मुर्शिद कुली खां

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

मुर्शिद कुली खां 1717 में मुगल शासक फरुख्शियर द्वारा बंगाल का सूबेदार बनाया गया। यह मुग़ल सम्राट द्वारा नियुक्त अंतिम सूबेदार था, इसी के साथ बंगाल में वंशानुगत सूबेदारी शासन की शुरुवात हुयी। यद्यपि वह १७00 से ही उसका वास्तविक शासक खुद को मुग़ल शासन से अलग कर लिया और बंगाल पर अपना अधिकार कर लिया फिर बाद में मूूूरसईद कुुुली खान ने अपनी राजधनी ढाका से मुर्श्शी्ददआबाद कर लिया। यह सर्वविदित है कि मुर्शिद कुली खां के द्वारा 1707 ईसवी में स्वायत्त बंगाल की स्थापना की थी 1719 इसवी में मुर्शिद कुली खां को फर्रूखसियर के द्वारा उड़ीसा का क्षेत्र दे दिया गया था प्रारंभ मुर्शिद कुली खां दक्षिण भारत का ब्राह्मण था जिसका वास्तविक नाम रामरतन था औरंगजेब के समय काजी अब्दुल वासी के द्वारा मुसलमान बनाया गया औरंगजेब ने अपने जीवन काल में मुर्शिद कुली खां को बंगाल का नवाब बनाया जैसे ही 3 मार्च 1707को औरंगजेब की मृत्यु हुई मुर्शीद कुली खान ने कर देना बंद कर दिया 1719 इसमें में फर्रूखसियर के द्वारा उसे उड़ीसा का क्षेत्र भी दे दिया गया मुर्शीद कुली खान ने राज की संपूर्ण भूमि खालसा भूमि अर्थात राजकीय भूमि में परिवर्तित कर दिया मुर्शीद कुली खान ने भूमि पर जरदारी व्यवस्था या भूमि को ठेके पर देने की व्यवस्था प्रारंभ की इस ने किसानों को अग्रिम राशि तकावी ऋण देना प्रारंभ किया किसके शासनकाल में सामंतो के तीन विद्रोह हुए

शासन व्यवस्था[संपादित करें]

  • उसके शासन काल में तीन विद्रोह हुए। पहला विद्रोह सीताराम राय, उदय नारायण और गुलाम मुहम्मद ने दूसरा शुजात खां ने तथा तीसरा नजात खां ने किया।
  • इसने विद्रोह शांत करते हुए इनकी ज़मींदारी रमजीवन नामक व्यक्ति को दे दी ।
  • मुर्शीद कली खान ने खलाशा तथा तक़ाबि ऋण {शर्त आधारित ऋण } लोगों को प्रदान किया ।
  • उसने नए भूराजस्व के जरिए जागिर भूमि के बड़े भाग को खालसा भूमि बना दिया और इजारा व्यवस्था आरंभ की।
  • इसकी म्रत्यु १६२७ में हो गयी ।

सन्दर्भ[संपादित करें]