेला चतुर्थ (हंगरी), ड्यूक हेनरी द्वितीय (पोलैंड) | ||||||
| हताहत और हानि | |||||||
| अज्ञात (अपेक्षाकृत कम) | लाखों सैनिक और नागरिक मारे गए, कई शहर नष्ट | ||||||
यूरोप पर मंगोलों का आक्रमण (English: Mongol invasion of Europe), 13वीं शताब्दी में घटित एक अत्यंत विध्वंसकारी और ऐतिहासिक सैन्य अभियान था, जिसने पूरे यूरोपीय महाद्वीप के भू-राजनीतिक और जनसांख्यिकीय स्वरूप को हमेशा के लिए बदल दिया।[1] यह महाकाव्यिक आक्रमण चंगेज़ खान के पोते 'बाटू खान' और मंगोल इतिहास के सबसे महान रणनीतिकार 'सुबुताई' के नेतृत्व में किया गया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मंगोल साम्राज्य की पश्चिमी सीमाओं का विस्तार करना था, जो इतिहास में किसी भी खानाबदोश साम्राज्य द्वारा किया गया सबसे दूरगामी आक्रमण साबित हुआ।
आक्रमण की शुरुआत 1236 में वोल्गा बुल्गारिया पर विजय के साथ हुई, जिसके बाद मंगोल सेनाओं ने 'कीवन रुस' (वर्तमान रूस, यूक्रेन और बेलारूस) पर एक प्रलयंकारी हमला किया। 1237 से 1240 के बीच, रयाज़ान, व्लादिमीर और अंततः महान शहर 'कीव' को मंगोलों ने पूरी तरह जलाकर खाक कर दिया। मंगोलों के घुड़सवार तीरंदाजों, उनकी असाधारण गतिशीलता और घेराबंदी के उन्नत चीनी और इस्लामी हथियारों के सामने रूसी रियासतें टिक नहीं सकीं। इस हार ने रूस को अगले 250 वर्षों तक "ततार-मंगोल योक" के अधीन कर दिया।[2]
रूस को कुचलने के बाद, 1241 में सुबुताई ने अपनी सेना को कई हिस्सों में बांटकर मध्य यूरोप-विशेष रूप से पोलैंड और हंगरी—पर एक समन्वित और बिजली की तेजी से हमला किया। 9 अप्रैल 1241 को 'लेग्निका के युद्ध' में मंगोलों ने पोलिश और ट्यूटनिक नाइट्स की संयुक्त सेना को नष्ट कर दिया, और इसके ठीक दो दिन बाद 'मोही के युद्ध' में हंगरी की शाही सेना का पूरी तरह सफाया कर दिया। इन जीतों के बाद यूरोप का द्वार मंगोलों के लिए पूरी तरह खुल गया था और वियना (पवित्र रोमन साम्राज्य) अगला लक्ष्य था।
हालाँकि, पश्चिमी यूरोप का भाग्य एक अप्रत्याशित घटना से बच गया। दिसंबर 1241 में, मंगोलिया की राजधानी कराकोरम में महान 'ओगेदेई खान' की मृत्यु हो गई।[3] मंगोल परंपरा के अनुसार, नए खान के चुनाव (कुरिलताई) में भाग लेने के लिए शाही रक्त के सभी राजकुमारों को वापस लौटना अनिवार्य था। परिणामस्वरूप, बाटू खान ने अपनी विजयी सेनाओं को मध्य यूरोप से वापस बुला लिया और वोल्गा नदी के तट पर 'स्वर्णिम गिरोह' नामक राज्य की स्थापना की। यद्यपि मंगोल पश्चिमी यूरोप के हृदय तक नहीं पहुँच सके, लेकिन उनके इस आक्रमण ने पूर्वी यूरोप की आबादी को काफी हद तक नष्ट कर दिया और सिल्क रोड के माध्यम से पूर्व और पश्चिम के बीच व्यापार का एक नया युग शुरू किया।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "The Mongol Empire at its height". Encyclopedia Britannica.
- ↑ "The Mongol Invasion of Europe". World History Encyclopedia.
- ↑ "How the Mongols Stopped Their Advance into Europe". HISTORY.