मुकने राजवंश

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मुकने राजवंश 'जिसे मुकणे राजवंश भी लिखा जाता है' की स्थापना कोलीयों के मुखिया जयवा मुकने ने १४वी शताब्दी मे की थी एवं जव्हार रियासत पर शासन स्थापित किया था। मुकने राजवंश का नाम मुकने नामक गांव से लिया गया गया जहां के मुखिया जयवा थे। मुकने राजवंश ने जव्हार रियासत पर ६०० वर्ष से अधिक समय तक राज किया था एवं १९४७ मे जव्हार रियासत के महाराजा यशवंतराव मुकने ने जव्हार रियासत को भारत मे सम्मीलीत कर दिया था।[1][2][3]

जव्हार रियासत के महाराजा मुकने
पूर्व राजशाही
राजवंश-चिह्न
जव्हार रियासत के अंतिम कोली शासक महाराजा यशवंतरावजी मार्तंडरावजी मुकने
प्रथम राजा जयवा मुकने
अंतिम राजा महाराजा यशवंतराव मुकने
प्रकार हिज हाइनेस महाराजा
आधिकारिक निवास जय विलास महल, जव्हार रियासत
राजशाही की शुरुआत १३०६
राजशाही का अंत १९४८
वर्तमान दावेदार महाराजा महेंद्रसिंहरावजी दिग्विजयसिंहरावजी मुकने

इतिहास[संपादित करें]

महाराजा यशवंतराव मुकने

मुकने राजवंश के पृथम शासक जयवा मुकने ने महालक्ष्मी मंदिर, डहाणू का निर्माण किया था।[4][5]

उसके बड़े बेटे नेमशाह मुकने ने २२ किले जीतकर रियासत के क्षेत्रफल को बढ़या और ५ जून १३४३ को दिल्ली सल्तनत के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने नेमशाह को शाह की उपाधि से सम्मानित किया और राजा स्वीकार किया।[6] नेमशाह के पौत्र देववरराव मुकने ने बहमनी सल्तनत के सुल्तान मुहम्मद शाह से विदार किले पर युद्ध किया । युद्ध के दौरान ही वह सल्तनत की राजकुमारी से प्रेम कर बेठे और उनसे विवाह करके जव्हार वापस आ गए।[6]

सामग्री[संपादित करें]

महाराजा मार्तंडराव मुकने
महाराजा मार्तंडराव मुकने
महाराजा यशवंतराव मुकने (दाएं) दिग्विजयसिंहराव मुकने (बाएं) और राजकुमार महेंद्रसिंहराव
महाराजा यशवंतराव मुकने बाल अवस्था


महाराजा यशवंतराव मुकने जवानी में
महाराजा यशवंतराव मुकने वृद्ध अवस्था
जव्हार रियासत (मुकने राजवंश) की मुद्रा
चित्र:महाराजा यशवंतराव मुकने की प्रतिमा जव्हार रियासत.jpg
महाराजा यशवंतराव मुकने की प्रतिमा


यशवंतराव मुकने प्रतिमा
राजा गणपतराव मलहारराव मुकने

शासकों की सुची[संपादित करें]

जव्हार रियासत के शासकों की सुची।[7][8]

  • भीमराव मुकने
  • कृष्णाराव मुकने
  • नेमशाह मुकने द्वितिय
  • पतंगशाह मुकने
  • मालोजीराव मुकने
  • गंगाधरराव मुकने
  • विक्रमशाह मुकने तिसरे
  • हनुमंतराव मुकने
  • माधवराव मुकने
  • पतंगशाह मुकने चौथे

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Trove of tribal treasures". Deccan Herald (अंग्रेज़ी में). 2019-06-15. मूल से 4 अगस्त 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-04-27.
  2. Nairne, Alexander Kyd (1988). History of the Konkan (अंग्रेज़ी में). Asian Educational Services. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-206-0275-5.
  3. Elison, William (2018). The Neighborhood of Gods: The Sacred and the Visible at the Margins of Mumbai (अंग्रेज़ी में). University of Chicago Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-226-49490-6.
  4. "महालक्ष्मी के इस मंदिर में चढ़ती है पहली फसल रहस्य जानकर चौंक जाएंगे आप - mobile". punjabkesari. 2018-12-21. अभिगमन तिथि 2020-04-27.
  5. Tribhuwan, Robin D. (2003). Fairs and Festivals of Indian Tribes (अंग्रेज़ी में). Discovery Publishing House. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7141-640-0.
  6. "Imperial Gazetteer2 of India, Volume 14, page 87 -- Imperial Gazetteer of India -- Digital South Asia Library". dsal.uchicago.edu. मूल से 4 मार्च 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-04-27.
  7. "Indian states before 1947 A-J". rulers.org. मूल से 15 जुलाई 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-04-27.
  8. "Indian Princely States before 1947 A-J". www.worldstatesmen.org. मूल से 5 जनवरी 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-04-27.