मेंहदीपुर बालाजी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
मेंहदीपुर बालाजी (हनुमान) मन्दिर
बालाजी मंदिर
चित्र:Mehandipur Balaji.jpg
मुख्य मन्दिर में हनुमान की मूर्ति
धर्म संबंधी जानकारी
सम्बद्धताहिंदू धर्म
डिस्ट्रिक्टदौसा, करौली
देवताहनुमानजी
अवस्थिति जानकारी
अवस्थितिमेंहदीपुर, टोडाभीम (हिन्डौं के निकट)
राज्यराजस्थान
देशभारत
मेंहदीपुर बालाजी की राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
मेंहदीपुर बालाजी
राजस्थान में मेंहदीपुर की स्थिति
मेंहदीपुर बालाजी की भारत के मानचित्र पर अवस्थिति
मेंहदीपुर बालाजी
मेंहदीपुर बालाजी (भारत)
भौगोलिक निर्देशांक26°56′N 76°47′E / 26.94°N 76.79°E / 26.94; 76.79निर्देशांक: 26°56′N 76°47′E / 26.94°N 76.79°E / 26.94; 76.79

मेंहदीपुर बालाजी मन्दिर राजस्थान के तहसील (सिकराय) में स्थित हनुमान जी का एक प्रसिद्ध मन्दिर है। भारत के कई भागों में हनुमान जी को 'बालाजी' कहते हैं। यह स्थान दो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ बहुत आकर्षक दिखाई पड़ता है। यहाँ की शुद्ध जलवायु और पवित्र वातावरण मन को बहुत आनंद प्रदान करता है। यहाँ नगर-जीवन की रचनाएँ भी देखने को मिलेंगी।

बालाजी की प्रकट होने की धारणा[संपादित करें]

यहाँ तीन देवों की प्रधानता है— श्री बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल (भैरव)। यह तीन देव यहाँ आज से लगभग १००० वर्ष पूर्व प्रकट हुए थे। इनके प्रकट होने से लेकर अब तक बारह महंत इस स्थान पर सेवा-पूजा कर चुके हैं और अब तक इस स्थान के दो महंत इस समय भी विद्यमान हैं। सर्व श्री गणेशपुरी जी महाराज (भूतपूर्व सेवक) श्री किशोरपुरी जी महाराज (वर्तमान सेवक)। यहाँ के उत्थान का युग श्री गणेशपुरी जी महाराज के समय से प्रारम्भ हुआ और अब दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। प्रधान मंदिर का निर्माण इन्हीं के समय में हुआ। सभी धर्मशालाएँ इन्हीं के समय में बनीं। इस प्रकार इनका सेवाकाल श्री बालाजी घाटा मेंहदीपुर के इतिहास का स्वर्ण युग कहलाएगा।

प्रारम्भ में यहाँ घोर बीहड़ जंगल था। घनी झाड़ियों में द्रोर-चीते, बघेरा आदि जंगली जानवर पड़े रहते हैं।

वास्तव में इस मूर्त्ति को अलग से किसी कलाकार ने गढ़ कर नहीं बनाया है, अपितु यह तो पर्वत का ही अंग है और यह समूचा पर्वत ही मानों उसका 'कनक भूधराकार' द्रारीर है। इसी मूर्त्ति के चरणों में एक छोटी-सी कुण्डी थी, जिसका जल कभी बीतता ही नहीं था। रहस्य यह है कि महाराज की बायीं ओर छाती के नीचे से एक बारीक जलधारा निरन्तर बहती रहती है जो पर्याप्त चोला चढ़ जाने पर भी बंद नहीं होती।

इस प्रकार तीनों देवों की स्थापना हुई। विक्रमी-सम्वत् १९७९ में श्री महाराज ने अपना चोला बदला। उतारे हुए चोले को गाड़ियों में भरकर श्री गंगा में प्रवाहित करने हेतु बहुत से श्रद्धालु चल दिये। चोले को लेकर जब मंडावर रेलवे स्टेशन पर पहुँचे तो रेलवे अधिकारियों ने चोले को सामान समझकर सामान-शुल्क लेने के लिए उस चोले को तौलना चाहा, किन्तु वे तौलने में असमर्थ रहे। चोला तौलने के क्रम में वजन कभी एक मन बढ़ जाता तो कभी एक मन घट जाता; अन्तत: रेलवे अधिकारी ने हार मान लिया और चोले को सम्मान सहित गंगा जी को समर्पित कर दिया गया। उस समय हवन, ब्राह्मण भोजन एवं धर्म ग्रन्थों का पारायण हुआ और नये चोले में एक नयी ज्योति उत्पन्न हुई, जिसने भारत के कोने-कोने में प्रकाश फैला दिया।

आवागमन के साधन[संपादित करें]

राजस्थान राज्य के दो जिलों (करौलीदौसा) में विभक्त घाटा मेंहदीपुर स्थान दिल्ली-जयपुर-अजमेर-अहमदाबाद लाइन पर स्थित बाँदीकुई रेलवे स्टेशन से २४ मील की दूरी पर स्थित है। इसी प्रकार बड़ी लाइन के हिंडोन स्टेशन से भी यहाँ के लिए बसें मिलती हैं। अब तो आगरा, मथुरा, वृन्दावन, अलीगढ़ आदि से सीधी बसें जो जयपुर जाती हैं वे बालाजी के मोड़ पर रूकती हैं। फ्रंटीयर मेल से महावीर जी स्टेशन पर उतर कर भी हिंडोन होकर बस द्वारा बालाजी पहुँचा जा सकता है। हिंडोन सिटी स्टेशन पश्चिम रेलवे की बड़ी लाइन पर बयाना और महावीर जी स्टेशन के बीच दिल्ली, मथुरा, कोटा, रतलाम, बड़ोदरा, मुंबई लाइन पर स्थित है। हिंडोन से सवा घण्टे का समय बालाजी तक बस द्वारा लगता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

मेहंदीपुर बालाजी मन्दिर