लक्ष्मी नारायण मंदिर, मोदीनगर

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लक्ष्मी नारायण मंदिर, मोदीनगर
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नाम: श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, मोदी मंदिर
निर्माता: रायबहादुर गूजरमल मोदी
निर्माण
काल :
देवता: मुख्य लक्ष्मी नारायण, अन्य सभी मुख्य भगवान
वास्तु
कला:
हिन्दू वास्तुकला
स्थान: मोदीनगर,उत्तर प्रदेश

लक्ष्मीनारायण मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोदीनगर कस्बे में स्थित है। इसे प्रचलित रूप में मोदी मंदिर भी कहा जाता है। दिल्ली के बिड़ला मंदिर से कुछ कुछ मेल खाते हुए इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।

स्थिति[संपादित करें]

यह मंदिर दिल्ली-मेरठ-देहरादून राजमार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग) संख्या ५८, जो कि मोदीनगर के बीचों बीच से निकलता है, पर स्थित है। यह मंदिर, मार्ग के पश्चिमी ओर स्थित है। यह मोदीनगर के मुख्य बाजार से लगा हुआ, मोदीनगर शून्य किलोमीटर के मीलपत्थर से २०० मीटर की दूरी पर ही स्थित है। इसके सामने ही मोदी उद्योग साम्राज्य का निवास स्थान मोदी भवन बना हुआ है। मोदी भवन मार्ग के पूर्वी ओर बना है। इस मंदिर से लगा हुआ ही मोदीनगर का लोअर बाजार है, व डाकखाना है। पास ही मोदी नगर की मशहूर शिकंजी वालों की दुकानें हैं। इसके सामने ही मोदी भवन से लगी हुई मोदी इंडस्ट्रीज़ का कार्यालय, मोदी चीनी मिल, व दूसरी ओर अपर बाजार है। आगे रेलवे रोड निकलती है, जिसके दूसरे छोर पर मोदीनगर का रेलवे स्टेशन है।

निर्माण[संपादित करें]

इस मंदिर का निर्माण मोदी उद्योग साम्राज्य के संस्थापक रायबहादुर गूजरमल मोदी ने ३ फरवरी १९६३ को हिन्दू काल गणना के अनुसार वसंत पंचमी के दिन कराई थी। इस मंदिर की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा हेतु हिमालय से स्वामी कृष्णाश्रम जी महाराज को बुलाया गया था। कहते हैं, कि वे अपने पूर्ण जीवन में मात्र दो बार ही हिमालय से नीचे उतरे थे। पहली बार पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुरोध पर काशि हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए आए थे। दूसरी बार रायबहादुर गूजरमल मोदी एवं उनकी धर्मपत्नी दयावती मोदी के अनुरोध पर यहां प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आए थे। उनके अलावा श्री श्री आनंदमयी मां, श्री हरिबाबा, स्वामी कृष्णानंद गोविंदानंद जी, ब्रह्मचारी भगवतस्वरूप जी व कई अन्य पहुँचे हुए संत महात्मा पधारे थे।

मंदिर[संपादित करें]

मंदिर में सबसे पहले पहल श्री लक्ष्मी-नारायण जी, श्री उमा-महेश्वर तथा श्री दुर्गा जी की मूर्तियों की स्थापना की गई थी। बाद में हनुमान जी, गायत्री माता, संतोषी माता की मूर्तियां स्थापित की गईं थीं।

वेंकटेश्वर मूर्ति[संपादित करें]

कालांतर में भगवान श्री वेंकटेश्वर की मूर्ति की स्थापना की गई थी। इस मंदिर की मूर्ति का नित्य पूजा अर्चना के साथ ही, प्रत्येक शुक्रवार की सुबह साढ़े पाँच बजे अभिषेक किया जाता है, जो कि लगभग डेड़ घंटे चलता है। इसके बाद इनका शृंगार भी किया जाता है।

रामलीला मंच[संपादित करें]

मंदिर के दक्षिणी ओर एक बहुत ही बड़ा लाल पत्थर का सुंदर रामलीला मंच निर्मित है, जिसके आगे बहु स्तरीय दर्शक दीर्घा बनी है, जिसमें लगभग एक हजार दर्शक बैठकर रामलीला का आनंद ले सकते हैं। मंच में तीन अंकों के लिए उपमंच बने हैं। जिनसे रामलीला का एक अंक हो कर चुकता है, जिसको हटाया जा रहा होता है, उस ही समय दूसरे मंच पर अगला अंक प्रदर्शित हो रहा होता है। एवं तीसरे मंच पर अगले अंक की तैयारी हो रही होती है। इस प्रकार दूसरे मंच का अंक पूरा होने के साथ ही तीसरे अंक का पर्दा उठ जाता है, एवं दर्शकों का तारतम्य बना रहता है, व कोई प्रतीक्षा अन्तराल नहीं आता है। मंच के स्थापत्य को प्राचीन हिन्दू स्थापत्य शैली में ही बनाया गया है।

स्थापत्य[संपादित करें]

मोदी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार से दर्शन।

यह पूरा मंदिर लाल बलुआ पत्थर से बना है, जिसके अंदर श्वेत संगमर्मर व अन्य पत्थरों का प्रयोग किया हुआ है। इस मंदिर की शैली देखें तो मुख्य शिखर कलिंग हिन्दू मंदिर शैली के बने हैं। शेष मंदिर भी हिन्दू मंदिर शैली पर बने हैं। मुख्य मंदिर के साथ ही बाईं ओर देवी दुर्गा का, एवं दाईं ओर भगवान उमा-महेश्वर का मंदिर बना हूआ है। ये तीनो मंदिर अंदर से आपस में जुड़े हुए हैं। मुख्य शिखर सबसे ऊंचा है, जिसपर चाँदी का छत्र शोभा पाता है। शेष दोनों शिखर मुख्य शिखर से कुछ छोटे हैं, जो कि सहायक रूप में खडए दिखाई देते हैं, व उन दोनों पर रजत त्रिशूल शोभा पाते हैं, शिवजी के शिखर वाले त्रिशूल में एक डमरू भी बंधा है। मुख्य मंदिर समूह से उत्तरी (दाईं) ओर हनुमान जी का मंदिर है, जिसमें उनकी विशाल एवं भव्य मूर्ति स्थापित है। इस से लगा हुआ ही श्री राम दरबार का मंदिर है। मुख्य मंदिर से दक्षिणी ओर (बाईं) यज्ञशाला बनी है, जिससे लगा हुआ ही भगवान श्रीवेंकटेश्वर मंदिर स्थित है। इसमें उनकी भि एक विशाल मूर्ति स्थापित है। शेष मंदिर के आगे श्वेत संगमर्मर का खुला प्रांगण है। इसके आगे सरोवर है, जिसमें फव्वारे लगे हैं, व एक विशाल पीतल की पनघट से दो घड़े ले जाती हुई मूर्ति लगी है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]