मोहन गोस्वामी

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लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी भारतीय थलसेना की पैराशूट रेजिमेंट के एक सैनिक थे। उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया, यह शांति काल में सैनिक को दिया जाने सर्वोच्च वीरता सम्मान है। 3 सितम्बर 2015 को पैराशूट रेजिमेंट की 9वीं वाहिनी में सेवा देते हुये जम्मू और कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में आतंकियों के घात लगाकर किये गये हमले में गोस्वामी शहीद हुये। कुपवाड़ा में आतंकवादियों का सामना करने के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।[1][2][3][4]

पूर्व जीवन[संपादित करें]

गोस्वामी का जन्म भारतीय राज्य उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले के लालकुआँ के इंदिरा नगर प्रथम गाँव में हुआ।[5]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Lance Naik killed in Kashmir operation posthumously conferred Ashok Chakra". द इंडियन एक्सप्रेस (अंग्रेज़ी में). 2016-01-25. अभिगमन तिथि 2021-02-28.
  2. Sep 5, PTI / Updated:; 2015; Ist, 20:45. "Brave Army commando who killed 10 terrorists dies | India News - Times of India". द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2021-02-28.सीएस1 रखरखाव: फालतू चिह्न (link)
  3. PTI (2015-09-05). "Martyred soldier Mohan Nath Goswami laid to rest with military honours". mint (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2021-02-28.
  4. "Lance Naik Mohan Nath Goswami posthumously conferred Ashok Chakra". ज़ी न्यूज़ (अंग्रेज़ी में). 2016-01-25. अभिगमन तिथि 2021-02-28.
  5. "Lance Naik Goswami killed 10 terrorists in 11 days, died fighting in Kashmir Valley - India News , Firstpost". Firstpost. 2015-09-05. अभिगमन तिथि 2021-02-28.