मेड़तिया

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मेड़तिया राठौड़ राजपूतों का गोत्र है। इस गोत्र वाले राठौड़ राजपूतों का उद्गम नागौर जिले का मेड़ता गाँव है। राव दूदाजी के मेड़ता रियासत पर राज होने के कारण उनके वंशज मेड़तिया नाम से सुविख्यात हुए।

ये राठौड़ वंश की उच्च और सम्माननीय शाखा है[1] जोधपुर के शासक जोधा के पुत्र दूदाजी के वंशज मेड़ता के नाम से मेड़तिया कहलाये .... आज मेड़तिया राठोड़ो के राजस्थान, गुजरात व मध्य प्रदेश आदि स्थानो पर ठिकाने है आज राजस्थान में मेड़तिया नागौर, पाली, जालोर, अजमेर, झुनजुनु, सीकर, राजसमन्द, चित्तोर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़ आदि जिलों में है वही गुजरात में जामला बड़ा ठिकाना है और मालवा मध्य प्रदेश में मकरवान, चिराला आदि[2]

"मरण नै मेडतिया अर राज करण नै जौधा "
"मरण नै दुदा अर जान (बारात) में उदा "

उपरोक्त कहावतों में मेडतिया राठोडों को आत्मोत्सर्ग में अग्रगण्य तथा युद्ध कौशल में प्रवीण मानते हुए मृत्यु को वरण करने के लिए आतुर कहा गया है मेडतिया राठोडों ने शौर्य और बलिदान के एक से एक कीर्तिमान स्थापित किए है और इनमे राव जयमल का नाम सर्वाधिक प्रसिद्ध है। कर्नल जेम्स टोड की राजस्थान के प्रत्येक राज्य में "थर्मोपल्ली" जैसे युद्ध और "लियोनिदास" जैसे योद्धा होनी की बात स्वीकार करते हुए इन सब में श्रेष्ठ दिखलाई पड़ता है। जिस जोधपुर के मालदेव से जयमल को लगभग २२ युद्ध लड़ने पड़े वह सैनिक शक्ति में जयमल से १० गुना अधिक था और उसका दूसरा विरोधी अकबर एशिया का सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्ति था। अबुल फजल, हर्बर्ट, सर टामस रो, के पादरी तथा बर्नियर जैसे प्रसिद्ध लेखकों ने जयमल के कृतित्व की अत्यन्त ही प्रसंशा की है। जर्मन विद्वान काउंटनोआर ने अकबर पर जो पुस्तक लिखी उसमे जयमल को "Lion of Chittor" कहा |[3]

जब मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह जी जब जयमल मेड़तिया को मेवाड़ चित्तौड़गढ़ का सेना पति बना कुम्भलगढ़ चले गए तब मुग़ल अकबर ने युद्ध के वक़्त जयमल को अपनी और आने को कहा और गुलामी स्वीकारने पर मेवाड़ का राजा बनाने की शर्त राखी तब वीरवर सूर्यवंशी राजपूत गौरव राव जयमल मेड़तिया का उत्तर था

है गढ़ म्हारो म्है धणी,असुर फ़िर किम आण |

कुंच्यां जे चित्रकोट री दिधी मोहिं दीवाण ||

जयमल लिखे जबाब यूँ सुनिए अकबर शाह |

आण फिरै गढ़ उपरा पडियो धड पातशाह ||

अर्थात अकबर ने कहा जयमल मेड़तिया तू अपने प्राण और चित्तोर और महाराणा के लिए क्यों लूटा रहा है तू मेरा कब्ज़ा होने दे में तुजे तेरा मूल प्रदेश मेड़ता और मेवाड़ दोनों का राजा बना दूंगा पर जयमल ने इस बात को नकार कर उत्तर दिया मै अपने स्वामी के साथ विश्वासघात नहीं कर सकता मेरे जीते जी तू अकबर तुर्क यहाँ प्रवेश नहीं कर सकता मुझे महाराणा यहाँ का सेनापति बनाकर गए है।

कुछ मंदिर प्रसिद्ध मेड़तिया राठौड़[संपादित करें]

इतिहास और पूर्वज[संपादित करें]

1. महाराजराजा यशोविग्रह जी (कन्नौज राज्य के राजा)

2. महाराजराजा महीचंद्र जी

3. महाराज राजा चन्द्रदेव जी

4. महाराजराजा मदनपाल जी (1154)

5. महाराज राजा गोविन्द्र जी

6. महाराज राजा विजयचन्द्र जी जी (1162)

7. महाराज राजा जयचन्द जी (कन्नौज उत्तर प्रदेश 1193)

8. राव राजा सेतराम जी

9. राव राजा सीहा जी (बिट्टू गांव पाली, राजस्थान 1273)

10. राव राजा अस्थान जी (1292)

11. राव राजा दूहड़ जी (1309)

12. राव राजा रायपाल जी (1313)

13. राव राजा कान्हापाल जी (1323)

14. राव राजा जलमसी जी (1328)

15. राव राजा चड़ा जी (1344)

16. राव राजा तिडा जी (1357)

17. राव राजा सलखा जी (1374)

18.राव राजा विरमदेव जी (1383)

19.राव राजा चूण्डा जी (1422)

20. राव राजा रणमल जी (1438) ---. >>>

21.राव जोधा जी (1438-1488) जोधपुर के संस्थापक

22. राव दूदाजी (1461-1504) मेड़ता राज्य नागौर के संस्थापक [10]

== मेड़तिया राठौड़ो के मुख्य ठिकाने == चुवा डेगाना देवराज सिंह चुवा ढुंढिया, लुणसरा (नागौर), बरसाना (जायल)(ठाकुर दिलीप सिंह राठौड़ बरसाना) (मांधातासिंह राठौड़ बरसाना) सबलपुर,बोरुंदा, रानी गाँव(मकराना), अलनियावास, बदनौर, घाणेराव, राजपुरा ,जिलिया, रिया, माईदास , बलुन्दा, मसूदा, कुचामन ,गेलासर,बेड़वा, खरेश,[{सिंगरावट खुर्द,डीडवाना}] चाणौद, वरकाणा, रूवाँ सिन्दरली, रोडू,घीराडोदा, जैसलान ,बाकलिया, ध्यावा (लाडनूँ)[11], फलना गाव और गुजरात में जामला,दौलतगढ और धनौली , मध्य प्रदेश में मकरवान , चिराला जालोर मैं मेड़तिया के ठीकाणा जीवाणा व थलवाड़,गुडा रामजी,बोलगुडा (रानी, ​​पाली) आदि [12][13]

सन्दर्भ[संपादित करें]

[1]