मूल अधिकार

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वे अधिकार जो लोगों के जीवन के लिये अति-आवश्यक या मौलिक समझे जाते हैं उन्हें मूल अधिकार (fundamental rights) कहा जाता है। प्रत्येक देश के लिखित अथवा अलिखित संविधान में नागरिक के मूल अधिकार को मान्यता दी गई है। ये मूल अधिकार नागरिक को निश्चात्मक (positive) रूप में प्राप्त हैं तथा राज्य की सार्वभौम सत्ता पर अंकुश लगाने के कारण नागरिक की दृष्टि से ऐसे अधिकार विषर्ययात्मक (negative) कहे जाते हैं। मूल अधिकार का एक दृष्टांत है "राज्य नागरिकों के बीच परस्पर विभेद नहीं करेगा"। प्रत्येक देश के संविधान में इसकी मान्यता है।

मूल अधिकारों का सर्वप्रथम विकास ब्रिटेन में हुआ जब १२१५ में सम्राट जॉन को ब्रिटिश जनता ने प्राचीन स्वतंत्रताओं को मान्यता प्रदान करेने हेतु "मैग्ना कार्टा" पर हस्ताक्षर करने को बाध्य कर दिया था। इसे भारत के संविधान का मैग्नार्टा भी कहते हैं। भारत के मूल अधिकार अमेरिका से लिए गए है।

६ मौलिक अधिकार[संपादित करें]

भूमिका (Introduction)[संपादित करें]

भारत का संविधान नागरिकों को विस्तृत मौलिक अधिकार प्रदान करता है। अधिकारों का वर्णन संविधान के भाग-3 में किया गया है । यह अधिकार न केवल नागरिकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं बल्कि उनके कल्याण तथा सम्मान की भी रक्षा करते हैं । इन अधिकारों को न्यायिक संरक्षण प्राप्त तथा उन्हें न्यायालय के माध्यम से लागू भी किया जा सकता है। सरकार द्वारा इन अधिकारों में परिवर्तन केवल संविधान में संशोधन द्वारा ही किया जा सकता है। सरकार को इन अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाने का अधिकार है परंतु यह निश्चित करने का अधिकार न्यायपालिका के पास है कि यह प्रतिबंध उचित है अथवा नहीं।

मौलिक अधिकारों की आवश्यकता तथा उनका महत्व (Need and Importance of Fundamental Rights)[संपादित करें]

मौलिक अधिकार सरकार के हस्तक्षेप से नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं तथा कार्यपालिका व विधायिका पर अंकुश लगाते हैं। मौलिक अधिकारों को संविधान में जोडे जाने का मुख्य उद्देश्य देश में कानून का शासन लागू करना है। मौलिक  अधिकारो के महत्व की व्याख्या करते हुए न्यायाधीश भगवती ने मेनका गांधी बनाम भारतीय संघ के मामले में कहा था "यह मौलिक अधिकार उन मौलिक मूल्यों को प्रतिविम्बित करते हैं जो वैदिक काल से चले आ रहे हैं तथा जिसका पालन जनता करती आ रही है। उनका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के सम्मान की रक्षा करना तथा ऐसी परिस्थितियां प्रदान करना है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास कर सका"

मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण

लेख (Writs)

मौलिक अधिकारों का निलंबन

विशिष्ट लक्षण (Special Features)


मूल संविधान में सात मौलिक अधिकार थे परन्तु वर्तमान में छः ही मौलिक अधिकार हैं| मौलिक अधिकार निम्नलिखित हैं[तथ्य वांछित]:

  • समानता का अधिकार article 14-18
  • स्वतंत्रता का अधिकार article 19-22
  • सम्पत्ति रखने का अधिकार(अब समाप्त हो गया)
  • शोषण के विरूद्ध अधिकार article 23-24
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार article 25-28
  • शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार article 29-30
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार article 32

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]