मुझे पहचानो
मुझे पहचानो हिन्दी के विख्यात साहित्यकार संजीव द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2023 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।[1]
सती प्रथा और नारी उत्पीड़न पर केंद्रित इस उपन्यास में काल्पनिक कहानी के माध्यम से समाज के धार्मिक, सांस्कृतिक पाखंड और पुरुषसत्ता की परतें उधेड़ी गई हैं। समाज में सती प्रथा की समस्या प्राचीन काल से चली आ रही हैं। इस अमानवीय परंपरा के पीछे मूल कारक सांस्कृतिक गौरव है।
कथानक
[संपादित करें]यह उपन्यास सती प्रथा का अंत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले समाज सुधारक और भारतीय पुनर्जागरण के जनक राजा राममोहन राय की भाभी पर सती प्रथा को लेकर हुए अत्याचार के संदर्भ में लिखा गया है। उनके भाई जगमोहन की मृत्यु के बाद उनकी भाभी को जबरदस्ती सती किया गया। जब उन्हें जबरन चिता पर जिंदा जलाया जा रहा था, तभी बारिश होने के कारण वह अधजली रह गई। अगले दिन इस पर समाज ने विचार-विमर्श किया और उन्हें फिर से सती किया गया।[2]
उपन्यासकार संजीव ने सती प्रथा की पड़ताल करते हुए यह उपन्यास लिखा है। मुझे पहचानो परम्परा और संस्कृति को एक नई रोशनी में देखने वाला उपन्यास है। इसकी कथा एक ऐसी रियासत से शुरू होती है जिसके लिए सती जैसी नृशंस प्रथा सांस्कृतिक गौरव की हैसियत रखती है।[3]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "मुझे पहचानो के लिए संजीव को साहित्य अकादेमी पुरस्कार".
{{cite web}}: CS1 maint: url-status (link) - ↑ "मुझे पहचानोः आधुनिक काल में स्त्री जीवन की व्यथा बयां करता उपन्यास". फ़ेमिनिज़म इन इंडिया. 18 दिसंबर 2024.
- ↑ "मुझे पहचानो". राजकलम प्रकाशन समूह.
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