मुर्शिद कुली खां

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मुर्शिद क़ुली खाँ
मुतमान उल-मुल्क, अलाउद-दौला, नवाब जाफ़र खाँ बहादुर नासिरी, नासिर जंग, बंगाल और ओडीशा के नवाब नाज़िम
शासन १७१७-१७२७
राज तिलक १७१७ से नवाब की पदवी
पूरा नाम मुर्शिद क़ुली खाँ (मुहम्मद हादी / मिर्ज़ा हादी)
पूर्वाधिकारी मुग़ल साम्राज्य
उत्तराधिकारी सरफ़राज ख़ान / शुजा-उद-दीन मुहम्मद ख़ान
भार्या नासिरी बानो बेगम साहिबा
संतान नवाबज़ादा याहया खाँ (पुत्र)
अज़मतुन्निसा बेगम साहिबा (ज़ीनतुन्निसा) (पुत्री)
ज़ैनबुन्निसा बेगम साहिबा (पुत्री)
राजवंश नासिरी
पिता हाजी शफी इस्फहनी (प्रतिपालक)
धर्म इस्लाम

मुर्शिद कुली खां 1717 में मुगल शासक फरुख्शियर द्वारा बंगाल का सूबेदार बनाया गया। यह मुग़ल सम्राट द्वारा नियुक्त अंतिम सूबेदार था, इसी के साथ बंगाल में वंशानुगत सूबेदारी शासन की शुरुवात हुयी। यद्यपि वह १७00 से ही उसका वास्तविक शासक बन गया था। दीवान (ओरंगजेब नेे इसे बनाया था)से मुक्त किया फिर भी बादशाह को नजराने के रूप में बड़ी रकम अदा करता रहा।[1]इसने खुद को मुग़ल शासन से अलग कर लिया और बंगाल पर अपना अधिकार कर लिया फिर बाद में मूूूरसईद कुुुली खान ने अपनी राजधनी ढाका से मुर्श्शी्ददआबाद कर लिया।जड़

शासन व्यवस्था[संपादित करें]

  • उसके शासन काल में तीन विद्रोह हुए। पहला विद्रोह सीताराम राय, उदय नारायण और गुलाम मुहम्मद ने दूसरा शुजात खां ने तथा तीसरा नजात खां ने किया।
  • इसने विद्रोह शांत करते हुए इनकी ज़मींदारी रमजीवन नामक व्यक्ति को दे दी ।
  • मुर्शीद कली खान ने खलाशा तथा तक़ाबि ऋण {शर्त आधारित ऋण } लोगों को प्रदान किया ।
  • उसने नए भूराजस्व के जरिए जागिर भूमि के बड़े भाग को खालसा भूमि बना दिया और इजारा व्यवस्था आरंभ की।
  • इसकी म्रत्यु १६२७ में हो गयी ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. विपिन चंद्र- आधुनिक भारत का इतिहास, ओरियंट ब्लैक स्वॉन प्राइवेट लिमिटेड, २00९, पृ-४, ISBN: 978 81 250 3681 4