याफ़ा


याफ़ा (इब्रानी: יָפוֹ) एक प्राचीन लेवंटाइन बंदरगाह शहर है, जो इसराइल के तेल अवीव-याफ़ो शहर का दक्षिणी भाग है। यह भूमध्य सागर के तट स्थित है।
याफ़ा पर उत्खननों से पता चलता है कि यह प्रारंभिक कांस्य युग से बसा हुआ है। शहर का उल्लेख कई प्राचीन मिस्री एवं असीरियाई दस्तावेज़ों में भी किया गया है। बाइबिल में, याफ़ा दान गोत्र का एक सीमा तथा बंदरगाह होता है, जहाँ से लेबनानी देवदार को यरुशलम के मंदिर के निर्माण हेतु आयातित किया जाता था। फ़ारसी शासन के तहत, याफ़ा फ़ोनीशियाइयों को दिया गया था। यह शहर योना की कहानी एवं यूनानी पौराणिक कथाओं में एंड्रोमेडा की कहानी में भी शामिल है। बाद में, याफ़ा हश्मोनी यहूदिया का एक प्रमुख बंदरगाह बना। हालाँकि रोमन काल में सीज़रिया के निर्माण हेतु इसका महत्त्व घट चुका।
क्रूसयुद्ध समय, यह याफ़ा और अशकलोन प्रांत का भाग था। 1799 को, नेपोलियन ने शहर को लूट लिया था, और प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान 1917 को ब्रिटिश ने याफ़ा के युद्ध में शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया था। उनके तहत, जातीय तनाव हेतु 1921 को वहाँ दंगे शुरू हुए।
उस्मानी काल में अरब बहुमत शहर होने के नाते, याफ़ा 19वीं शताब्दी से अपने फलों और फलोद्यानों के लिए जाता जाता था, ख़ासकर याफ़ा नारंगी। यह 20वीं शताब्दी में फ़िलिस्तीन जनादेश में पत्रकारिता का केंद्र भी होता था, जहाँ फ़लस्तीन और अल-दिफ़ा नामक समाजपत्र छापे जाते थे। 1948 के फ़िलिस्तीन युद्ध के बाद, इसके अधिकांश अरब निवासी भागे या उन्हें निकाला गया था और शहर नवस्थापित इसराइल देश का भाग बना, और 1950 को इसे तेल अवीव के साथ एक किया गया था। आज, याफ़ा इसराइल का एक मिश्रित शहर है, इसकी जनसंख्या में से लगभग 37% अरब हैं।[1]
नाम
[संपादित करें]शहर का नाम मिस्री स्रोतों और अमार्ना पत्रों में यापू है। पौराणिक कथा के अनुसार, इसका नाम नूह के बेटे येपेत के नाम पर रखा गया है, जिसने बाढ़ के बाद शहर का निर्माण किया था।[2][3] यूनानी परंपरा में यह नाम योपिया या कैसियोपिया, एंड्रोमेडा की माता से जुड़ा है। माना जाता है कि पर्सियस ने बंदरगाह के निकट चट्टानों के उभार पर एंड्रोमेडा की रक्षा किया था। प्लिनी ने याफ़ा को योपा, ईयलस की बेटी के नाम से जोड़ा।
- ↑ Lior, Ilan (2011-02-28). "Tel Aviv to build affordable housing for Jaffa's Arab residents". Haaretz.com. अभिगमन तिथि: 2022-05-12.
- ↑ One example of this legend is the 16th-century French pilgrim Denis Possot who recorded, "Jaffe, est le port de la Terre saincte, anciennement nommé Joppe, faict et construict premierment en ville et cité grande à merveilles et de grant renom, par Japhet, fils de Noé." in his Le Voyage de la Terre Sainte (Geneva: Slatkine Reprints 1971, reprint of Paris edition, 1890, orig. 1532), p. 155.
- ↑ Another pilgrim, Sir Richard of Guylforde, wrote,"This Jaffe was sometyme a grete Cytie [...] and it was one of the firste Cyties of the worlde founded by Japheth, Noes sone, and beryth yet his name." In the pilgrimage narrative from 1506, recorded by his chaplain in 1511, edited by Sir Henry Ellis (London: Camden Society, 1851), p. 16.