मृत्युज शीतलन

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मृत्युज शीतलन (इंग्लिश: Algor Mortis ; लैटिन: algor—ठंड; mortis—मृत्यु) का मतलब होता है 'मरने के बाद शरीर के तापमान में क्रमश बदलाव आ जाना।' यह मौत का दूसरा चरण होता है। मरने के बाद शरीर का तापमान गिरने लगता है और शरीर एकदम ठंडा पढ़ जाता है। किन्तु आसपास का तापमान ३६.९ डीग्री से अधिक हो (जैसे मरुस्थल में) तो शव का तापमान घटने के बजाय बढ़ने लगेगा।

प्रयोज्यता (एप्लिकेबिलिटी)[संपादित करें]

मृत्युज शीतलन से हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि मृत्यु कितना समय पहले हुई होगी। उसके लिए विशेषज्ञ को उसका रेक्टल (गुदा) तापमान नापना पड़ता है क्योंकि रेक्टल तापमान ही मृत व्यक्ति का सही तापमान दर्शाता है। गलेसत्र समीकरण (Glaister equation) द्वारा यह अनुमान कर सकते हैं कि कितने घण्टे पहले मृत्यु हुई है। इस समीकरण में यह माना गया है कि शीतलन रैखिक रूप से हो रहा है। अशीतलन के रैखिक यह समीकरण निम्नलिखित है-

(36,9 °C - T) x

जहाँ T डिग्री सेल्सियस में मलाश्य का तापमान है।

क्योंकि जब शरीर अपघटित होने लगता है तो उसका तापमान फिर दोबारा से बढ़ने लगता है।

परिवर्तनशीलता[संपादित करें]

मुख्यतः तापमान में परिवेर्तन के कारण यह एक अच्छा कारक नहीं मन जा सकता जिससे हम मौत के सही समय का पता लगा सकें। क्योंकि तापमान में यह परिवेर्तन कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

  1. परिवेश के तापमान में उतार चढ़ाव या स्थिरता।
  2. कपड़ों का प्रकार या मोटाई।
  3. उस सतह की तापीय चालकता (थर्मल कंडक्टीविटी) , जिस पर एक शरीर निहित है।
  4. कोई रोग या दवा, जो शरीर का तापमान बढ़ा या घटा सकती है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.fmap.archives.gla.ac.uk/DC403/DC403_page.htm
  2. Guharaj, P. V. (2003). "Cooling of the body (algor mortis)". Forensic Medicine (2nd ed.). Hyderabad: Longman Orient. pp. 61–62.
  3. http://www.crimewatchcanada.com/index.php?option=com_content&view=article&id=79:changes-to-a-body-after-death&catid=41:january-february-2010-issue-76&Itemid=53
  4. Kaliszan, M. (20 May 2005). "Verification of the exponential model of body temperature decrease after death in pigs". Experimental Physiology. 90 (5): 727–738. doi:10.1113/expphysiol.2005.030551.
  • Saferstein, Richard (2004). Criminalistics An Introduction to Forensic Science (8th ed.). Pearson Prentice Hall. ISBN 0-13-113706-9.
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  • Robert G. Mayer, "Embalming: history, theory, and practice", McGraw-Hill Professional, 2005, ISBN 0-07-143950-1, p. 106
  • Calixto Machado, "Brain death: a reappraisal", Springer, 2007, ISBN 0-387-38975-X, pp. 73–74