मैं जब तक आई बहार
| इस लेख में सत्यापन हेतु अतिरिक्त सन्दर्भ अथवा स्रोतों की आवश्यकता है। कृपया विश्वसनीय स्रोत जोड़कर इस लेख में सुधार करें। स्रोतहीन सामग्री को चुनौती दी जा सकती है और हटाया भी जा सकता है। (जुलाई 2026) स्रोत खोजें: "मैं जब तक आई बहार" – समाचार · अखबार पुरालेख · किताबें · विद्वान · जेस्टोर (JSTOR) |
| मैं जब तक आई बहार | |
|---|---|
| [[चित्र:|]] | |
| लेखक | गगन गिल |
| देश | भारत |
| भाषा | हिंदी |
| विषय | हिंदी साहित्य (काव्य) |
| प्रकाशक | राजकमल प्रकाशन |
| प्रकाशन तिथि | 2018 |
जब मैं आई बहार एक हिंदी कविता संग्रह है। जिसको कवयित्री गगन गिल के द्वारा लिखा गया है। जिससे इनको 2024 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।[1]
इसका प्रथम प्रकाशन वर्ष 2018 में हुआ। यह मनुष्य, अस्तित्व, स्मृति, एकांत, प्रेम, दुःख, आध्यात्मिकता तथा समय जैसे विषयों को गहन संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है। संग्रह की कविताएँ आत्मानुभूति और सामाजिक यथार्थ के बीच सेतु का कार्य करती हैं।
विषयवस्तु
[संपादित करें]इस संग्रह की कविताओं में मानव जीवन की जटिलताओं, आत्मचिंतन, वेदना, करुणा और आशा का सशक्त चित्रण मिलता है। इनकी काव्य-दृष्टि व्यक्तिगत अनुभवों को व्यापक मानवीय संदर्भों से जोड़ती है। संग्रह में स्त्री-अनुभव, आध्यात्मिक प्रश्नों और बदलते सामाजिक परिवेश की अभिव्यक्ति भी दिखाई देती है। कविताएँ पाठक को अपने भीतर झाँकने और जीवन के गहरे अर्थों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं।
कभी कभी अपना सच” कविता में कवयित्री अपनी सहानुभूतिपूर्ण अभिव्यक्ति में उपदेशात्मक लहजा नहीं अपनातीं; बल्कि सत्य की अनूठी आवाज़ नैतिक दिवालियापन के प्रतिध्वनि कक्ष के विरुद्ध खड़ी है[2]
विशेषता
[संपादित करें]- मुक्त छंद का प्रभावी प्रयोग।
- गहन प्रतीक और बिंब योजना।
- आत्मसंवाद और दार्शनिक चिंतन की प्रधानता।
- सरल किन्तु अर्थगर्भित भाषा।
- स्त्री-अनुभव और मानवीय संवेदना का सशक्त प्रस्तुतीकरण।
गगन गिल की कविता में मौन, स्मृति और आध्यात्मिक खोज के स्वर प्रमुख हैं। इनकी कविताओं की भाषा बहुत अनूठी और प्रतीकात्मक है। [3]
महत्व
[संपादित करें]यह संग्रह केवल कविताओं का मात्र संकलन नहीं है, बल्कि आधुनिक मनुष्य के आंतरिक संघर्ष, अकेलेपन, करुणा, स्मृति और अस्तित्वगत प्रश्नों का संवेदनशील दस्तावेज़ भी है। इन्होंने इस काव्य संग्रह में व्यक्ति के भीतरी संसार और बाहरी सामाजिक यथार्थ के बीच के संबंधों को अत्यंत सूक्ष्मता से व्यक्त किया गया है।
इन्होंन इस काव्य संग्रह में डूबने को निद्वंद भाव से स्वीकार किया है —
यह डूबना हर ओर है, चाहे प्रेम में हो, जीवन में, चाहे शोक में- “तू मेरे भीतर है शोक की जगह पर”, “शोक मत कर पिता ने कहा अब शोक ही तेरा पिता है.”[4]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "..:: Welcome to Sahitya Akademi ::." sahitya-akademi.gov.in. अभिगमन तिथि: 14 जून 2026.
- ↑ Ghosh, Sudeep (12 अक्टूबर 2025). "Main Jab Tak Aai Baahar by Gagan Gill". The Bangalore Review. अभिगमन तिथि: 14 जून 2026.
- ↑ Gill, Gagan (18 दिसम्बर 2024). "Main Jab Tak Aayi Bahar" (अंग्रेज़ी भाषा में). Rajkamal Prakashan. अभिगमन तिथि: 14 जून 2026.
- ↑ dev, arun (11 मई 2023). "गगन गिल का काव्य-संसार: सुदीप्ति". समालोचन. अभिगमन तिथि: 15 जून 2026.