यरुशलम की स्थिति

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यरुशलम शहर की स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानूनी और कूटनीतिक रूप से अनिर्णीत है।

6 दिसंबर 2017 को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने यरूशलम को इज़राइल देश की राजधानी माना लेकिन अरब देशों ने यरूशलेम को राजधानी बनाए जाने पर फैसले का कड़ा विरोध किया। एक नजर में यरुशलम यरुशलम की आबादी 8.82 लाख है। शहर में 64 फीसद यहूदी, 35 फीसद अरबी और एक फीसद अन्य धर्मों के लोग रहते हैं। शहर का क्षेत्रफल 125.156 वर्ग किमी है। इजरायल और फलस्तीन, दोनों ही अपनी राजधानी यरुशलम को बनाना चाहते थे। इस ऐतिहासिक शहर में मुस्लिम, यहूदी और ईसाई समुदाय की धार्मिक मान्यताओं से जुड़े प्राचीन स्थल हैं।

स्थिति[संपादित करें]

यरुशलम पर इजराइली कब्जा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले का विरोध करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा था कि इस विवादित मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र के नियमों के साथ साथ इजराइल और फिलिस्तीन के बीच तय बिंदुओं पर होना चाहिए। 1980 में इजराइल ने यरुशलम को राजधानी घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव पारित कर पूर्वी यरुशलम पर इजराइल के कब्जे की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। 1980 से पहले यरुशलम में नीदरलैंड और कोस्टा रिका जैसे देशों के दूतावास थे। लेकिन 2006 तक देशों ने अपना दूतावास तेलअवीव स्थानांतरित कर लिए थे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय यरुशलम पर इजराइल के आधिपत्य का विरोध करता आया है और न ही यरुशलम को इजराइल राजधानी मानता है। लिहाजा तेलअवीव में ही सभी 86 देशों के दूतावास हैं।

यरुसलम विवाद[संपादित करें]

अमेरिकी राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रम्प दुवारा 6 दिसंबर 2017 को विरोधों की अनदेखी करते हुए यरुशलम को इजराइल की राजधानी घोषित किया गया। अमेरिका हमेसा यरूसलेम को एक पवित्र स्थान मानता है, वर्ष 1948 को अमेरिकी राष्टपति हैरी टूमेन ने इजराइल को मान्यता दी थी ऐसा करने वाले वे प्रथम विश्व स्तरीय नेता थे।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]