मोलोटोव कॉकटेल
| मोलोटोव कॉकटेल (Molotov cocktail) | |
|---|---|
| प्रकार | कामचलाऊ आग लगाने वाला उपकरण (IID) |
| उत्पत्ति का मूल स्थान | फ़िनलैंड / स्पेन |
| सेवा इतिहास | |
| द्वारा प्रयोग किया | विद्रोही, छापामार लड़ाके, नागरिक सुरक्षा बल |
| युद्ध | स्पेनिश गृहयुद्ध, शीतकालीन युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, विभिन्न नागरिक विद्रोह |
मोलोटोव कॉकटेल (अंग्रेज़ी: Molotov cocktail), जिसे आम भाषा में पेट्रोल बम, गैसोलीन बम, या फ़ायर बम भी कहा जाता है, एक प्रकार का 'कामचलाऊ आग लगाने वाला उपकरण' है। यह एक अत्यंत ही सरल लेकिन घातक हथियार है जिसे मुख्य रूप से कांच की बोतल और ज्वलनशील तरल पदार्थ की मदद से बनाया जाता है। अपने आसान निर्माण और कम लागत के कारण, इसका उपयोग ऐतिहासिक रूप से अनियमित सैनिकों, विद्रोहियों, छापामार लड़ाकों और दंगाइयों द्वारा 'शहरी युद्ध' और बख़्तरबंद वाहनों (जैसे टैंकों) के खिलाफ किया जाता रहा है।[1][2][3]
नाम की उत्पत्ति और 'शीतकालीन युद्ध'
[संपादित करें]यद्यपि इस प्रकार के पेट्रोल बमों का पहला प्रलेखित उपयोग 1936-1939 के स्पेनिश गृहयुद्ध के दौरान हुआ था, लेकिन इसे "मोलोटोव कॉकटेल" नाम 1939 में फ़िनलैंड और सोवियत संघ के बीच हुए शीतकालीन युद्ध के दौरान मिला।
यह नाम तत्कालीन सोवियत विदेश मंत्री व्याचेस्लाव मोलोटोव के नाम पर फ़िनिश सैनिकों द्वारा एक व्यंग्य के रूप में रखा गया था। युद्ध के दौरान, जब सोवियत वायु सेना फ़िनलैंड के शहरों पर बमबारी कर रही थी, तो मोलोटोव ने सोवियत रेडियो पर यह झूठा दावा किया कि वे बम नहीं, बल्कि भूखे फ़िनिश नागरिकों के लिए भोजन गिरा रहे हैं। इसके जवाब में, फ़िनिश लोगों ने उन क्लस्टर बमों को "मोलोटोव की रोटियों की टोकरी" कहना शुरू कर दिया।
बाद में, जब फ़िनिश सैनिकों ने सोवियत टैंकों को नष्ट करने के लिए पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया, तो उन्होंने इसे "भोजन के साथ परोसा जाने वाला पेय" बताते हुए इसका नाम मोलोटोव कॉकटेल रख दिया।[4]
डिज़ाइन और कार्यप्रणाली
[संपादित करें]मोलोटोव कॉकटेल का मूल डिज़ाइन बहुत ही सरल होता है:
- बोतल और ईंधन: एक आसानी से टूटने वाली कांच की बोतल को पेट्रोल, गैसोलीन, या अल्कोहल जैसे उच्च ज्वलनशील तरल से आंशिक रूप से भर दिया जाता है।
- गाढ़ा करने वाले पदार्थ: आग को अधिक समय तक जलाने और लक्ष्य (जैसे टैंक के कवच या इंसान) से चिपकाए रखने के लिए, ईंधन में मोटर ऑयल, टार, डिश सोप, या स्टायरोफोम मिलाया जाता है। यह मिश्रण इसे 'नेपलम' जैसा गुण प्रदान करता है।
- इग्निशन (बत्ती): बोतल के मुंह को एक कॉर्क या टाइट ढक्कन से बंद कर दिया जाता है। इसके बाद एक कपड़े के टुकड़े को ईंधन में भिगोकर बोतल के बाहरी हिस्से या ढक्कन पर कसकर बांध दिया जाता है।
फेंकने से ठीक पहले बत्ती को आग लगाई जाती है। जब यह जलती हुई बोतल किसी कठोर सतह (जैसे टैंक या सड़क) से टकराकर टूटती है, तो अंदर का ईंधन हवा में वाष्पीकृत होकर एक विशाल 'आग के गोले' में बदल जाता है।[5][6]
आधुनिक उपयोग और कानूनी स्थिति
[संपादित करें]शीतकालीन युद्ध के बाद, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मोलोटोव कॉकटेल टैंक-रोधी रक्षा का एक प्रमुख हथियार बन गया। 1956 की हंगेरियन क्रांति और हाल ही में 2022 के रूसी-यूक्रेनी युद्ध के दौरान भी नागरिक सुरक्षा बलों द्वारा इसका भारी उपयोग देखा गया है।
हालाँकि, इसकी विनाशकारी प्रकृति के कारण, अधिकांश देशों में नागरिकों द्वारा मोलोटोव कॉकटेल का निर्माण या उपयोग करना पूरी तरह से अवैध है। इसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा एक 'विनाशकारी उपकरण' और आतंकवाद/दंगा फैलाने वाले हथियार के रूप में वर्गीकृत किया गया है।[7]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Keegan, John (1989). The Second World War. Penguin Books. pp. 172-175. ISBN 978-0143035732.
- ↑ "M1 Incendiary, Frangible"
- ↑ "Molotov cocktail | Origin, History, & Variations | Britannica"
- ↑ Trotter, William R. (2003). The Winter War: The Russo-Finnish War of 1939-40. Aurum Press. pp. 72–75. ISBN 978-1854109323.
- ↑ Smith, David (2010). "Improvised Incendiary Devices and their Tactical Use". Military History Quarterly. 22 (4): 45–50.
- ↑ "Sticks, Stones, and Molotov Cocktails: Unarmed Collective Violence and Democratization"
- ↑ Hoffman, Bruce (2006). Inside Terrorism. Columbia University Press. pp. 230-234. ISBN 978-0231126991.
