युक्तेश्वर गिरि

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श्री युक्तेश्वर गिरि

श्री युक्तेश्वर गिरि (बांग्ला : শ্রী যুক্তেশ্বর গিরী) (10 मई 1855 - 9 मार्च 1936) महान क्रियायोगी एवं उत्कृष्ट ज्योतिषी थे । वे लाहिड़ी महाशय के शिष्य और स्वामी सत्यानन्द गिरि तथा परमहंस योगानन्द के गुरु थे। उनका मूल नाम प्रियनाथ कांड़ार (बांग्ला : প্রিয়নাথ কাঁড়ার)

श्री युक्तेश्वर गिरी ने  गुरुपरम्परा को  कायम रखते हुए क्रियायोगकी दिक्षा दिया । आप  भारतके विशिष्ट सन्त हैं  । आपने परमहंस योगानन्द को पश्चिमके लिए तैयार किया था ।  

श्री युक्तेश्वर गिरी जी ने वेदान्त, मिमांसा, योग, वैशेषिक तथा गीता ,बाइबल सम्पूर्णका गहरा व्याख्या किया है । वे महान् क्रियायोगी तथा प्रखर ज्योतिष थे, एवम् आप विज्ञानके भी ज्ञाता थे । परमहंस योगानन्द ने अपनी आत्मकथामें अपने गुरु युक्तेश्वर गिरी ज्यूका वर्णन एवम् विषद् कार्यें की चर्चा किया है । भारतीय सन्त समाजमें युक्तेश्वर जीका नाम आदर के साथ लिया जाता है ।  आपने पुस्तक भी लिखा है ।  

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