सामग्री पर जाएँ

युद्ध हाथी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
हेनरी मोट्टे द्वारा बनाई गई तस्वीर जिसमें हान्निबल युद्ध के हाथियों के साथ रोन नदी पार कर रहे हैं (1878)

युद्ध हाथी वह हाथी होता है जिसे मनुष्यों द्वारा युद्ध के उद्देश्य से प्रशिक्षित और नियंत्रित किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से इसका मुख्य उपयोग शत्रु पर आक्रमण करने, उसकी सेना की पंक्तियों को तोड़ने और उनमें भय तथा आतंक उत्पन्न करने के लिए किया जाता था। युद्ध में इन हाथियों का संचालन करने वाले दल को हस्ति-दल कहा जाता था। प्राचीन काल में युद्ध हाथियों ने अनेक महत्वपूर्ण युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाई, विशेषकर भारत में। यद्यपि चीन में इनके प्रयोग का सीमित वर्णन मिलता है परंतु दक्षिण-पूर्व एशिया के अनेक राज्यों में ये सेनाओं के स्थायी अंग बन गए थें। इन हाथियों के उपयोग का वर्णन प्राचीन फारस, मकदूनिया, हेलेनिस्टिक यूनानी राज्यों, रोमन गणराज्य, तथा उत्तर अफ्रीका के प्राचीन कार्थेज़ की सेनाओं में भी मिलता है। कुछ क्षेत्रों में मध्ययुगीन काल तक भी युद्ध हाथियों की उपस्थिति बनी रही, किंतु आधुनिक काल में बारूद और अग्निशस्त्रों के प्रचलन के साथ इनका सैन्य महत्त्व घट गया। इसके पश्चात् इन हाथियों का उपयोग मुख्यतः अभियांत्रिकी, श्रम कार्यों तथा औपचारिक या समारोहिक उद्देश्यों तक ही सीमित रह गया।[1][2]

युद्ध में इन हाथियों के प्रयोग की शुरुआत कब हुई, इस विषय में कुछ अनिश्चितता है परंतु सामान्यतः यह माना जाता है कि इनका सर्वप्रथम प्रयोग प्राचीन भारत में हुआ था। प्रारंभिक वैदिक काल में युद्ध में हाथियों के प्रयोग का कोई विस्तृत उल्लेख नहीं मिलता किंतु रामायण में इंद्र देव को उनके पौराणिक हाथी ऐरावत या दिव्य अश्व उच्चैःश्रवा पर सवार दर्शाया गया है। बाद के वैदिक काल लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व तक आते-आते, हाथी युद्ध में एक प्रमुख अंग बन चुके थें। भारतीय सैन्य इतिहास में हाथियों की बढ़ती भूमिका वैदिक राज्यों के सिन्धु-गंगा के मैदानों में विस्तार के साथ समानांतर दिखाई देती है, जिससे संकेत मिलता है कि युद्ध हाथियों का प्रयोग इसी संक्रमणकाल में प्रारंभ हुआ होगा।[3]

युद्ध और शांति, दोनों अवस्थाओं में, चाहे वह राजा हो या सामान्य व्यक्ति—हाथी पर सवार होने की प्रथा का प्रथम उल्लेख छठी या पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व में मिलता है तथापि यह प्रथा संभवतः लिखित इतिहास से भी कहीं अधिक प्राचीन रही होगी। उल्लेखनीय है कि सिकंदर की सेना के विरुद्ध भी भारत में युद्ध हाथियों का प्रयोग किया गया था।[4]

सन्दर्भ

[संपादित करें]
  1. The Century Dictionary and Cyclopedia: The Century dictionary ... prepared under the superintendence of William Dwight Whitney ... rev. & enl. under the superintendence of Benjamin E. Smith [सेंचुरी डिक्शनरी और साइक्लोपीडिया: सेंचुरी डिक्शनरी ... विलियम ड्वाइट व्हिटनी के पर्यवेक्षण में तैयार ... संशोधित और विस्तारित बेंजामिन ई. स्मिथ के पर्यवेक्षण में] (अंग्रेज़ी भाषा में). सेंचुरी कंपनी. p. 2257. अभिगमन तिथि: 13 अक्टूबर 2025.
  2. लाल, डॉ. अवंतिका. "प्राचीन भारतीय युद्ध में हाथियों का योगदान". विश्व इतिहास विश्वकोश (अंग्रेज़ी भाषा में). 2022-11-15 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2022-11-21.
  3. सिंह, सर्व दमन. प्राचीन भारतीय युद्धकला: वैदिक काल के विशेष संदर्भ में (अंग्रेज़ी भाषा में). मोतीलाल बनारसीदास पब्लिशिंग हाउस. ISBN 978-81-208-0486-9. अभिगमन तिथि: 13 अक्टूबर 2025.
  4. "Elephants In Ancient Indian Warfare". विश्व इतिहास विश्वकोश