यदुनाथ भट्टाचार्य

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यदुनाथ भट्टाचार्य (जदुनाथ भट्टाचार्य) विष्णुपुर घराने के प्रसिद्ध स्ंगीतकार थे। वे 'जदु बट्ट' नाम से प्रसिद्ध हैं। वन्दे मातरम् की धुन उन्होने ही तैयार की थी।

यदुनाथ भट्टाचार्य का जन्म १८४० ई में हुआ था। वे विष्णुपुर नगर के कडकुली क्षेत्र के निवासी थे। उनके पिता श्री मधुसूदन भट्टाचार्य गायक एवं वादक थे। उन्होने मृदंग और सितार घर पर ही सीख लिया। बाद में उन्होने संगीत की शिक्षा रामशंकर भट्टाचार्य और गंगानारायण भट्टाचार्य से ग्रहण की। वे दोनों संगीतकार विष्णुपुर राजाओं के दरबारी संगीतज्ञ थे।[1]

यदुनाथ भट्टाचार्य, रवीन्द्रनाथ ठाकुर के स्ंगीत के गुरु थे। पंचकोट के राजाओं ने उन्हें 'रंगनाथ' की पदवी से विभूषित किया जबकि त्रिपुरा के महाराजा ने उन्हें 'तनराज' की पदवी प्रदान की थी।

वे ध्रुपद के महान कलाकार माने जाते हैं। उन्होने कई गीतों की रचना की है। यदुनाथ भट्टाचार्य का देहान्त ४० वर्ष की अल्पायु में ही हो गया।

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