मेडिकल न्यायशास्त्र

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1967 में मृत एक महिला के मरणोत्तर परीक्षा के पश्चात चहरे की तस्वीर

मेडिकल न्यायशास्त्र विज्ञान और चिकित्सा का एक शेत्र है जिसमें इन दोनों के इस्तेमाल से कानूननी समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इस शेत्र में कार्यरत मुख्यतः डॉक्टर एवम मेडिकल शिक्षा से जुड़े वैज्ञानिक होते हैं, जिनका दायित्व मृत्यु का कारण एवम उससे सम्बन्धित अन्य प्रश्नों के बारे में मरणोत्तर परीक्षा (पोस्टमार्टम) के बाद राय देने का होता है।

मेडिकल न्यायशास्त्र का उपयोग[संपादित करें]

आधुनिक चिकित्सा कानून के द्वारा बनाया गया क्षेत्र है जो की राज्य के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इसके न्याय प्रणाली में प्रयोग से मृत्यु से जुड़े अपराध, बलात्कार के बढ़ती घटनाएँ और पितृत्व से जुड़े मामलों की जाँच की जाती है। कानून से संबंधित अन्य मामले जैसे कि विवादास्पद पितृत्व, बलात्कार सुनिश्चित करना, अप्राकृतिक शारिरिक सम्बंध, घाव के कारण तय करना, विषाक्तन आदि में भी इनकी महत्पूर्ण भूमिका होती है|[1]

अतिरिक्त प्रयोग[संपादित करें]

मेडिकल न्यायशास्त्र अपराधी की मानसिक स्थिति पता लगाने में मदद करते हैं। इससे यह भी पता चलता है की यह व्यक्ति किसी परिक्षण प्रणाली के लिए स्वस्थ है या नहीं। इस क्षेत्र की मदद से यह भी पता लगाया जाता है की मृत्यु को कितना समय हो गया है और मृत्यु का कारण क्या है अगर किसी वजह से कारण स्पष्ट न हो तो। इस क्षेत्र के द्वारा उन सभी चोटों का भी पता लग जाता है जिनको बहुत समय पूर्व शरीर पर अनुभव किया गया हो। यह क्षेत्र मौत का प्रमाण पत्र दिलवाने में भी सहायक है क्योंकि इसके अंतर्गत विज्ञानं और कानून दोनों का ही प्रयोग किया जाता है।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Alfred Swaine Taylor and Frederick John Smith (ed.). (1920.) Taylor's Principles and Practice of Medical Jurisprudence, 7 ed., Taylor & Francis.
  2. Theodric Romeyn Beck and William Dunloop. (1825.) Elements of Medical Jurisprudence, 2 ed., Oxford University Press. Jump up ^ James C. Mohr. (1993.) Doctors and the Law: Medical Jurisprudence in Nineteenth-Century America, Oxford University Press, New York City