मानव लैंगिकता

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कामुकता एक सहज वृति है जो हर इंसान में होती है, अगर हम कामुक होना बंद कर दे तो परकृति का अविरल चलने वाली धारा ही बंद हो जायगी.कामुकता एक नेश्र्सिक खूबी है। जिसे जन्म से ही हमारे पास है माँ और पिता के माध्यम से हमे दिया है, इश्वर या कहे नेचर ने . हमारे और जानवरों में बस यही फरक होता है की हमे कामुकता कभी छोड़ कर नही भागती और जानवरों में कामुकता के आने और जाने का एक निश्चित समय होता है। किन्तु मानव के ऊपर ये बात नही है। क्युकी हम नेचर के इतने पास होते है की कामुकता हमसे कही नही खोती....फ्रेड ने कहा है की मानव कामुक रहता हमेशा है किन्तु उसे बताना है, उसकी कामुकता को परगट करता है