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युग्मकोद्भिद

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युग्मकोद्भिद
(Gametophyte)

पादप जीवन चक्र में 'पीढ़ियों का एकांतरण' (Alternation of Generations), जो स्पष्ट रूप से अगुणित युग्मकोद्भिद (n) और द्विगुणित बीजाणुद्भिद (2n) अवस्थाओं के चक्र को दर्शाता है।
पूर्ववर्ती अवस्था बीजाणु (Spore)
गुणसूत्र अवस्था अगुणित (Haploid, n)
कोशिका विभाजन समसूत्री विभाजन (Mitosis)
मुख्य कार्य युग्मक (Gametes) का निर्माण
परवर्ती अवस्था युग्मनज (Zygote) / बीजाणुद्भिद (Sporophyte)
प्रमुख पादप समूह ब्रायोफाइट्स (मॉस, लिवरवर्ट)
विकिडाटा आईडी Q189951

अगुणित (haploid) बहुकोशिकीय अवस्था, जो पादपों और शैवालों के जीवन चक्र में पाई जाती है, युग्मकोद्भिद (Gametophyte) कहलाती है।[1] यह पादप जीवन चक्र के उस लैंगिक प्रावस्था को दर्शाता है जहाँ समसूत्री विभाजन के माध्यम से अगुणित युग्मक बनते हैं। यह अवस्था पीढ़ी एकांतरण का एक अभिन्न अंग है। पौधों के विकासवादी इतिहास में युग्मकोद्भिद की भूमिका व्यापक रूप से बदली है। जहाँ ब्रायोफ़ाइट्स जैसे निम्न पादप समूहों में यह मुख्य और स्वपोषी पौधा होता है, वहीं उच्च विकसित आवृतबीजी (Angiosperms) पादपों में यह एक सूक्ष्म संरचना के रूप में ह्रासित (reduced) हो गया है, जो पूरी तरह से बीजाणुद्भिद के ऊतकों के भीतर सुरक्षित और उस पर आश्रित रहता है।[2]

जीवन चक्र तथा परिवर्धन

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पादप जीवन में युग्मकोद्भिद का परिवर्धन अगुणित बीजाणुओं के अंकुरित होने से होता है। निषेचन के बाद में बनने वाला द्विगुणित युग्मनज (Zygote) आगे चलकर बीजाणुद्भिद (Sporophyte) का निर्माण करता है, जो पुनः अर्धसूत्री विभाजन द्वारा बीजाणुओं को उत्पन्न करता है।[3]

पादप समूहों में विविधता

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विभिन्न पादप समूहों में युग्मकोद्भिद का आकार और स्वतंत्रता भिन्न-भिन्न होती है। ब्रायोफाइट्स (मॉस और लिवरवर्ट) में युग्मकोद्भिद जीवन चक्र की प्रभावी (Dominant) और प्रकाश संश्लेषक (स्वपोषी) अवस्था होती है। टेरिडोफाइट्स (फर्न) में युग्मकोद्भिद एक छोटा, स्वतंत्र और प्रकाश संश्लेषक पौधा होता है जिसे 'प्रोथैलस' (Prothallus) कहा जाता है। बीजीय पादपों (अनावृतबीजी और आवृतबीजी) में युग्मकोद्भिद अत्यधिक ह्रासित हो जाता है और पूरी तरह से बीजाणुद्भिद पर निर्भर रहता है। नर युग्मकोद्भिद 'परागकण' के रूप में और मादा युग्मकोद्भिद बीजांड के भीतर 'भ्रूणकोष' के रूप में सीमित रह जाता है।[4]

आनुवंशिक महत्त्व

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युग्मकोद्भिद में गुणसूत्रों का केवल एक समुच्चय होता है, जिससे सुप्त या अप्रभावी उत्परिवर्तन तुरंत अभिव्यक्त हो जाते हैं। प्रकृति इस स्थिति का लाभ उठाकर 'शोधक वरण' के माध्यम से हानिकारक युग्मविकल्पियों (Alleles) को समष्टि से निष्कासित कर देती है। यही कारण है कि पादप समष्टि पीढ़ियों तक स्वस्थ और बदलते परिवेश के अनुकूलित (Adapted) बनी रहती है।[5]

सन्दर्भ

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  1. "Gametophyte". Encyclopaedia Britannica. अभिगमन तिथि: 21 February 2026. gametophyte, in plants and certain algae, the sexual phase... which is haploid (having a single set of chromosomes).
  2. "25.1 Early Plant Life". OpenStax Biology 2e. अभिगमन तिथि: 21 February 2026. The haploid multicellular form, the gametophyte, is followed in the development sequence by a multicellular diploid organism, the sporophyte. It produces gametes by mitosis.
  3. Niklas, Ulrich; Kutschera (2010). "The evolution of the land plant life cycle". New Phytologist. 185 (1): 27–41. डीओआई:10.1111/j.1469-8137.2009.03054.x. अभिगमन तिथि: 21 February 2026.
  4. Immler, Simone (2019). "Haploid Selection in "Diploid" Organisms". Annual Review of Ecology, Evolution, and Systematics. 50: 219–236. डीओआई:10.1146/annurev-ecolsys-110218-024709. अभिगमन तिथि: 21 February 2026.
  5. Beaudry, Felix E. G.; Rifkin, Joanna L.; Barrett, Spencer C. H.; Wright, Stephen I. (2020-11-09). "Evolutionary Genomics of Plant Gametophytic Selection". Plant Communications (अंग्रेज़ी भाषा में). 1 (6). डीओआई:10.1016/j.xplc.2020.100115. आईएसएसएन 2590-3462.