माहिष्मती

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माहिष्मती (अंग्रेजी; Mahishmati) प्राचीन भारत की एक नगरी थी जिसका उल्लेख महाभारत तथा दीर्घनिकाय सहित अनेक ग्रन्थों में हुआ है। अवन्ति महाजनपद के दक्षिणी भाग में यह सबसे महत्वपूर्ण नगरी थी। बाद में यह अनूप महाजनपद की राजधानी भी रही। यह नगरी वर्तमान समय के मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर स्थित थी किन्तु इसकी सही-सही स्थिति का पता नहीं चल सका है।

पहचान[संपादित करें]

इस मानचित्र में माहिष्मति नगर के संभावित स्थलों को दर्शाया गया है

भारतीय प्राचीन साहित्य में माहिष्मति नगर के बारे में कई सन्दर्भ दिये गये हैं, लेकिन इसकी सही स्थिति ज्ञात नहीं है। माहिष्मती नगर के बारे में कुछ धारणाएं निम्नलिखित हैं।

  • यह नर्मदा के तट पर स्थित थी।[1]
  • यह उज्जयनी नगर के दक्षिण और प्रतिष्ठान नगर के उत्तर में थी, यह इन दोनों नगरों के मध्य स्थित थी। महर्षि पतञ्जलि ने उल्लेख किया है कि जो यात्री उज्जयनी से यात्रा प्रारंभ करता था तो माहिष्मती नगर में सूर्योदय होता था।[2]
  • यह अवन्ति साम्राज्य में स्थित था। यह कई बार इस साम्राज्य से अलग भी दर्शाया गया है। यह अनूप महाजनपद की राजधानी भी रही।[2]
  • अवन्ति विन्ध्य पर्वत के द्वारा दो भागों में विभाजित थी। उज्जयनी उत्तरी भाग तथा माहिष्मती दक्षिणी भाग में स्थित था।[3]

लोकप्रिय संस्कृति[संपादित करें]

2015 व 2017 में आयी फ़िल्में बाहुबली: द बिगनिंग तथा बाहुबली 2: द कॉन्क्लूज़न में इस नगर की ही कहानी दर्शाई गयी है।[4]

गाथा ईसा पूर्व 230 ईस्वी में प्रारंभ होती है. सम्राट अशोक की मृत्यु के बाद सातवाहन वंश के महाराज सिमूक ने मगध संधि को अमान्य करते हुए ईपू 230 में सातवाहन ब्राह्मण वंश शुरू किया. उस समय नर्मदा क्षेत्र को ‘अनूपा’ के नाम से जाना जाता था. उस वास्तविक बाहुबली का नाम गौतमी पुत्र शतकर्णी था. जैसा कि फिल्म में दर्शाया गया है कि नारी इस राजवंश में बहुत शक्तिशाली होती थी, वैसे ही सातवाहन राजवंश एक मातृसत्तात्मक राजवंश था. इसमें नारी पुरुष से कहीं अधिक शक्तिशाली हुआ करती थी. 

आज यदि गौतमी पुत्र शतकर्णी का नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने आ गया है तो इसका श्रेय बाहुबली फिल्म के निर्देशक एस.राजामौली को जाता है. हम ये नहीं कहते कि बाहुबली की कथा अक्षरश सत्य है लेकिन उस कथा में आप सातवाहन राजवंश के बारे में, उनकी परंपराओं और प्रथाओं के बारे में जान सकते हैं. सबसे बढ़कर अमरेंद्र बाहुबली का चरित्र हूबहू गौतमी पुत्र शतकर्णी के प्रभावशाली चरित्र से मेल खाता है. गौतमी पुत्र शतकर्णी ने लगभग 25 साल तक एकछत्र राज्य किया. उस दौर में पूरा मध्यभारत उसके अधीन हुआ करता था. 

आगे इस कहानी के किरदारों के बारे में विस्तार से बताया जाएगा और आज मौजूद सातवाहन वंश के अवशेषों की बात भी करेंगे. आगे वाली कड़ियों में ये भी बताया जाएगा कि क्यों हमारे इतिहासकारों ने गौतमी पुत्र की प्रतिष्ठा धूमिल करने की चेष्टा की. सातवाहन वंश की सबसे प्रभावशाली माँ गौतमी बालाश्री की बात भी की जाएगी. बालाश्री के चरित्र की एक झलक आपने बाहुबली की शिवगामी में देख ही ली होगी. 

फोटो में दिखाए दे रहे नंदी गौतमी पुत्र के बनाए एक शिव मंदिर में विराजमान है. इनकी बनावट देखकर ही आप समझ जाएंगे कि माहिष्मती साम्राज्य कितना ऐश्वर्यशाली और कला सरंक्षक रहा होगा. ये पहला प्रमाण है जो बताता है कि माहिष्मती कोई काल्पनिक जगह नहीं है.

ये पहली सदी  की बात है. प्राचीन भारत के  महान शक्तिशाली मौर्य साम्राज्य की शक्ति अब क्षीण पड़ने लगी थी. 185 ईसा पूर्व में इस वंश के अंतिम शासक  बृहद्रथ मौर्य की उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने हत्या कर डाली.

शक्तिशाली मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद कण्ववंश ने सत्ता संभाली लेकिन सैन्य रूप से कमजोर कण्ववंश ज्यादा टिक नहीं पाया. राजा श्रीमुख  ने इसके बाद महान सातवाहन साम्राज्य की नींव रखी. ये समय लगभग 60 ईसा पूर्व का माना जाता है. इसके बाद सातवाहनों ने लगभग 250 साल तक शासन किया.

हालांकि सातवाहन वंश के प्रथम राजा श्रीमुख के बाद उसके पुत्र कान्हा के शासनकाल में सातवाहन साम्राज्य फिर कमज़ोर होने लगा था. इसके बाद गाथा में उस वीर प्रतापी योद्धा का आगमन होता है, जिसने एक के बाद एक युद्ध जीतते हुए भारत को एक सूत्र में बांधने में सफलता प्राप्त की.

कान्हा के पुत्र गौतमीपुत्र शतकर्णी के शासनकाल (106-130 ई.) में ही ‘माहिष्मती (आज का महेश्वर) की स्थापना हुई. उस समय नर्मदा प्रदेश को ‘अनूप’ कहा जाता था. गौतमी पुत्र ने ये क्षेत्र युद्ध में शकों से जीता था.

एक सवाल मन में आता है कि महाराणा प्रताप, शिवाजी, पृथ्वीराज चौहान जैसे वीर योद्धाओं में गौतमीपुत्र का नाम शामिल क्यों नहीं है. क्यों वे बाकी नायकों की तरह कोर्स की किताबों में बच्चों को नहीं पढ़ाए जा रहे हैं.

आपको भी हैरानी हुई होगी कि आठ प्रदेशों पर राज करने वाले योद्धा को वर्तमान पीढ़ी याद क्यों नहीं करती. क्यों कुछ इतिहासकारों ने गौतमी पुत्र की प्रतिष्ठा पर लांछन लगाने का काम किया. क्यों उसकी महान गाथा के बारे में आप कुछ नहीं जानते. जिसके घोड़े तीन समुद्रों का पानी पीते थे, ऐसे योद्धा को क्यों भूला दिया गया है.

ये कैसे सम्भव है कि देश का वामपंथी धड़ा एक काल्पनिक कथा को दिखाए जाने पर इतना शोर मचाए. बात जैसी नज़र आ रही है, वैसी नहीं है. जिन लोगों ने हमारे समृद्ध इतिहास को षड्यंत्रपूर्वक बदला है, वे दरअसल इस बात से भयभीत है कि बाहुबली फिल्म के जरिये प्राचीन भारत के एक विलक्षण नायक का सत्य  जान ले.

वे इस बात से भयभीत हैं कि कहीं गौतमी शतकर्णी का नाम उछलते ही इतिहास की किताबे फिर न खोदी जाने लगे. वे इस बात से भयभीत हैं कि कहीं लोग ये न जान जाए कि उनके एक महाप्रतापी पूर्वज को हमने किताबों में एक हत्यारा भी लिख दिया है.

इसे लेख समझने की भूल न करें. ये एक अभियान है, जिसमें दक्षिणपंथी और उन लोगों की मदद की दरकार है, जो हमारे इतिहास पर पड़ी झूठ की परते उठाना चाहते हैं. वो शासक जिसने देश में दक्षिणपंथ को मजबूत किया. समाज को बेहतर जीवन देने के लिए कई सामाजिक कार्य किये. कुओं, नदियों और तालाबों के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित किया. आगे हम जानेंगे कि गौतमीपुत्र शतकर्णी उर्फ़ अमरेंद्र बाहुबली की चारित्रिक विशेषताएं क्या-क्या थी. आखिर उसमें ऐसी क्या बात थी कि प्रजा में वह बहुत लोकप्रिय था. उसकी सेना कैसी थी.

चित्र में जो चबूतरा दिखाई दे रहा है, ठीक इसके पीछे माहिष्मती के अवशेष आज भी काँटों के जंगल में दबे पड़े हैं. इस चबूतरे के बारे में कहा जाता है कि यहाँ महेश्वर के तत्कालीन राजा मंडन मिश्र और आदि शंकराचार्य के बीच शास्त्रार्थ हुआ था. सम्भव है ये चबूतरा प्राचीन माहिष्मती के वैभव को वर्षों तक निहारा करता होगा.

जारी रहेगा…..

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. जेम्स जी॰ लोक्ट्हेफेल्ड (2002). The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: A-M. द रोसेन पब्लिकेशन समूह. प॰ 410. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-8239-3179-8. https://books.google.com/books?id=5kl0DYIjUPgC&pg=PA410. 
  2. वी० एस० कृष्णन; पी० एन० श्रीवास्तव; राजेन्द्र वर्मा (1994). Madhya Pradesh District Gazetteers: Shajapur. सरकारी प्रेस, मध्य प्रदेश. प॰ 12. https://books.google.com/books?id=YiALAQAAIAAJ. 
  3. हरिहर पांडा (2007). Professor H.C. Raychaudhuri, as a Historian. नॉर्दन बुक सेण्टर. प॰ 23. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7211-210-3. https://books.google.com/books?id=f1XMtc2Q97IC&pg=PA23. 
  4. "Baahubali is set in Mahishmathi kingdom". http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/Baahubali-is-set-in-Mahishmathi-kingdom/articleshow/46849092.cms.