मुहम्मद याक़ूब नानौतवी
मुहम्मद याक़ूब नानौतवी | |
|---|---|
| दारुल उलूम देवबंद के पहले प्रधानाचार्य और शेख़ुल हदीस | |
| कार्यकाल 1866–1883 | |
| पूर्वाधिकारी | पद की स्थापना |
| उत्तराधिकारी | सैयद अहमद देहलवी |
| व्यक्तिगत जानकारी | |
| जन्म | 1 जुलाई 1833 या 2 जुलाई 1833 |
| मृत्यु | 1884 (आयु ५०–५१) |
| माता-पिता |
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| रिश्तेदार | खलील अहमद सहारनपुरी (भतीजा) |
| व्यवसाय | इस्लामी विद्वान |
| सैन्य सेवा | |
सेवाकाल | 1857 |
| युद्ध | १८५७ का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम |
| धार्मिक जीवन | |
| धर्म | इस्लाम |
| संप्रदाय | सुन्नी |
| न्यायशास्त्र | हनफ़ी |
| पंथ | मातुरीदी |
मुहम्मद याक़ूब नानौतवी (1833–1884) एक भारतीय इस्लामी विद्वान थे। वे दारुल उलूम देवबंद के पहले प्रधानाचार्य थे।[1][2]
जीवन परिचय
[संपादित करें]मुहम्मद याक़ूब का जन्म सन् 1833 में ब्रिटिश भारत के सहारनपुर ज़िले के नानौता क़स्बे में हुआ।[3][4] उनके पिता ममलूक अली नानौतवी उस समय के बड़े इस्लामी विद्वानों में से एक थे और मदरसा ग़ाज़ीउद्दीन ख़ान में प्राच्य अध्ययन (ओरिएंटल स्टडीज़) के प्रमुख थे।[4] मुहम्मद याक़ूब ने अधिकतर इस्लामी विद्याएँ अपने पिता से और शाह अब्दुल ग़नी मुजद्दिदी से पढ़ीं।[4] उनके अन्य उस्तादों में अहमद अली सहारनपुरी भी शामिल हैं।[4] उन्होंने हाजी इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की से तसव्वुफ़ (आध्यात्मिकता) की शिक्षा ली और उनसे चिश्ती, नक़्शबंदी, क़ादरी और सुहरवर्दी सिलसिलों में ख़िलाफ़त (आध्यात्मिक अनुमति) प्राप्त की।[4]
सन् 1852 में मुहम्मद याक़ूब को गवर्नमेंट कॉलेज अजमेर में अध्यापक नियुक्त किया गया। कॉलेज के प्रधानाचार्य की सिफ़ारिश पर उन्हें डिप्टी कलेक्टर का पद पेश किया गया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।[4] बाद में उनका तबादला बनारस कर दिया गया और फिर उन्हें सहारनपुर में डिप्टी इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया।[4]
सन् 1866 में मुहम्मद याक़ूब को दारुल उलूम देवबंद का प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया।[4][1] मुहम्मद मियाँ देवबंदी लिखते हैं कि दिन-प्रतिदिन विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर अच्छे शिक्षकों की आवश्यकता महसूस हुई और इसी कारण मौलाना मुहम्मद याक़ूब को प्रधानाचार्य बनाकर बुलाया गया।[5] उनके शिष्यों में दूसरी पीढ़ी के अधिकांश इस्लामी विद्वान शामिल हैं, जिनमें महमूद हसन देवबंदी, अज़ीज़ुर्रहमान उस्मानी, सैय्यद मुमताज़ अली, हाफ़िज़ मुहम्मद अहमद, खलील अहमद सहारनपुरी और अशरफ़ अली थानवी प्रमुख हैं।[3][4] उन्होंने क़ासिम नानौतवी की जीवनी "सवानेह उम्री हज़रत मौलाना क़ासिम नानौतवी" लिखी, जिसका अरबी अनुवाद "अल-इमाम मुहम्मद क़ासिम अन-नानौतवी कमा रआइतुहू" के नाम से हुआ।[6]
सन् 1884 में हैज़ा (कोलेरा) से 51 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया और उन्हें उनके पैतृक क़स्बे नानौता में दफ़नाया गया।[4]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 Tayyab, Muhammad (1990). The Role of Shaikh-Ul-Hind Maulana Mahmud-Ul-Hasan in the Indian Freedom Movement (एम.फिल.). Aligarh Muslim University. p. 20.
- ↑ "चंदे पर चलने वाला विश्व का पहला मदरसा है दारुल उलूम". अमर उजाला. 26 नवम्बर 2023. अभिगमन तिथि: 13 अगस्त 2026.
- 1 2 आसिर अदरवी. तज़्किरा मशाहीर-ए-हिन्द: कारवान-ए-रफ़्ता (उर्दू में) (2 अप्रैल 2016 संस्करण). देवबंद: दारुल मुअल्लिफ़ीन. पृ. 269.
- 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 प्रोफ़ेसर नूरुल हसन शेरकोटी. "हज़रत मौलाना मुहम्मद याक़ूब नानौतवी". इन: देवबंदी, नवाज़ (सं.). सवानेह उलमा-ए-देवबंद (उर्दू में) (जनवरी 2000 संस्करण). देवबंद: नवाज़ पब्लिकेशन्स. पृ. 90–214.
- ↑ मुहम्मद मियाँ देवबंदी. "उलमा-ए-हक़ और उनके मजाहिद". पृ. 75.
- ↑ आरिफ़ जमील मुबारकपुरी (अनुवादक). "अल-इमाम मुहम्मद क़ासिम अन-नानौतवी कमा रआइतुहू".