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मोहम्मद अल-मकरी

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मोहम्मद अल-मकरी
मोहम्मद अल-मकरी

एक पुरानी फ्रांसीसी पत्रिका के आवरण पर मोहम्मद अल-मकरी

मोरक्को के ग्रैंड वज़ीर (सद्र-ए-आज़म)
शासकअब्द अल-हफीद
यूसुफ
मोहम्मद पंचम

जन्म 1841
उजदा, मोरक्को
मृत्यु 9 सितम्बर 1957
रबात, मोरक्को
राष्ट्रीयता मोरक्कन
राजनैतिक पार्टी निर्दलीय
व्यवसाय राजनीतिज्ञ, राजनयिक

मोहम्मद अल-मकरी (जन्म: 1841 – निधन: 9 सितम्बर 1957) मोरक्को के एक राजनेता और राजनयिक थे। उन्होंने 1911 से 1955 तक मोरक्को के ग्रैंड वज़ीर (सद्र-ए-आज़म) के पद पर कार्य किया। अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान वे अब्द अल-हफीद, यूसुफ और मोहम्मद पंचम सहित मोरक्को के तीन सुल्तानों की सरकारों का हिस्सा रहे। उनका राजनीतिक जीवन मोरक्को पर फ्रांसीसी संरक्षण (French Protectorate) लागू होने से पूर्व आरम्भ हुआ और 1955 में मोरक्को की स्वतंत्रता प्रक्रिया की शुरुआत तक चला।

प्रारंभिक जीवन और प्रशासनिक शुरुआत

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मोहम्मद अल-मकरी का जन्म 1841 के आसपास मोरक्को के उजदा शहर में हुआ था। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, उनका परिवार मूल रूप से अल्जीरिया के त्लेमसेन क्षेत्र का निवासी था, जो बाद में विस्थापित होकर मोरक्को आ गया था।[1] अल-मकरी ने अपनी आरंभिक शिक्षा के अंतर्गत पारंपरिक इस्लामी अध्ययन और भाषा की शिक्षा प्राप्त की।

शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उन्होंने मोरक्को के पारंपरिक प्रशासनिक ढांचे में काम करना शुरू किया, जिसे 'मखज़ेन' (Makhzen) कहा जाता था। मखज़ेन मोरक्को की एक विशिष्ट शासन प्रणाली थी जिसमें सुल्तान, सैन्य अधिकारी और कर संग्रहकर्ता शामिल होते थे। सुल्तान हसन प्रथम के शासनकाल में अल-मकरी को राज्य प्रशासन के विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया। यहाँ उन्होंने वित्तीय और न्यायिक मामलों का प्रबंधन किया, जहाँ से उनके कूटनीतिक और राजनीतिक करियर का आरंभ हुआ।[2][3]

कूटनीतिक कार्य और ग्रैंड वज़ीर का पद

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1906 में आयोजित अल्जेसिरस सम्मेलन (Algeciras Conference) में अल-मकरी ने सुल्तान अब्द अल-अजीज के प्रतिनिधि के तौर पर मोरक्को का प्रतिनिधित्व किया। यह सम्मेलन मोरक्को के भविष्य और वहां यूरोपीय देशों, विशेषकर फ्रांस और स्पेन के प्रभाव को निर्धारित करने के लिए बुलाया गया था।

सम्मेलन के बाद मोरक्को के प्रशासन में उनकी सक्रियता बढ़ गई। 1911 में उन्हें मोरक्को का ग्रैंड वज़ीर नियुक्त किया गया। राज्य प्रशासन में यह पद सुल्तान के बाद सबसे ऊँचा माना जाता था।[4] 1912 में जब मोरक्को ने फ्रांस के संरक्षण को स्वीकार करते हुए 'फेज़ की संधि' पर हस्ताक्षर किए, तब भी अल-मकरी इस पद पर कार्यरत रहे।

फ्रांसीसी संरक्षण के दौरान (1912-1956)

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फ्रांसीसी संरक्षण के दौर में अल-मकरी ने सुल्तान यूसुफ और उनके बाद सुल्तान मोहम्मद पंचम के ग्रैंड वज़ीर के तौर पर काम किया। इस व्यवस्था के तहत, वास्तविक सत्ता फ्रांसीसी रेजिडेंट जनरल (Resident General) के हाथों में केंद्रित थी, जबकि ग्रैंड वज़ीर जैसे पारंपरिक पदों के पास मुख्य रूप से सीमित प्रशासनिक शक्तियां ही शेष थीं। इस दौरान उनका मुख्य कार्य मोरक्को के राजमहल और फ्रांसीसी प्रशासन के बीच आधिकारिक संपर्क बनाए रखना था। 1927 में सुल्तान मोहम्मद पंचम के राज्याभिषेक से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्थाओं में भी वे शामिल थे।[5][6][7]

बीसवीं सदी के मध्य में मोरक्को के भीतर फ्रांसीसी शासन के विरुद्ध राष्ट्रवादी आंदोलनों की शुरुआत हुई। अल-मकरी द्वारा फ्रांसीसी प्रशासन के साथ किए गए समन्वय के कारण मोरक्को के राष्ट्रवादी नेता उनके आलोचक बन गए। राष्ट्रवादी गुटों का तर्क था कि ग्रैंड वज़ीर की नीतियां फ्रांसीसी औपनिवेशिक हितों के पक्ष में थीं। मोरक्को के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाइयों और गिरफ्तारियों के संदर्भ में प्रशासन के प्रमुख के तौर पर उनका नाम जुड़ा रहा। इन घटनाओं के कारण स्थानीय राजनीति में उनकी स्थिति विवादित रही।[8]

1953 का संकट और जीवन का अंत

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1953 में फ्रांसीसी प्रशासन ने सुल्तान मोहम्मद पंचम को निर्वासित कर मेडागास्कर भेज दिया और उनके स्थान पर मोहम्मद बेन अराफा को मोरक्को का नया सुल्तान घोषित कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान अल-मकरी ने ग्रैंड वज़ीर के पद से इस्तीफा नहीं दिया और नए सुल्तान के प्रशासन में अपना काम जारी रखा। सुल्तान का निर्वासन मोरक्को के इतिहास की एक बड़ी घटना थी, और अल-मकरी के पद पर बने रहने का मोरक्को के राष्ट्रवादी संगठनों और आम जनता द्वारा व्यापक विरोध किया गया।

1955 के अंत में मोरक्को में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप फ्रांस सरकार ने सुल्तान मोहम्मद पंचम को निर्वासन से वापस बुलाया। सुल्तान की वापसी और देश की स्वतंत्रता की प्रक्रिया आरंभ होते ही मोहम्मद अल-मकरी को ग्रैंड वज़ीर के पद से हटा दिया गया। इसके पश्चात्, नवगठित सरकार ने उनके कार्यकाल के दौरान अर्जित की गई संपत्तियों को जब्त करने के आदेश जारी किए। संपत्ति जब्ती से संबंधित ये आदेश तत्कालीन आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किए गए थे।[9]

9 सितम्बर 1957 को रबात शहर में मोहम्मद अल-मकरी का निधन हो गया। डच और फ्रांसीसी अभिलेखों के अनुसार मृत्यु के समय उनकी आयु लगभग 116 वर्ष थी।[10]

सन्दर्भ

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  1. السبتي, عدنان (2017-01-02). "محمد المقري.. لعنة الحكم - زمان". زمان (अरबी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-03-18.
  2. "ذاكرة مدينة وجدة المعرفية: الفقيه العلامة المكي المقري - الحلقة 11 - OujdaCity". OujdaCity (फ़्रेंच भाषा में). 2018-12-30. अभिगमन तिथि: 2026-03-18.
  3. السبتي, عدنان (2017-01-02). "محمد المقري.. لعنة الحكم - زمان". زمان (अरबी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-03-18.
  4. "الصدر الأعظم.. ملوك غير متوجين حكموا المغرب". مغرس. अभिगमन तिथि: 2026-03-18.
  5. الصباح (2013-06-24). "المقري… جزائري بلغ أسمى المراتب في المغرب | جريدة الصباح". assabah.ma (अरबी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-03-18.
  6. الصباح (2013-06-24). "التازي: المقري نصب محمد الخامس فوق باخرة | جريدة الصباح". assabah.ma (अरबी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-03-18.
  7. الصباح (2013-06-24). "في رواية أخرى… المقري وصي خان السلطان | جريدة الصباح". assabah.ma (अरबी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-03-18.
  8. "المقري.. الصدر الأعظم الذي اقترن اسمه بمقر التعذيب". مغرس. अभिगमन तिथि: 2026-03-18.
  9. "الجريدة الرسمية 2664" (PDF) (अरबी भाषा में). p. 11. मूल से (PDF) से 5 October 2023 को पुरालेखित।.
  10. Vredenburch, H.F.L.K. (1985). Den Haag antwoordt niet: Herinneringen van JHR. Mr. H.F.L.K. Vredenburch. ISBN 9789024780716.

बाहरी कड़ियाँ

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साँचा:नियंत्रण प्राधिकरण