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यातना शिविर

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दक्षिण अफ़्रीका में द्वितीय बोअर युद्ध यातना शिविर में बोअर महिलाएँ और बच्चे (1899–1902)

यातना शिविर एक प्रकार का कारावास होता है जहाँ राजनीतिक बँधुओं या अल्पसंख्यकों को बेगार करवाने या मारने के लिए रखा जाता है।

यातना शिविरों के ख्यात उदाहरणों में से नाज़ी यातना शिविर, बोअर यातना शिविर, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा जर्मन, इतालवी और जापानी अमेरिकियों की नज़रबंदी, और सोवियत गुलाग हैं।

रूसी शिविर

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वोर्कुतलाग, एक बड़े गुलाग, के एक उपशिविर का दंड कक्ष, 1945

रूसी साम्राज्य में अपराधों के लिए निर्वासन और बेगार के दंड सुनाए जाते थे। सबसे बड़े अपराधों के लिए दिए गए दंड की श्रेणी कातोर्गा थी, जो श्रम शिविर कारावास के समान था। इतिहासकार ऐन ऐपलबॉम के अनुसार, कातोर्गा कोई आम दंड नहीं था; 1906 को लगभग 6,000 कातोर्गा अपराधी पहले से ही दंड काट रहे थे, और 1916 में 28,600 ऐसे अपराधी थे।[1] रूसी गृहयुद्ध के समय, लेनिन और बोलशेविक ने "विशेष" कारावास शिविरों की स्थापना की, जो चेका के प्राधिकरण में था।[2][3] लेनिन की योजना के अनुसार, इन शिविरों का अलग मक़सद था।[4] प्रथम विश्वयुद्ध के बाद वाले चरम स्थितियाँ हेतु, इनमें युद्ध बँधुओं को रखा गया था।[5] 1929 को, अपराधी और राजनीतिक बँधुओं की श्रेणीकरण को विस्थापित किया गया,[6] शिविरों का प्राधिकरण संयुक्त राज्य राजनीतिक निदेशालय को दिया गया, और उनका विस्तार उस हद तक किया गया कि वे सोवियत अर्थव्यवस्था का बड़ा भाग बन गए।[7] इस गुलाग प्रणाली में कई सौ[8] शिविर थे तथा 1929 से 1953 तक 1.8 करोड़ लोगों को यहाँ रखा गया था।[9] ख़ुरुश्चेव पिघल के दौरान, गुलाग अपने आकार के एक चौथाई तक सिकुड़ गया और सोवियत समाज में उसका महत्त्व भी घटा।[10]

नाज़ी शिविर

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बूख़नवाल्ड यातना शिविर में यहूदी बेगारी, 16 अप्रैल 1945

1933 को जब नाज़ियों सत्ता में आए, उन्होंने राजनीतिक बँधुओं, ख़ासकर साम्यवादियों और समाजिक लोकतंत्रवादियों, के लिए अनेक यातना शिविर स्थापित किया।[11] उस वर्ष के अंत बँधुओं को रिहा कर दिया गया, और 1936 तक शिविरों की जनसंख्या घटने लगी। 1937 को नाज़ियों ने हज़ारों "असमाजिकों" को गिरफ़्तार किया, जिनमें से रोमानी, बेघर, मानसिक रोगी, तथा अवज्ञाकारी शामिल थे। 1938 से यहूदियों उनके सबसे बड़े निशाने थे। द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत से, शिविरों का विस्तार किया गया और उन्हें अधिक घातक बनाया गया।[12] अपने चरम पर, नाज़ी यातना शिविर प्रणाली में 15,000 शिविर[13] और कम से कम 7,15,000 बँधुए थे।[14] लगभग 16.5 लाख लोगों को शिविरों में भेजा गया, जिनमें से लगभग दस लाख की मृत्यु कारावास के दौरान हुई।

यह भी देखें

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  1. Applebaum, Anne. Gulag: A History. Anchor, 2004, pp. xxxi
  2. Applebaum, Anne. "Gulag: A History". Anchor, 2003, pp. 12
  3. The Lost Literature of Socialism, George Watson
  4. Applebaum, Anne. "Gulag: A History". Anchor, 2003, pp. 5
  5. Krausz, Tamás (27 February 2015). Reconstructing Lenin: An Intellectual Biography (अंग्रेज़ी भाषा में). NYU Press. p. 512. ISBN 978-1-58367-449-9.
  6. Applebaum, Anne. Gulag: A History. Anchor, 2003, pp. 50.
  7. Ellman, Michael (2002). "Soviet Repression Statistics: Some Comments" (PDF). Europe-Asia Studies. 54 (2): 1151–1172. डीओआई:10.1080/0966813022000017177. एस2सीआईडी 43510161. मूल से (PDF) से 25 मई 2019 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 14 August 2011.
  8. "Gulag | Definition, History, Prison, & Facts". Britannica (अंग्रेज़ी भाषा में). 2024-06-21. अभिगमन तिथि: 2024-07-15.
  9. "Gulag: A History, by Anne Applebaum (Doubleday)". The Pulitzer Prizes. 2004. अभिगमन तिथि: 2019-11-13.
  10. Marc Elie. Khrushchev's Gulag: the Soviet Penitentiary System after Stalin's death, 1953-1964. Denis Kozlov et Eleonory Gilburd. The Thaw: Soviet Society and Culture during the 1950s and 1960s, Toronto University Press, pp.109-142, 2013, 978-1442644601. ⟨hal-00859338⟩
  11. White, Joseph Robert (2009). "Introduction to the Early Camps". Early Camps, Youth Camps, and Concentration Camps and Subcamps under the SS-Business Administration Main Office (WVHA). Encyclopedia of Camps and Ghettos, 1933–1945. Vol. 1. Indiana University Press. pp. 3–16. ISBN 978-0-253-35328-3.
  12. Wachsmann, Nikolaus (2009). "The Dynamics of Destruction: The Development of the Concentration Camps, 1933–1945". In Jane Caplan; Nikolaus Wachsmann (eds.). Concentration Camps in Nazi Germany: The New Histories. Routledge. pp. 17–43. ISBN 978-1-135-26322-5.
  13. "Concentration Camp Listing". Belgium: Editions Kritak. Sourced from Van Eck, Ludo Le livre des Camps and Gilbert, Martin (1993). Atlas of the Holocaust. New York: William Morrow. ISBN 0-688-12364-3.. In this online site are the names of 149 camps and 814 subcamps, organized by country.
  14. Evans, Richard J. (2005). The Third Reich in Power. New York: Penguin Group. ISBN 978-0-14-303790-3.
  15. Arthur Grosjean (10 March 2014). "Internement, emprisonnement et guerre d'indépendance algérienne en métropole : l'exemple du camp de Thol (1958-1965)". Criminocorpus. Revue d'Histoire de la justice, des crimes et des peines (फ़्रेंच भाषा में). डीओआई:10.4000/criminocorpus.2676. एस2सीआईडी 162123460. मूल से से 7 November 2022 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 7 November 2022.