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मिलजुल मन

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मिलजुल मन  
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मिलजुल मन
लेखक मृदुला गर्ग
देश भारत
भाषा हिन्दी
विषय साहित्य

मिलजुल मन मृदुला गर्ग द्वारा रचित एक आत्मकथ्यात्मक (या अर्ध-आत्मकथ्यात्मक) शैली का उपन्‍यास है, जिसमें अतीत और वर्तमान के बीच संबंधों, परिवार, संबंधों की जटिलताओं और सीमाओं को बारीकी से पिरोया गया है। सन् 2013 में इस उपन्यास को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।[1]

कथा वस्तु

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मिलजुल मन उपन्यास की कहानी मूलतः मृदुला जी की बड़ी बहन जो इस उपन्यास में गुलमोहर की भूमिका में है, उन पर आधारित है । उनके पिता बैजनाथ जैन एक स्वतंत्रता आंदोलन के फौजी हैं तथा वे छोटे लाला के यहाँ काम करते हैं । माता कनकलता बड़ी ही साहित्य प्रेमी स्त्री हैं तथा उनमें दुनियादारी की समझ का अभाव है। अपने बच्चों का लालन-पालन उनके पिता ही माता तथा पिता दोनों की भूमिकाओं में करते हैं [2]। इसलिए गुलमोहर मोगरा से अपने पिता के विषय में कहती है –

“बेवकूफ! पिताजी की तरह सब मर्द जन्मजात बाप नहीं होते कि औलाद के साथ नाज़नीन बीवी को भी बच्चे की तरह पालें । मिलजुल मन – मृदुला गर्ग

छोटे लाला की मृत्यु के पश्चात् उनके परिवार को आर्थिक तंगी के दौर से गुजरना पड़ता है जिससे कनकलता तथा मोगरा दोनों ही अनजान हैं, किन्तु अपनी गृहस्थी की समझ की परिपक्वता के कारण गुलमोहर इसे भांप जाती है तथा यथासंभव स्थिति को संभालने का प्रयास करती है । गुलमोहर को पढ़ने लिखने में विशेश रूचि नहीं है, किन्तु मोगरा डॉक्टर बनने की इच्छा रखती है ।

विषय एवं कथानक का रूप-रेखा

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“मिलजुल मन”

उपन्यास की मुख्य पात्र गुलमोहर (गुल) और उसकी बहन मोगरा हैं।

उनके पिता बैजनाथ जैन का व्यक्तित्व, उनके पारिवारिक परिवेश, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तनों की चुनौतियाँ आदि कथानक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सन्दर्भ

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  1. "अकादमी पुरस्कार". साहित्य अकादमी. मूल से से 15 सितंबर 2016 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 11 सितंबर 2016.
  2. https://sahityasrijan.com/%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A4%A8-mridula-garg/