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मार्गशीर्ष कृष्ण नवमी

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मार्गशीर्ष कृष्ण नवमी भारतीय पंचांग [1] के अनुसार नौवें माह की चौबीसवी तिथि है, वर्षान्त में अभी ९६ तिथियाँ अवशिष्ट हैं।

पर्व एवं उत्सव

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प्रमुख घटनाएँ

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कृष्ण भक्ति की बल्लभ परंपरा में विट्ठलनाथ द्वारा प्रवर्तित पुष्टिमार्ग में अष्टछाप कवियों का विशेष महत्व है । इन्ही अष्टछाप कवियों में से एक श्री गोविन्द स्वामी, का जन्म मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की नवमी को भरतपुर के आंतरी गाँव (वर्तमान में अटारी) में हुआ, जो बाद में गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में स्थित क़दमख़ंडी में जीवनपर्यंत रहे और अंततः वहीं से लीला प्रवेश किया। आज भी यहाँ श्री वनबिहारी मंदिर में गोविन्द स्वामी जी की बैठक मौजूद है । अष्टसखा गोविन्द स्वामी को कृष्ण के अंतरंग सखा तथा राधा जू के भाई श्रीदामा के अवतार बताया जाता है । भगवान श्री कृष्ण, अष्टसखा और गोविन्द स्वामी पर शोध, खोज और लेखन के लिए अष्टसखा गोविन्दस्वामी शोध संस्थान कार्यरत है । [2]

इन्हें भी देखें

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बाह्य कड़ीयाँ

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सन्दर्भ

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  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से से 1 फ़रवरी 2016 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 13 अक्तूबर 2016.
  2. Devpura, Bhagwati Prasad (2001). Ashtchhaap kavi govind das - Editor- Bhagwati prasad devpura published by Sahitya mandal Nathdwara 2001, page no. 31. Nathdwara Rajasthan: Sahitya mandal Nathdwara. p. 32.