सामग्री पर जाएँ

मार्ल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
मार्ल
अवसादी शैल चट्टान
मार्ल शैल का एक दृश्य
मार्ल शैल का एक नमूना
बनावट
कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3), मृत्तिका (क्ले) और गाद (सिल्ट)

मार्ल या मार्लस्टोन एक कार्बोनेट-समृद्ध अवसादी मिट्टी या मडस्टोन है, जिसमें मृत्तिका और गाद की अलग-अलग मात्राएँ घुली होती हैं।[1] जब यह कठोर होकर शैल का रूप ले लेता है, तो इसे 'मार्लस्टोन' कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से, इस शब्द का प्रयोग विभिन्न प्रकार के पदार्थों के लिए किया जाता था, जो मुख्य रूप से मृत्तिका और कैल्शियम कार्बोनेट के मिश्रण से बनी भुरभुरी व मिट्टी जैसी संरचनाएँ थीं और मीठे पानी के वातावरण में निर्मित हुई थीं। इनमें आमतौर पर 35–65% मृत्तिका और 65–35% कार्बोनेट होता है।[2]

मार्लस्टोन लगभग मार्ल के समान संरचना वाला ही एक कठोर शैल है, जिसे अधिक सटीक रूप से 'अशुद्ध मृत्तिकामय चूना पत्थर' कहा जा सकता है। अधिकांश मार्ल में मौजूद प्रमुख कार्बोनेट खनिज कैल्साइट होता है, लेकिन इसमें एरागोनाइट या डोलोमाइट जैसे अन्य कार्बोनेट खनिज भी मौजूद हो सकते हैं। एक विशेष प्रकार का मार्ल 'ग्लौकोनिटिक मार्ल' कहलाता है, जिसमें ग्लौकोनाइट नामक खनिज के कण होते हैं, जो इसे हरा रंग प्रदान करते हैं।[3]

प्राप्ति और विस्तार

[संपादित करें]

डोवर की सफेद चट्टानों की निचली स्तर-संरचना ग्लौकोनिटिक मार्ल और चूना पत्थर की परतों से बनी है।[4] फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के बीच बनी 'चैनल टनल' (Channel Tunnel) इन्ही मार्ल परतों से होकर गुजरती है।[5]

हिमनद-पश्चात झीलों के तलछट में भी मार्ल आम रूप से पाया जाता है। विशेष रूप से, 'कारा' नामक मैक्रो-शैवाल उच्च पीएच और क्षारीयता वाली उथली झीलों में पनपता है। जब यह शैवाल मर जाता है, तो इसके कैल्सीफाइड हिस्से टूटकर सूक्ष्म कार्बोनेट कणों में बदल जाते हैं, जो गाद और मिट्टी के साथ मिलकर मार्ल का निर्माण करते हैं। अर्जेंटीना के 'वाका मुएर्टा' संरचना में भी मार्ल एक प्रमुख शैल प्रकार है।

उपयोग और आर्थिक महत्व

[संपादित करें]

कृषि में मार्ल का उपयोग ऐतिहासिक रूप से सबसे पुराने 'मृदा सुधारक' के रूप में होता आया है। उपलब्ध कैल्शियम को बढ़ाने के साथ-साथ, मार्ल मिट्टी की संरचना में सुधार करने और मिट्टी की अम्लीयता को कम करने में अत्यधिक मूल्यवान है। 16वीं शताब्दी से ब्रिटेन में कृषि क्रांति के दौरान इसका बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ। आज भी इसका उपयोग अम्लीय मिट्टी के लिए एक न्यूट्रलाइजिंग एजेंट के रूप में किया जाता है।

पोर्टलैंड सीमेंट

[संपादित करें]

मार्ल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है और इसका उपयोग पोर्टलैंड सीमेंट के निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है। एक पूरक सीमेंटिंग सामग्री के रूप में यह बेहतर भौतिक और यांत्रिक गुण प्रदान करता है और इसे कम तापमान पर कैल्साइन किया जा सकता है।[6]

सिविल इंजीनियरिंग और परमाणु अपशिष्ट भंडारण

[संपादित करें]

इंग्लैंड और फ्रांस के बीच की चैनल टनल का निर्माण वेस्ट मेलबरी मार्ली चॉक संरचना में किया गया था, क्योंकि इसकी पारगम्यता बहुत कम होती है और इसमें दरारों का अभाव होता है। इसके अतिरिक्त, कुछ मार्ल परतों की अत्यंत कम पारगम्यता के कारण, उन्हें परमाणु अपशिष्ट (nuclear waste) के सुरक्षित भंडारण के लिए एक आदर्श विकल्प माना जा रहा है। मध्य स्विट्जरलैंड का वेलनबर्ग ऐसा ही एक प्रस्तावित स्थल है।[7]

मार्ल झीलें

[संपादित करें]

मार्ल झील एक ऐसी झील होती है जिसके निचले तलछट में मार्ल के बड़े भंडार होते हैं। ये प्रायः उन क्षेत्रों में पाई जाती हैं जहाँ हाल ही में हिमनदीकरण हुआ हो।[8] इनका पानी क्षारीय होता है जो घुले हुए कैल्शियम कार्बोनेट से समृद्ध होता है। पारिस्थितिक रूप से ये बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, लेकिन बढ़ते प्रदूषण, गाद और जल निकासी के कारण इन्हें खतरा भी है।

सन्दर्भ

[संपादित करें]
  1. Pettijohn, F. J. (1957). Sedimentary Rocks (2nd ed.). New York: Harper & Brothers. pp. 368–369. ओसीएलसी 551748.
  2. Blatt, Harvey; Tracy, Robert J. (1996). Petrology : igneous, sedimentary, and metamorphic (2nd ed.). New York: W.H. Freeman. p. 217. ISBN 0716724383.
  3. Nourmohamadi, Mohammad Sadi; et al. (30 November 2020). "Green Glauconitic Marl Bed As A Sequence Stratigraphical Key For Interpretation Of Contact Between Qamchuqa And Bekhme Formations". Bulletin of the Geological Society of Malaysia. 70 (1): 29–38. डीओआई:10.7186/bg70202003.
  4. Bristow, Roger; Mortimore, Rory; Wood, Christopher (January 1997). "Lithostratigraphy for mapping the Chalk of southern England". Proceedings of the Geologists' Association. 108 (4): 293–315. डीओआई:10.1016/S0016-7878(97)80014-4.
  5. Harris, C.S., ed. (1996). Engineering Geology of the Channel Tunnel. London: Thomas Telford. p. 57. ISBN 0-7277-2045-7.
  6. Rakhimov, Ravil Z.; Rakhimova, Nailia R.; Gaifullin, Albert R.; Morozov, Vladimir P. (May 2017). "Properties of Portland cement pastes enriched with addition of calcined marl". Journal of Building Engineering. 11: 30–36. डीओआई:10.1016/j.jobe.2017.03.007.
  7. Pearson, F.J.; Scholtis, A. (2021). "Controls on the chemistry of pore water in a marl of very low permeability". Water-rock interaction : proceedings of the 8th International Symposium, WRI-8. London: Taylor & Francis. डीओआई:10.1201/9780203734049-8. ISBN 9780203734049.
  8. Pentecost, Allan (December 2009). "The Marl Lakes of the British Isles". Freshwater Reviews. 2 (2): 167–197. डीओआई:10.1608/FRJ-2.2.4.

इन्हें भी देखें

[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ

[संपादित करें]