मालती बाई लोधी

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मालती बाई लोधी[1][2] बुंदेलखंडी वीरांगना झाँसी की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की बाल सहेली और उनकी अंगरक्षिका थी। सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम मैं कई बार इस वीर युवती ने झाँसी की रानी की मौत से बचाया था। वह रानी की बड़ी स्नेहमयी और विश्वास पात्र थी। जून 1857 के युद्ध मैं जब रानी आहात हुईं, उनका घोडा समरांगण से विखुल हो गया तब अंगरक्षिका के नाते मालती बाई लोधी ने साथ दिया कि वाँलर कि एक गोली उनकी पीठ पर लगी और वह वीरांगना स्वतंत्रता कि बलिवेदी पर अपनी स्वामिनी झाँसी की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई से पहले शहीद हो गयी। इस युद्ध में अमर सेनानी सुखराज सिंह लोधी भी झाँसी दुर्ग पर रानी से पहले लड़ते-लड़ते शहीद हो गया था।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. १८५७ कि क्रांति https://www.scribd.com/doc/22804289/1857-ki-kranti १८५७ कि क्रांति
  2. 'क्रांति पथ' पृष्ठ १८१ व १८९
  3. लोधी क्षत्रिय वृहत इतिहास पृष्ठ 94