मुराव
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मुराव उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में पाए जाने वाले कृषकों का एक समुदाय है। उन्हें मौर्य के नाम से भी जाना जाता है।[1] ये कुशवाहा नामक एक व्यापक समुदाय का हिस्सा हैं जो बिहार में कोइरी कहलाते हैं। अखिल भारतीय कुशवाहा क्षत्रिय महासभा इन उपजातियों का एक संगठन है, जो मुराव समुदाय के हितों का प्रतिनिधित्व भी करता है।[2]
वर्तमान परिस्थितियाँ
[संपादित करें]भारत के संवैधानिक कैटेगरी व्यवस्था के तहत , 1991 में इस समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया गया है।[3] "के चेट्टी" के अनुसार "मुराव" पारंपरिक रूप से ज़मींदार थे।[4] मुराव समुदाय ने 1928 में क्षत्रिय वर्ण में पहचान पत्र हेतु लिखित याचिका भी दायर की थी।[5]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ विज, शिवम. "Caste groups are burning Rajnath Singh's effigies as he called Chandragupta Maurya shepherd". द प्रिंट. 28 अप्रैल 2021 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 27 मई 2020.
- ↑ Christophe Jaffrelot (2003). India's Silent Revolution: The Rise of the Lower Castes in North India. यूनाइटेड किंगडम: हर्स्ट. p. 199. ISBN 9781850653981. 2022-09-30 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2022-09-30.
- ↑ Agrawal, S. P.; Aggarwal, J. C. (1991). Educational and Social Uplift of Backward Classes: At what Cost and How. Concept Publishing. ISBN 9788170223399. 7 मार्च 2014 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2014-03-07.
- ↑ K. Chetty. "Caste and Religions of Natal Immigrants". Gandhi-Luthuli Documentation Centre. मूल से से 15 सितंबर 2019 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2007-11-19.
- ↑ Jaffrelot, Christophe (2003). India's silent revolution: the rise of the lower castes in North India (Reprinted ed.). C. Hurst & Co. p. 197. ISBN 978-1-85065-670-8. 27 मार्च 2017 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2012-02-06.