मानवतावाद

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साँचा:Humanism

मानवतावाद मानव मूल्यों और चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करने वाला अध्ययन, दर्शन या अभ्यास का एक दृष्टिकोण है। इस शब्द के कई मायने हो सकते हैं, उदाहरण के लिए:

  1. एक ऐतिहासिक आंदोलन, विशेष रूप से इतालवी पुनर्जागरण के साथ जुड़ा हुआ।
  2. शिक्षा के लिए एक ऐसा दृष्टिकोण जिसमें छात्रों को जानकारी देने के लिए साहित्यिक अर्थों का उपयोग होता है या मानविकी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  3. दर्शन और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में कई तरह के दृष्टिकोण जो 'मानव स्वभाव' के कुछ भावों की पुष्टि करता है (मानवतावाद-विरोध के विपरीत).
  4. एक धर्मनिरपेक्ष विचारधारा जो नैतिकता और निर्णय लेने की क्षमता के एक आधार के रूप में विशेष रूप से अलौकिक और धार्मिक हठधर्मिता को अस्वीकार करते हुए हित, नैतिकता और न्याय का पक्ष लेता है।

बाद की व्याख्या में धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद को एक विशिष्ट मानववादी जीवन के उद्देश्य के रूप में जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।[1] इसलिए इस शब्द के आधुनिक अर्थों को अलौकिक या किसी उच्चस्तरीय सत्ता के प्रति आग्रहों की अस्वीकृति के साथ जोड़ा जाता है।[2][3] यह व्याख्या पारंपरिक धार्मिक क्षेत्रों में इस शब्द के अन्य प्रमुख उपयोगों के साथ प्रत्यक्षतः विपरीत हो सकती है।[4] इस पहलू का मानववाद ज्ञानोदय के प्रकृतिवाद और आस्तिकता-विरोध (एंटी-क्लैरिकलिज़्म) के एक विस्तारित क्षेत्र से उत्पन्न हुआ है, जो 19वीं सदी के विभिन्न धर्मनिरपेक्ष आंदोलनों (जैसे कि प्रत्यक्षवाद) और वैज्ञानिक परियोजनाओं का व्यापक विस्तार है।

मानवतावादी (ह्युमनिस्ट), मानवतावाद (ह्यूमनिज्म) और मानवतावाद संबंधी (ह्युमनिस्टिक) का संबंध सीधे तौर पर और सहज रूप से साहित्यिक संस्कृति से है।[5]

इतिहास[संपादित करें]

"मानवतावाद (ह्यूमनिज्म)" शब्द के अनेक अर्थ हैं। 1806 के आसपास जर्मन स्कूलों द्वारा पेश किये गए पारंपरिक पाठ्यक्रमों की व्याख्या के लिए ह्युमानिस्मस का इस्तेमाल किया गया था और 1836 में "ह्यूमनिज्म " को इस अर्थ में अंग्रेजी को प्रदान किया गया था। 1856 में महान जर्मन इतिहासकार और भाषाविद जॉर्ज वोइट ने ह्यूमनिज्म का इस्तेमाल पुनर्जागरण संबंधी मानवतावाद की व्याख्या के लिए किया था, यह आंदोलन पारंपरिक शिक्षा को पुनर्जीवित करने के लिए इतालवी पुनर्जागरण के दौरान खूब फला-फूला था, जिसमें इसके इस्तेमाल को कई देशों, विशेषकर इटली में इतिहासकारों के बीच व्यापक स्वीकृति मिली थी।[6] "ह्युमनिस्ट" शब्द का ऐतिहासिक और साहित्यिक प्रयोग 15वीं सदी के इतालवी शब्द युमनिस्ता से निकला है जिसका अर्थ पारंपरिक ग्रीक और इतालवी साहित्य का एक शिक्षक या विद्वान और इसके पीछे का नैतिक दर्शन है।

लेकिन 18वीं सदी के मध्य में इस शब्द का एक अलग तरह का उपयोग होना शुरू हो गया था। 1765 में एक फ्रेंच एनलाइटमेंट पत्रिका में छपे एक गुमनाम आलेख में कहा गया था "मानवतावाद के प्रति एक सामान्य प्रेम... एक सदाचार जो अभी तक हमारे बीच बेनाम है और एक ऐसी सुंदर और आवश्यक चीज के लिए एक शब्द तैयार करने का समय आ गया है, जिसे हम "ह्यूमनिज्म" कहना पसंद करेंगे। "[7] 18वीं सदी के उत्तरार्द्ध और 19वीं सदी की शुरुआत में मानव भलाई और ज्ञान के प्रसार के लिए समर्पित (कुछ ईसाई, कुछ नहीं) अनेकों जमीनी "परोपकारी" और उदार समाजों का निर्माण होता देखा गया। फ्रांस की क्रांति के बाद यह विचार कि मानव सदाचार का निर्माण परंपरागत धार्मिक संस्थानों से अलग स्वतंत्र रूप से केवल मानवीय हितों के जरिये किया जा सकता है, ज्ञानोदय के सिद्धांत की क्रांति के विरोध के लिए जिम्मेदार रूसो जैसे इंसान को देवता के सामान या मूर्ति के रूप में माने जाने पर एडमंड बर्क और जोसेफ डी मैस्ट्रे जैसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक परंपरावादियों द्वारा हिंसक हमले किये गए।[8] मानवतावाद के लिए एक नकारात्मक अर्थ के अधिग्रहण शुरू किया। ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में "ह्यूमनिज्म" शब्द का इस्तेमाल 1812 में एक अंग्रेज पादरी द्वारा उन लोगों के बारे में बताने के लिए दर्ज है जो ईसा मसीह (क्राइस्ट) "सिर्फ मानवता" (ईश्वरीय प्रकृति के विपरीत) में विश्वास करते हैं यानी एकेश्वरवादी और प्रकृतिवादी.[9] इस ध्रुवीकृत माहौल में जहाँ सुव्यवस्थित चर्च संबंधी निकायों ने वैगनों को घेरने की कोशिश की और राजनीतिक एवं सामाजिक सुधारों का विरोध करने के लिए बाध्य किया जैसे कि फ्रैंचाइजी, सार्वभौमिक शिक्षा और इसी तरह की चीजों का विस्तार करना, इस तरह उदार सुधारकों और प्रजातंत्रवादियों ने मानवतावाद के विचार को मानवता के एक वैकल्पिक धर्म के रूप में अपना लिया। अराजकतावादी प्रौढ़ों (जिन्हें इस घोषणा के लिए जाना जाता है कि "संपत्ति का मतलब है चोरी") ने "ह्युमानिस्म" शब्द का इस्तेमाल एक "कल्ट, डाइफिकेशन डी ला'ह्युमेनाइट " ("सम्प्रदाय, मानवता का ईश्वरवाद") की व्याख्या के लिए किया और ला'अवेनिर डी ला साइंस: पेन्सीज डी 1848 ("द फ्यूचर ऑफ नॉलेज: थॉट्स ऑन 1848 ")(1848-49) में अर्नेस्ट रेनान कहते हैं: "इसमें मेरी गहरी आस्था है कि विशुद्ध मानवतावाद भविष्य का धर्म होगा जो मनुष्य — के जीवन भर में, पवित्रिकृत और नैतिक मूल्य के स्तर तक उन्नत की गयी हर चीज का एक संप्रदाय है।"[10]

तकरीबन उसी दौरान "मानवतावाद (ह्यूमनिज्म)" शब्द मानव मात्र के आसपास (संस्थागत धर्म के खिलाफ) एक दर्शन के रूप में केंद्रित हुआ जिसका इस्तेमाल जर्मनी में तथाकथित लेफ्ट हेजेलियंस, अर्नोल्ड रयूज और कार्ल मार्क्स द्वारा भी किया जा रहा था जो दमनकारी जर्मन सरकार में चर्च की नजदीकी भागीदारी के आलोचक थे। इन शब्दों के कई उपयोगों के बीच लगातार एक भ्रम की स्थिति बनी हुई है:[11] दार्शनिक मानवतावादी यूनानी दार्शनिकों और पुनर्जागरण संबंधी इतिहास के महान शख्सियतों में से मानव-केन्द्रित पूर्ववर्तियों की और अक्सर कुछ हद तक यह मानते हुए देखते हैं कि प्रसिद्ध ऐतिहासिक मानवतावादियों और मानवीय हितों के चैम्पियनों ने अपने -विरोधी रुख को समान रूप से साझा किया था।

पूर्ववर्ती[संपादित करें]

प्राचीन यूनान[संपादित करें]

छठी शताब्दी बीसीई के सुकरात के पूर्ववर्ती यूनानी दार्शनिक मिलेटस के थेल्स और कालफ़न के जेनोफेन्स दुनिया की व्याख्या मिथक और परंपरा के बजाय मानव हितों के संदर्भ में करने की कोशिश करने वाले पहले दार्शनिक थे, इसलिए उन्हें पहले यूनानी मानवतावादी कहा जा सकता है। थेल्स ने मानवरूपी देवताओं की धारणा पर सवाल खड़े किये और जेनोफेन्स ने अपने समय के देवताओं को मानने से इनकार कर दिया और ईश्वर को ब्रह्मांड में एकता के सिद्धांत के रूप में आरक्षित कर लिया। आयानियन यूनानी यह मानने वाले पहले विचारक थे कि प्रकृति अलौकिक क्षेत्र से अलग कर अध्ययन किये जाने के लिए उपलब्ध है। एनाक्सागोरस दर्शन और तर्कसंगत सवाल करने की भावना को आयनिया से एथेंस लेकर आये। एथेंस के नेता, पेरिक्लीज अपनी सर्वोत्कृष्ट प्रसिद्धि के दौरान एनाक्सागोरस के प्रशंसक थे। अन्य प्रभावशाली सुकरात के पूर्ववर्तियों या तर्कसंगत दार्शनिकों में शामिल हैं प्रोटागोरस (पेरिक्लीज के एक दोस्त एनाक्सागोरस की तरह) जो अपनी प्रसिद्ध उक्ति "मनुष्य हर चीज का एक उपाय है" के लिए जाने जाते हैं और डेमोक्रिटस जिन्होंने यह प्रस्तावित किया कि चीजें परमाणुओं से बनी हैं। इन प्रारंभिक दार्शनिकों की लिखित रचनाओं में से बहुत ही कम अस्तित्व में हैं और इन्हें दूसरे लेखकों, मुख्यतः प्लेटो और अरस्तू के वाक्यांशों या उक्तियों से जाना जाता है। इतिहासकार थुसीडाइड्स, जो इतिहास के प्रति अपने विख्यात वैज्ञानिक और तर्कसंगत दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं, बाद के मानवतावादियों ने उनकी भी बड़ी प्रशंसा की है।[12] तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में एपिक्यूरस को शैतान की समस्या, जीवनोपरांत की बातों में विश्वास की कमी और सुख की प्राप्ति के प्रति मानव-केंद्रित दृष्टिकोणों के लिए उनके संक्षिप्त मुहावरों के लिए जाना गया। वे महिलाओं को नियमपूर्वक अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करने वाले पहले यूनानी दार्शनिक भी थे।

एशिया[संपादित करें]

अलौकिक सत्ता को अस्वीकार करने वाले मानव-केंद्रित दर्शन को 1000 ई.पू. तक के भारतीय दर्शन की लोकायत प्रणाली में पाया जा सकता है। इसके अलावा छठी-शताब्दी ईसा पूर्व में गौतम बुद्ध ने अपने पाली साहित्य में अलौकिक सत्ता की ओर एक संशयपूर्ण प्रवृत्ति दिखाई:[13]

चूंकि ना तो आत्मा और ना ही आत्मा से जुड़ी कोई भी चीज वास्तव में और सचमुच अस्तित्व में रह सकती है, यह विचार जिसमें कहा जाता है कि मैं ही "दुनिया" हूँ, मैं ही "आत्मा" हूँ, इसके बाद स्थायी रूप से मौजूद, कायम, अपरिवर्तनीय, अनंत काल तक माना जाता रहेगा: क्या यह एक बिलकुल और पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण सिद्धांत नहीं है?

चीन में हुआंग्डी को मानवतावाद के जन्मदाता के रूप में माना जाता है। याओ और शन जैसे संत राजाओं का नाम मानवतावादी शख्सियतों के रूप में दर्ज है। झाऊ के किंग वू की प्रसिद्ध कहावत है: "मनुष्य दुनिया में (सभी के बीच में) एक लिंग (भावना, आत्मा, ईश्वर या नेता) है।" उनमें से झाऊ के ड्यूक, जिन्हें रुजिया (कन्फ्यूशियसवाद) के एक प्रारंभिक संस्थापक के रूप में सम्मान दिया जाता है, मानवतावादी सोच के मामले में विशेष रूप से प्रमुख और अग्रणी हैं। उनके शब्दों को बुक ऑफ हिस्ट्री में निम्नलिखित प्रकार से दर्ज किया गया था (अंग्रेजी में अनुवाद):

लोगों की जो भी इच्छा होती है, ईश्वर उसे अवश्य पूरा करते हैं।
स्वर्ग (ईश्वर) विश्वसनीय नहीं है। हमारा ताओ (सिद्धांत) नैतिक है (पूर्व संत राजाओं के जमाने से और आगे भी जारी रहेगा).

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में ताओवादी उपदेशक लाओजी प्राकृतिक मानवतावादी दर्शन को मानते थे। कन्फ्यूशियस ने भी धर्मनिरपेक्ष नैतिकता का पाठ पढ़ाया. सूक्तिसंग्रह XV.24 से लिया गया कन्फ्यूशियसवाद का सिल्वर रूल अलौकिक सता की बजाय मानव मूल्यों पर आधारित नैतिक दर्शन का एक उदाहरण है। कन्फ्यूशियस के अन्य सिद्धांतों में भी मानवतावादी सोच मौजूद है, जैसे कि जो झुआन में दर्ज के अनुसार, जी लुआन कहते हैं: "लोग देवताओं के झू (मास्टर, ईश्वर, प्रभु, स्वामी या मूल) हैं। इसलिए संत राजाओं के लिए लोग पहले, देवता बाद में हैं"; नीशी गुओ कहते हैं: "देवता, बुद्धिमान, सदाचारी और दयालु, मनुष्य का अनुपालन करते हैं।

पुनर्जागरण[संपादित करें]

पुनर्जागरण का मानवतावाद मध्य युग के अंत और आधुनिक युग की शुरुआत में यूरोप में एक बौद्धिक आंदोलन था। 19वीं शताब्दी के जर्मन इतिहासकार जॉर्ज वोइट (1827-91) ने पेट्रार्क को पुनर्जागरण के पहले मानवतावादी के रूप में पहचान दी. पॉल जॉनसन इससे सहमत हैं कि पेट्रार्क "इस धारणा को शब्दों में व्यक्त करने वाले पहले व्यक्ति थे कि रोम के पतन और वर्तमान के बीच की सदियाँ अंधकार का युग रही थीं।" पेट्रार्क के अनुसार इस स्थिति में सुधार के लिए महान पारंपरिक लेखकों के सावधानीपूर्वक अध्ययन और अनुकरण की जरूरत थी। पेट्रार्क और बोक्काक्सियो के लिए सबसे महान गुरु सिसरो थे जिनके गद्य सीखे गए (लैटिन) और स्वदेशी (इतालवी) गद्य दोनों के लिए आदर्श बन गए थे।

एक बार जब भाषा में व्याकरण की दृष्टि से महारत हासिल कर लिया गया तो इसका इस्तेमाल दूसरे चरण, वाकपटुता या व्याख्यान विद्या प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। अनुनय की यह कला [सिसरो की धारणा] अपने आप के उपयोग की कला नहीं थी, बल्कि दूसरों - सभी पुरुषों और महिलाओं - को बेहतर जीवन देने के लिए मनाने की क्षमता हासिल करने की कला थी। जैसा कि पेट्रार्क इसके बारे में कहते हैं, "सच्चाई को जानने से बेहतर है अच्छाई की चाह करना." इसा प्रकार व्याख्यान विद्या में पारंगत होने के बाद दर्शन को गले लगा लिया गया। नई पीढ़ी के उत्कृष्ट विद्वान लियोनार्डो ब्रूनी (1369-1444 ई.) ने जोर देकर कहा कि यह पेट्रार्क ही थे जिन्होंने "हमारे लिए यह देखने का मार्ग खोल दिया कि शिक्षा कैसे प्राप्त की जाती है," लेकिन युमनिस्ता शब्द सबसे पहले ब्रूनी के समय में इस्तेमाल में आया और इसके अध्ययन के विषयों को पाँच के रूप में सूचीबद्ध किया गया: व्याकरण, व्याख्यान विद्या, कविता, नैतिक दर्शन और इतिहास."[14]

मानवतावाद का बुनियादी प्रशिक्षण था, अच्छी तरह से बोलना और लिखना (आम तौर पर, एक पत्र के रूप में). पेट्रार्क के अनुयायियों में से एक कोलुक्सियो सैल्युटाटी (1331-1406) को फ्लोरेंस का चांसलर बनाया गया था, "जिनके हितों का बचाव उन्होंने अपने साहित्यिक कौशल से किया। मिलान के विसकोंटी का दावा था कि सैल्युटाटी की कलम ने 'फ्लोरेंटाइन घुड़सवार फ़ौज के तीस स्क्वाड्रनों' से कहीं ज्यादा नुकसान पहुँचाया था।"[15][15] वोइट के प्रख्यात समकालीन जैकब बर्कहार्ट[16] से शुरू हुई एवं अभी तक व्यापक रूप से मौजूद व्याख्या जिसे तहे दिल से अपनाया गया था (विशेष रूप से अपने आप को "मानवतावादी" कहने वाले लोगों द्वारा),[17] उसके विपरीत ज्यादातर विशेषज्ञ अब पुनर्जागरण के मानवतावाद की व्याख्या एक दार्शनिक आंदोलन के रूप में नहीं करते हैं और ना ही इसे किसी भी तरह से ईसाई-विरोधी अथवा पादरी-विरोधी ही मानते हैं। एक आधुनिक इतिहासकार का यह कहना है:

मानवतावाद एक वैचारिक कार्यक्रम नहीं था बल्कि यह "अच्छे पत्रों के पुनरुद्धार" पर आधारित साहित्यिक ज्ञान और भाषाई योग्यता का एक निकाय था जो एक मृत-प्राचीन भाषाशास्त्र और व्याकरण का एक पुनरुद्धार था, इसी तरह "मानवतावाद" शब्द समकालीनों की समझ में आया था और अगर विद्वान इस शब्द को उन्नीसवीं सदी में इस्तेमाल किये गए अर्थ की बजाय इस अर्थ में स्वीकार करने के लिए सहमत हों तो हम एक बेकार की बहस को एक बेहतर उपाय के रूप में प्रसार कर सकते हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि उस मानवतावाद ने इतालवी दरबारियों के जीवन के सामाजिक और यहां तक कि राजनीतिक परिणामों पर गहरा असर डाला था। लेकिन यह विचार कि एक आंदोलन के रूप में यह किसी हद तक चर्च या आम तौर पर रूढ़िवादी सामाजिक व्यवस्था के प्रतिकूल था, इसे एक सदी से अधिक समय तक किसी पर्याप्त सबूत की पेशकश के बगैर आगे बढ़ाया गया है।

उन्नीसवीं सदी के इतिहासकार जैकब बर्कहार्ट अपनी उत्कृष्ट रचना द सिविलाइजेशन ऑफ द रिनेसां इन इटली में "एक जिज्ञासु तथ्य" के रूप में लिखा कि नयी संस्कृत्ति के कुछ लोग "बहुत ही सख्त धार्मिकता के लोग, या यहाँ तक कि संन्यासी" थे। अगर उन्होंने कैमलडोल्स ऑर्डर के जनरल, अल्ब्रोजियो ट्रावरसारी (1386-1439) जैसे मानवतावादियों के कैरियर के अर्थ में अधिक गहराई से ध्यान केन्द्रित किया होता, संभवतः वे मानवतावाद की व्याख्या "पगान" जैसे अयोग्य शब्दों में करने की कोशिश नहीं करते और इस प्रकार "क्रिश्चियन ह्यूमनिज्म" कहे जाने वाले किसी शब्द के संभावित अस्तित्व के बारे में एक अनुत्पादक बहस में पूरी एक सदी को बेकार गंवाने में मदद नहीं करते जिसे "पगान ह्यूमनिज्म" का विरोध करने के लिए होना चाहिए था। - पीटर पार्टनर, रिनेसां रोम, पोर्ट्रेट ऑफ ए सोसायटी 1500-1559 (यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया प्रेस 1979) पृष्ठ 14-15.

युमनिस्ती ने उसकी आलोचना की थी जिसे उन्होंने विश्वविद्यालयों का असभ्य लैटिन स्वरूप माना था लेकिन मानविकी के पुनरुद्धार ने काफी हद तक विश्वविद्यालय के परंपरागत विषय-वस्तुओं की पढ़ाई का विरोध नहीं किया, जो पहले की तरह चलती रही। [18]

ना ही मानवतावादियों ने स्वयं को ईसाई धर्म के विरोधी के रूप में देखा. कुछ लोग सैल्युटाटी की तरह इतालवी शहरों के चांसलर थे लेकिन ज्यादातर (पेट्रार्क सहित) को पादरियों के रूप में नियुक्त किया गया और कई लोगों ने पैपल कोर्ट के वरिष्ठ अधिकारियों के रूप में काम किया। मानवतावादी पुनर्जागरण के पोप निकोलस V, पायस II, सिक्सटस VI और लियो X ने पुस्तकें लिखीं और विशाल पुस्तकालयों का संग्रहण किया।[19]

उन्नत पुनर्जागरण में, वास्तव में यह उम्मीद थी कि चर्च के फादरों की रचनाओं, क्रिस्चियन गॉस्पेल के शुरुआती ज्ञात यूनानी ग्रंथों और कुछ मामलों में यहाँ तक कि यहूदी काब्बाला सहित प्राचीन काल के ज्ञान की अधिक प्रत्यक्ष जानकारी सार्वभौमिक सामंजस्य के एक सद्भावपूर्ण नए युग का आरंभ करेगी। [20] विचारों के इस अंत के साथ पुनर्जागरण कालीन चर्च अधिकारियों ने मानवतावादियों को उसके लिए समर्थ बनाया जो पुनरावलोकन में विचारों की स्वतंत्रता का एक उल्लेखनीय स्तर जान पड़ता है।[21][22] ग्रीस के माइस्ट्रास में स्थित (लेकिन फ्लोरेंस, वेनिस और रोम के मानवतावादियों के संपर्क में) एक मानवतावादी, यूनानी रूढ़िवादी प्लेटोनिस्ट जेमिस्टस प्लेथो (1355-1452) ने पगान (मूर्तिपूजक) बहुदेववाद के ईसाईकृत संस्करण का पाठ पढ़ाया.[23]

स्रोतों की ओर वापसी[संपादित करें]

मानवतावादियों द्वारा लैटिन साहित्यिक ग्रंथों के करीबी अध्ययन ने जल्द ही उन्हें अलग-अलग समय की लेखन शैलियों में ऐतिहासिक मतभेदों को जानने के लिए सक्षम बनाया। जिसे उन्होंने लैटिन की गिरावट के रूप में देखा था उसके सादृश्य उन्होंने पैट्रिस्टिक साहित्य के साथ-साथ पगान (मूर्तिपूजा) लेखकों की पांडुलिपियों को प्राप्त करने और सीखने के संपूर्ण व्यापक क्षेत्रों में एड फोंटेस या स्रोतों की ओर वापसी के सिद्धांत को लागू किया। 1439 में आरागॉन के अलफोंसो V के दरबार में नैपल्स में नियुक्त रहते हुए (पैपल राज्यों के साथ विवाद में संलग्न रहने के समय) मानवतावादी लोरेंजो वाला ने यह साबित करने के लिए कि कॉन्स्टेन्टाइन का डोनेशन, जिसे रोम के पोप पर लौकिक शक्तियों प्रदान करने के लिए कथित रूप से दिया गया था, जो आठवीं सदी की एक जालसाजी थी, शैलीगत साहित्यिक विश्लेषण का इस्तेमाल किया जिसे अब फिलोलॉजी (भाषाशास्त्र) कहा जाता है।[24] हालांकि अगले 70 वर्षों तक ना तो वाला और ना ही उनके समकालीनों में से किसी ने इस तरह के अन्य विवादास्पद पांडुलिपियों के लिए भाषाशास्त्र की तकनीकों को लागू करने पर विचार किया। इसकी बजाय 1453 में तुर्कों द्वारा बीजान्टिन साम्राज्य के पतन के बाद, जिसने यूनानी रूढ़िवादी शरणार्थियों की एक बाढ़ इटली में ला दी, मानवतावादी विद्वान यूनानी और रोमन चर्चों के बीच और यहाँ तक कि स्वयं ईसाईयत और गैर-ईसाई दुनिया के बीच मतभेदों को दूर करने की उम्मीद से तेजी से नियोप्लेटोनिज्म और हर्मेटिसिज्म के अध्ययन की ओर मुड़ गए।[25] शरणार्थी अपने साथ सिर्फ प्लेटो और अरस्तू की ग्रीक पांडुलिपियों को ही नहीं बल्कि ईसाई गॉस्पेल (धर्म-सिद्धांत) को भी लेकर आये जो पहले लैटिन पश्चिम में उपलब्ध नहीं थे। 1517 के बाद जब मुद्रण का नया आविष्कार हुआ तो ये ग्रन्थ व्यापक रूप से उपलब्ध हुए. डच मानवतावादी इरास्मस जिन्होंने आल्डस मैन्युटियस के वेनेटियन प्रिंटिंग हाउस में यूनानी का अध्ययन किया था, वाला की भावना में उन्होंने बाद की त्रुटियों और विसंगतियों को ठीक करने के विचार से यूनानी मूल साहित्यों की तुलना उनके लैटिन अनुवाद के साथ करते हुए गॉस्पेल के एक भाषाविज्ञान संबंधी विश्लेषण का काम शुरू किया। इरास्मस ने फ्रेंच मानवतावादी जैक्स लैफेवर डी'एटेपल्स के साथ नए अनुवादों को जारी करना और प्रोटेस्टेंट रिफोर्मेशन के लिए नींव बिछाने का काम शुरू कर दिया। इसके बाद विशेष रूप से उत्तरी जर्मनी में पुनर्जागरण मानवतावाद का सम्बन्ध धर्म के साथ जुड़ गया, जबकि इतालवी और फ्रेंच मानवतावाद ने छात्रवृत्ति और विशेषज्ञों के एक छोटे दर्शक वर्ग को संबोधित भाषाशास्त्र पर तेजी से ध्यान केंद्रित किया और मनोयोग से उन विषयों से परहेज किया जो निरंकुश शासकों का अपमान कर सकते थे या जिसे विश्वास के नाशक के रूप में देखा जा सकता था। सुधार के बाद बाइबल की महत्वपूर्ण परीक्षा 19वीं सदी के जर्मन तबिंजेन स्कूल की तथाकथित उच्च स्तरीय आलोचना के आगमन तक शुरू नहीं हुई थी।

परिणाम[संपादित करें]

एड फोंटेस (मूल स्रोतों की ओर लौटने) के सिद्धांत के भी कई अनुप्रयोग थे। प्राचीन पांडुलिपियों की दुबारा खोज के माध्यम से प्राचीन दार्शनिक सम्प्रदायों जैसे एपिक्युरियसवाद और नवप्लेटोवाद के बारे में अधिक गहन और सही ज्ञान प्राप्त हुआ, जिनके पगान (मूर्तिपूजक) संबंधी पांडित्य को मानवतावादी, जैसे कि पुराने, सेवारत चर्च के पादरियों ने कम से कम अपने शुरुआती रुख में ईश्वरीय आदेश से उत्पन्न और इसलिए ईसाई धर्माचरण में स्वीकार किये जाने योग्य माना.[26] टेरेंस के एक नाटक की पंक्ति, होमो सम, हुमामी निहिल ए मी एलियेनम पुतो (या निहिल के लिए निल के साथ) अर्थात "मैं एक मनुष्य हूँ, मैं किसी भी तरह की मानवता को अन्यदेशीय नहीं मानता", यह सैंट अगस्टाइन के माध्यम से प्राचीन काल से ही जाना जाता है जो मानवीय दृष्टिकोण के प्रतीक के रूप में नए सिरे से प्रचलन में आया।[27]

यूनानी और रोमन तकनीकी लेखन से बेहतर परिचय ने यूरोपीय विज्ञान के विकास को भी प्रभावित किया (पुनर्जागरण में विज्ञान के इतिहास को देखें). ऐसा इसके बावजूद था जिसे ए.सी. क्रोम्बी (पुनर्जागरण को 19वीं शताब्दी के तरीके से विकास की ओजपूर्ण प्रगति में एक अध्याय की तरह देखना) "प्राचीनता के लिए एक पीछे मुड़ कर देखने वाली प्रशंसा" कहते हैं जिसमें प्लेटोवाद, भौतिक जगत के अवलोकनीय गुणों पर एकाग्रता के अरस्तुई सिद्धांत के विरुद्ध खड़ा है।[28] लेकिन पुनर्जागरण कालिक मानवतावादी जो स्वयं को प्राचीनता के गौरव और श्रेष्ठता को पुनः स्थापित करने वाला मानते थे, उन्हें वैज्ञानिक आविष्कारों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। हालांकि 16वीं सदी के मध्य से अंत तक विश्विद्यालयों ने भी, जिनमें अभी भी शास्त्रीय रूढ़िवादिता हावी थी, अरस्तू को पुनर्जागरण कालीन भाषा विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार सम्पादित एकदम सही अवतरण में पढ़ने की मांग की और इस तरह पुरानी पड़ चुकी शास्त्रीय रूढ़िवादिता से गैलिलियो के विवाद का मंच तैयार किया गया।

जिस तरह कलाकार और अन्वेषक लिओनार्दो दा विंची ने - युगचेतना में सम्मिलित होते हुए जबकि वह स्वयं मानवतावादी नहीं था - पुनर्जागरण कला को समृद्ध करने के लिए मानव शरीर रचना, प्रकृति और मौसम के अध्ययन की वकालत की, उसी तरह स्पेन में जन्मे मानवतावादी जुआन लुईस वाइव्ज़ (1493–1540 ई.) ने विश्वविद्यालयों में अरस्तू के दर्शन की औपचारिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिल्प और व्यवहारिक तकनीक का पक्ष लिया और मध्यकालीन शास्त्रीय रूढ़िवादिता की पकड़ से मुक्त करने में उनकी मदद की। [29] इस तरह अनुभवसिद्ध अवलोकन और ब्रह्मांड भौतिक के प्रयोग पर आधारित प्राकृतिक दर्शन के मार्ग को अपनाने का मंच तैयार हो गया जिसने पुनर्जागरण के बाद आने वाले वैज्ञानिक अन्वेषण के युग के उदय को संभव बनाया। [30]

शिक्षा के क्षेत्र में मानवतावादियों की योजनाओं के सर्वाधिक दूरगामी परिणाम रहे, उनके पाठ्यक्रम और तरीकों का हर जगह अनुकरण किया गया,

यह प्रोटेस्टेंट सुधारकों के साथ-साथ और जेसुइटों के लिए मॉडल के रूप में काम आया। शात्रीय भाषाओँ और साहित्य का अध्ययन बहुमूल्य सूचना और बौद्धिक अनुशासन के साथ-साथ नैतिक मानदंड और इस समाज के भविष्य के शासकों, नेताओं और पेशेवरों को सभ्य अभिरुचि प्रदान करता है, इस विचार से जीवंत मानवतावादी संप्रदाय कई महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों के जरिये हमारी अपनी शताब्दी तक कई धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक क्रांतियों को अस्तित्ववान रखते हुए किसी रुकावट के बगैर पनपता रहा. हालांकि पूरी तरह नहीं लेकिन अब यह हाल में अधिक व्यवहारिक और कम दक्षता की मांग करने वाले शिक्षा के तरीकों से प्रतिस्थापित कर दिया गया है।[31]

पुनर्जागरण से आधुनिक मानवतावाद तक[संपादित करें]

पुनर्जागरण काल के मानवतावाद का 19 वीं और 20 वीं शताब्दी के मानवतावाद में विकास दो शख्सियतों के माध्यम से आया: गैलीलियो और एरास्मस. सांस्कृतिक आलोचक ओस गिनीज़ बताते हैं कि पुनर्जागरण के दौरान शुरुआत में मानवतावादी शब्द इंसानियत के लिए चिंता को ही निरूपित करता था और आरंभिक मानवतावादी इस सोच और ईसाई धर्म के बीच किसी तरह का विरोधाभास नहीं देखते थे। देखें क्रिश्चियन ह्यूमनिज्म (ईसाई मानवतावाद)

"फिर भी तर्क और धर्म के बीच एक महत्त्वपूर्ण दरार के विकसित होने साथ पुनर्जागरण से ही आधुनिक धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद का विकास हुआ। ऐसा तब हुआ जब चर्च के आत्मसंतुष्ट प्रभुत्व की दो महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में कलई खुल गयी। विज्ञान में गेलीलियो द्वारा कॉपरनिकस की क्रांति को मिले समर्थन ने अरस्तु के सिद्धांतों को झूठा साबित करते हुए उनके प्रति चर्च की निष्ठा को चोट पहुंचाई. धर्मशास्त्र में डच विद्वान एरास्मस ने अपने नए यूनानी मूल ग्रन्थ में यह दिखाया कि रोमन केथोलिक का जेरोम की वलगेट (बाइबिल का लैटिन संस्करण) को समर्थन ज्यादातर त्रुटिपूर्ण था। इस तरह तर्क और प्रभुत्व के बीच एक छोटी सी दरार पैदा हो गयी क्योंकि तब दोनों को ही समझा गया।"[32]

19वीं और 20वीं सदियाँ[संपादित करें]

"मानवता का धर्म" मुहावरे के प्रचलन का श्रेय कभी-कभी अमेरिकी संस्थापक फादर थॉमस पेन को दिया जाता है, हालांकि उनकी उपलब्ध रचनाओं से अभी यह साबित नहीं हुआ है। टोनी डेवीस के अनुसार:

पेन स्वयं को धार्मिक मानवतावादी (थियोफिलेंथ्रोपिस्ट) कहते थे, यह एक ऐसा शब्द है जिसमें "ईश्वर", "प्रेम" और "मनुष्य" के लिए यूनानी शब्द सम्मिलित हैं जो इस बात का संकेत है कि हालांकि वह ब्रह्माण्ड में एक सृजानात्मक ज्ञान के अस्तित्त्व पर विश्वास करते थे लेकिन उन्होंने समस्त अस्तित्ववान धार्मिक सिद्धांतों को विशेषकर उनके चमत्कारी, अलौकिक और मुक्तिदायी पाखंडों को नकार दिया. उनके द्वारा प्रायोजित पेरिस की "सोसाएटी ऑफ थियोफिलेंथ्रोपी" को उनके जीवनी लेखक द्वारा "बाद के समय में प्रचुर मात्रा में बनने वाली नैतिकतावादी और मानवतावादी संस्थाओं के अग्रदूत" के रूप में अंकित किया गया है" ... [पेन की पुस्तक] ज़बरदस्त रूप से कटाक्षपूर्ण एज ऑफ रीज़न (1793) ...धार्मिक ग्रंथों के परालौकिक पाखंडों पर उपहास की बौछार करती है जिसमें लेवांट की बेमेल लोक कथाओं के संग्रह पर बनाए गए धार्मिक सिद्धांतों के बेतुकेपन का पर्दाफाश करने के लिए पेन की शराबखाने के उपहास वाली अपनी शैली में वोल्टेयेर के व्यंग्य को मिलाया गया है।[33]

डेवीस पेन की द एज ऑफ रीज़न को "दो मुख्य विवरणों के लिंक जिसे जीन-फ़्रैन्कोइस ल्योटार्ड[34] वैधता का विवरण कहते हैं: 18वीं शताब्दी के फिलोसोफीस के तर्कवाद और इतिहास आधारित जर्मन के हीगेलियाई, डेविड फ्रेडरिक स्ट्रॉस और लुडविग फ्युअरबाख की 19वीं-सदी की बाइबिल संबंधी आलोचना के अतिवाद के बीच की कड़ी के रूप में पहचान करते हैं। "पहला राजनीतिक है अपनी प्रेरणा में मुख्यतः फ्रांसीसी और 'मानवता को स्वतंत्रता का नायक' घोषित करता है। दूसरा दार्शनिक, जर्मन है जो ज्ञान की स्वायत्ता और पूर्णता को खोजता है और मानवीय पूर्णता और मुक्ति की कुंजी के रूप में स्वतंत्रता की बजाए समझदारी पर जोर देता है। 19वीं शताब्दी और उसके बाद दोनों विषय वस्तुएं जटिल रूप से आपस में मिलीं और प्रतिस्पर्धी भी रहीं और उनहोंने अपने बीच विभिन्न प्रकार के मानवतावाद की सीमाएं निर्धारित कीं.[35] फ्युअरबाख ने लिखा था होमो होमिनी ड्यूस एस्ट ("मनुष्य मनुष्य के लिए एक ईश्वर है" या "ईश्वर स्वयं मनुष्य [के सिवाए] कुछ नहीं है").[36]

दुनिया भर में जॉर्ज इलियट के नाम से जानी जानेवाली विक्टोरियाई उपन्यासकार मेरी एन इवांस ने स्ट्रॉस की रचना डास लेबेन जेसू ("द लाइफ ऑफ जीसस", 1846) और फ्युअरबाख की डास वेसेन क्रिश्चियनिस्मस ("द एसेंस ऑफ क्रिश्चियनिटी") का अनुवाद किया था। उन्होंने अपनी एक मित्र को लिखा:

इंसान और इंसान के बीच का साहचर्य जो कि सामाजिक और नैतिक विकास का मूल तत्त्व रहा है, इस अवधारणा पर निर्भर नहीं रहा है कि मनुष्य क्या नहीं है।..ईश्वर का विचार जो कि अभी तक एक उच्च आध्यात्मिक प्रभाव रहा है, अच्छाई का आदर्श है जो पूरी तरह से मानवीय है (यानि मनुष्य का एक उन्नयन).[37]

इलियट और उनकी जमात जिसमें उनकी संगी जोर्ज हेनरी लुईस (गोथे की जीवनीकार) और उन्मूलनवादी एवं सामाजिक सिद्धान्तकार हेरियट मार्टिन्यू शामिल थे, ये सभी अगस्त कॉम्ते के प्रत्यक्षवाद से बहुत प्रभावित थे जिनकी रचनाओं का मार्टिन्यू ने अनुवाद किया था। कॉम्ते ने मानवीय सिद्धांतों की बुनियाद पर एक नास्तिक सम्प्रदाय का प्रस्ताव किया था - मानवीयता का पंथ निरपेक्ष धर्म (जो मृतकों को पूजता था क्योंकि अधिकाँश मनुष्य जो कभी जीवित थे अब मृतक हैं) जो उत्सवों और ईसाई पूजा पद्धति से पूर्ण था, एक अप्रतिष्ठित और जीर्ण-शीर्ण कैथोलिकवाद के रूप में देखे जाने वाले कर्मकांडों पर गढ़ा गया था।[38] हालांकि इलियट और मार्टिन्यू जैसे कॉम्ते के अनुयायियों ने उनकी व्यवस्था की पूरी तरह दुःख भरी स्थापनाओं में अधिकांश को अस्वीकार कर दिया, लेकिन उन्होंने मानवीयता के धर्म के विचार को पसंद किया। कॉम्ते का ब्रह्माण्ड सम्बन्धी आडम्बरहीन दृष्टिकोण उनका "वैवर पोर आल्त्रुई " ("दूसरों के लिए जियो" इसी से "आल्त्रुइज्म" शब्द निकला है) का आदेश[39] और उनके महिलाओं के आदर्शीकरण ने विक्टोरियाई उपन्यासकारों और जॉर्ज इलियट एवं मैथ्यू आर्नल्ड से लेकर थॉमस हार्डी तक के कवियों को प्रेरित किया।

ब्रिटिश मानवतावादी धार्मिक संगठन का गठन समकालीन चार्टर्ड मानवतावादी संगठनों के सबसे पहले अग्रणी के रूप में 1853 में लन्दन में हुआ था। यह शुरूआती समूह लोकतांत्रिक रूप से संगठित था जिसमें पुरुष और महिला सदस्य नेतृत्त्व के चुनाव में भाग लेते थे और इसने ज्ञान, दर्शन और कलाओं को बढ़ावा दिया। [40]

फ़रवरी 1877 में इस शब्द को जाहिर तौर पर पहली बार अमेरिका में फेलिक्स एडलर का विवरण देने के लिए निंदनीय रूप से प्रयोग किया गया था। हालांकि एडलर ने इस शब्द को नहीं अपनाया और इसके बजाए अपने नए आन्दोलन  – के लिए "नैतिक संस्कृति" नाम को प्रचलित किया, एक ऐसा आन्दोलन जिसका अस्तित्व आज भी अब मानवतावाद से सम्बद्ध न्यूयॉर्क सोसाइटी फॉर एथिकल कल्चर में मौजूद है।[41] 2008 में एथिकल कल्चर लीडर्स ने लिखा: "आज ऐतिहासिक पहचान, नैतिक संस्कृति और आधुनिक विवरण, नैतिक मानवतावाद को एक दूसरे के लिए प्रयोग किया जाता है।"[42]

1920 के आरंभ में सक्रिय, एफ.सी.एस. शिलर ने अपने लेखन को "मानवतावाद" नाम दिया लेकिन शिलर के लिए यह शब्द विलियम जेम्स के साथ साझा किये गए बुद्धिवादी दर्शन के सन्दर्भ में था। 1929 में चार्ल्स फ्रांसिस पॉटर ने न्यूयॉर्क की पहली मानवतावादी सोसाइटी की स्थापना की जिसके सलाहकार बोर्ड में जुलियन हक्सले, जॉन ड्युई, अल्बर्ट आइंस्टीन और थॉमस मैन शामिल थे। पॉटर युनिटेरियाई परंपरा से एक मंत्री थे और 1930 में उन्होंने और उनकी पत्नी क्लारा कुक पॉटर ने ह्यूमनिज्म: ए न्यू रिलिजन को प्रकाशित किया। 1930 के पूरे दशक के दौरान पॉटर इस तरह के उदार मुद्दों जैसे कि महिलाओं के अधिकार, जन्म नियंत्रण तक पहुँच, नागरिक तलाक़ कानून और मौत की सजा की समाप्ति के पक्षधर थे।[43]

"द न्यू ह्युमनिस्ट " के सह सम्पादक रेमंड बी. ब्रैग ने वेस्टर्न युनिटेरियन कॉन्फ्रेस के लिओन मिल्टन बर्कहेड, चार्ल्स फ्रांसिस पॉटर और कई अन्य सदस्यों के नज़रिए को मजबूती देने की कोशिश की। ब्रैग ने रॉय वुड सेलर्स से इस सूचना के आधार पर एक दस्तावेज़ का प्रारूप तैयार करने को कहा जिसका नतीजा 1933 में ह्युमनिस्ट मेनिफेस्टो के प्रकाशन के रूप में निकला। पॉटर की किताब और यह मेनिफेस्टो आधुनिक मानवतावाद की आधारशिला बन गयी, मेनिफेस्टो एक नए धर्म की घोषणा करते हुए कहता है "किसी भी धर्म को जो आज की समन्वय करने वाली और गत्यात्मक शक्ति बनने की उम्मीद करता है, उसे इस युग की ज़रूरतों के अनुरूप ढलना चाहिए. इस तरह के धर्म की स्थापना के लिए वर्तमान की एक प्रमुख आवश्यकता है।" इसके बाद इसने इस नए धर्म के लिए मूलभूत सिद्धांतों के रूप में मानवतावाद की 15 परिकल्पनाओं को प्रस्तुत किया।

1941 में अमेरिकन ह्युमनिस्ट एसोसिएशन का गठन किया गया। एएचए में शामिल जाने माने सदस्यों में प्रमुख थे आइजैक असिमोव जो 1985 से 1992 में अपने निधन तक इसके अध्यक्ष रहे और लेखक कुर्त वौनीगेट जो इसके बाद 2007 में अपने निधन तक मानद अध्यक्ष रहे। गोरे विडाल 2009 में मानद अध्यक्ष बने। रॉबर्ट बकमैन कनाडा में संगठन के प्रमुख थे और अब मानद अध्यक्ष हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तीन प्रख्यात मानवतावादी संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख विभागों के निदेशक बने: यूनेस्को के जुलियन हक्सले, विश्व स्वास्थ्य संगठन के ब्रौक चिशोम और फ़ूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गेनाइजेशन के जॉन बोएड-ओर्र.[44]

2004 में अमेरिकन ह्युमनिस्ट एसोसिएशन ने संशयवादियों, नास्तिकों और दूसरे मुक्त विचारकों के अन्य समूहों के साथ मिलकर अमेरिकी धर्मनिरपेक्ष गठबंधन (सेक्युलर कोलिशन फॉर अमेरिका) का सृजन किया जो वाशिंगटन डी.सी. में ग़ैर-आस्तिकों की व्यापक स्वीकृति के लिए चर्च और राज्य एवं राष्ट्रीयता के अलगाव की वकालत करता है। अमेरिकी धर्मनिरपेक्ष गठबंधन के कार्यकारी निदेशक शॉन फेयरक्लोथ हैं जो लम्बे समय से मेन से राज्य विधायिका सदस्य हैं।

धर्म की ओर रुख[संपादित करें]

1933 में पहले मानवतावादी मेनिफेस्टो के मूल हस्ताक्षरकर्ताओं ने खुद को धार्मिक मानवतावादी घोषित किया था। क्योंकि उनके नज़रिए में परंपरागत धर्म उनके समय की ज़रूरतों को पूरा करने में असफल हो रहा था, 1933 के हस्ताक्षरकर्ताओं ने एक ऐसे धर्म की स्थापना को एक बड़ी जरूरत घोषित किया जिसमें वक़्त की ज़रूरतों को पूरा करने की गत्यात्मक शक्ति हो। (हालांकि यहाँ पर यह ध्यान रखना चाहिए कि इस धर्म ने किसी तरह के ईश्वर में विश्वास का दावा नहीं किया।) तब से पहले का स्थान लेने के लिए दो अतिरिक्त मेनिफेस्टो लिखे गए।

दूसरे मेनिफेस्टो की भूमिका में लेखक पॉल कुर्त्ज़ और एडविन एच. विल्सन (1973) ने दृढ़तापूर्वक कहा कि भविष्य की आशावादी दृष्टि के लिए विश्वास और ज्ञान की आवश्यकता है। दूसरा मेनिफेस्टो एक खंड में धर्म और राज्यों के परंपरागत धर्म के मानवता के लिए अनुपयोगी हो जाने का सन्दर्भ देता है। दूसरा मेनिफेस्टो निम्नलिखित समूहों को अपने यथार्थवादी दर्शन के एक हिस्से के रूप में मान्यता देता है: "वैज्ञानिक", "नैतिक", "लोकतांत्रिक", "धार्मिक" और "मार्क्सवादी" मानवतावाद.

20वीं और 21वीं सदी में मानवतावादी संगठनों के सदस्यों में इस बात पर मतभेद था कि मानवतावाद धर्म है या नहीं। वे खुद को तीन तरह से वर्गीकृत करते हैं। ब्रिटेन और अमेरिका के शुरुआती मानववादी संगठनों की परंपरा में धार्मिक मानवतावादी, मानवतावाद को धर्म की परंपरागत सामाजिक भूमिका को पूरा करने के रूप में देखते थे।[45] धर्मनिरपेक्ष मानवतावादी मानते हैं कि धार्मिक मानवतावाद समेत धर्म के हर रूप को अधिक्रमित किया जाना चाहिए। [46] इन दोनों गुटों के बीच मतभेद से बचते हुए हाल की मानवतावादी घोषणाएँ मानववाद का एक जीवन दृष्टि के रूप में निरूपण करती हैं, बावजूद इसके कि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिव्यक्त नज़रिए में एक फुटनोट परिशिष्ट में दूसरों के बीच धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद को एक ऐसे धर्म एक रूप में वर्गीकृत किया गया जो ईश्वर पर विश्वास नहीं करता.[47] कार्यान्वयन पर ध्यान दिए बिना तीनों ही समूहों का दर्शन अलौकिक विश्वासों की तरफ झुकाव को नकारता है और नैतिकता को एक मानवीय उद्यम के रूप में मान्यता देते हुए बिना किसी सन्दर्भ के नैतिकता पर ध्यान देता है। यह आम तौर पर नास्तिकता.[48] और अज्ञेयवाद[49] के सामान है लेकिन नास्तिक या अज्ञेयवाद होना किसी को मानवतावादी नहीं बनाता है।[50]

ज्ञान[संपादित करें]

आधुनिक मानवतावादी जैसे कोर्लिस लेमोंत या कार्ल सगन का मानना है कि मानवीयता को तर्क और सबसे बेहतर अवलोकन करने योग्य साक्ष्यों के माध्यम से सच को तलाशना चाहिए और वैज्ञानिक संदेहवाद और वैज्ञानिक प्रणाली का समर्थन करना चाहिए। हालांकि वे यह शर्त लगाते हैं कि सही या गलत का निर्णय व्यक्ति तथा सामूहिक हित पर आधारित होना चाहिए। नैतिक प्रक्रिया के रूप में मानवतावाद अधिभौतिक मुद्दों जैसे कि अलौकिक अस्तित्त्व की मौजूदगी या ग़ैर मौजूदगी पर विचार नहीं करता. मानवतावाद जो कुछ मानवीय है उससे सम्बद्ध है।[51]

आशावाद[संपादित करें]

समकालीन मानवतावाद व्यक्तियों की क्षमता के बारे में सीमित आशावाद को अपरिहार्य मानता है लेकिन इसमें यह विश्वास करना शामिल नहीं है कि मनुष्य की प्रकृति पूर्ण रूप से अच्छी है या यह कि सभी लोग मदद के बिना मानववादी आदर्शों के अनुरूप आचरण कर सकते हैं। यदि कुछ है तो यह मान्यता कि अपनी क्षमता के अनुरूप रहने के लिए कठिन परिश्रम है और इसमें दूसरों की सहायता की आवश्यकता होती है। अंतिम लक्ष्य मानवीय सम्पन्नता है; जीवन को सभी इंसानों के लिए बेहतर बनाना है और सबसे चैतन्य प्राणी होने के कारण दूसरे चेतन जीवों के कल्याण को और सम्पूर्णता में पूरे ग्रह के हित को बढ़ावा देना है। ध्यान भलाई करने और यहाँ पर और अभी अच्छी तरह जीवन बिताने पर केन्द्रित है और बाद में आने वालों के लिए दुनिया को एक बेहतर जगह बनाकर छोड़ जाना है। 1925 में, अंग्रेजी गणितज्ञ और दार्शनिक अल्फ्रेड नार्थ व्हाइट चेताया: "फ्रांसिस बेकन की भविष्यवाणी अब सत्य हो चुकी है; और एक ज़माने में स्वयं को देवदूतों के लगभग समकक्ष समझने वाले मनुष्य ने अब प्रकृति के सेवक तथा पालक के रूप में रहना स्वीकार कर लिया है। अभी यह देखा जाना बाक़ी है कि क्या एक पात्र दोनों ही भूमिकाओं को निभा सकता है या नहीं.[52]

मानवतावाद (जीवन दृष्टि)[संपादित करें]

मानवतावाद (ह्यूमनिज्म, कैपिटल "एच", "सेक्युलर" जैसा कोई विशेषण नहीं)[53] एक सम्पूर्ण जीवन दृष्टि है जो मानवीय तर्क, नैतिकता और न्याय का समर्थन करती है और अलौकिकवाद, छद्मविज्ञान और अंधविश्वास को नकारती है। कई मानवतावादी अपने नैतिक नियम नैतिक प्रकृतिवाद के दर्शन से लेते हैं और कुछ नैतिकता के विज्ञान को स्वीकार करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी और नैतिकता संघ (द इंटरनेशनल ह्युमनिस्ट एंड एथिकल युनियन) (आईएचईयू) 40 से ज्यादा देशों में 100 से अधिक मानवतावादी, तर्कवादी, धर्मनिरपेक्ष, नैतिक संस्कृति और मुक्तविचार वाले संगठनों का विश्व स्तरीय संघ है। प्रसन्न मानव आईएचईयू का आधिकारिक प्रतीक है, साथ ही साथ यह खुद को मानवतावादी (Humanists) ("humanists" के विपरीत) कहने वालों का एक सार्वभौमिक मान्यता प्राप्त प्रतीक माना जाता है। 2002 में आईएचईयू की जनरल एसेम्बली ने एकमत से एम्सटरडम घोषणा-पत्र 2002 को अंगीकार किया जो विश्व मानवतावाद की आधिकारिक परिभाषा देने वाले वक्तव्य का प्रतिनिधित्त्व करता है।[54]

आईएचईयू उपनियम 5.1[55] के अंतर्गत आईएचईयू के सभी सदस्य संगठनों को मानवतावाद पर आईएचईयू के न्यूनतम वक्तव्य को स्वीकार करना आवश्यक है:

मानवतावाद एक लोकतान्त्रिक और नैतिक जीवन दृष्टि है जो पुष्टि करती है कि मनुष्यों के पास अपने जीवन को अर्थ और आकार देने का अधिकार और उत्तरदायित्त्व है। यह तर्क की भावना में मानवीय और दूसरे प्राकृतिक मूल्यों पर आधारित नैतिकता और मानवीय क्षमताओं के माध्यम से मुक्त अन्वेषण के ज़रिये एक अधिक मानवीय समाज के निर्माण का समर्थन करती है। यह आस्तिक नहीं है और यह वास्तविकता संबंधी अलौकिक दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं करता है।

बहस की कला (पोलेमिक्स)[संपादित करें]

मानवतावाद के बारे में बहस की कला ने कभी-कभी विरोधाभासी तर्क-वितर्क की कल्पना की है। बीसवीं सदी के शुरुआती आलोचक जैसे कि एजरा पाउंड, टी. ई. हुल्मे और टी. एस. इलियट ने मानववाद के एक भावनात्मक "ढलान" (हुल्मे) या ज़रूरत से ज्यादा नारी सुलभ (पाउंड)[56] होने का विचार रखा और अधिक पुरुषोचित, सत्तावादी समाज की ओर लौटने की इच्छा जताई, जैसा कि (उनका मानना था) मध्य काल में अस्तित्त्व में था। "उत्तर आधुनिक" आलोचक जो स्व-घोषित मानवतावाद विरोधी हैं, जैसे कि जीन फ्रंकोइस ल्योटार्ड और मिशेल फ़ौकौल्त ने दावा किया है कि मानवतावाद, मानवीयता या सार्वभौम मानव प्रकृति की पहुँच से परे और अत्यंत अमूर्त धारणा का विचार करता है, जिसको साम्राज्यवाद के छल के लिए और मानव से कमतर समझे जाने वालों पर प्रभुत्व के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दार्शनिक केट सोपर[57] ध्यान दिलाते हैं कि अपने सद्भावपूर्ण आदर्शों तक न पहुँच सकने के लिए मानवतावाद की कमी बताकर मानवतावाद विरोधी इस तरह अक्सर एक "मानवीय शब्दाडम्बर स्त्रावित" करते हैं।[58] अपनी पुस्तक हयुमनिज्म (1997) में टोनी डेवीस इन आलोचकों को "मानवतावाद-विरोधी मानवतावादी" कहकर संबोधित करते हैं। मानवतावाद विरोधियों के आलोचक, विशेषकर जुरगेन हेबरमास जवाबी तर्क देते हैं कि हालांकि मानवतावाद विरोधी मानवतावादियों के अपने मुक्तिदायी आदर्शों को पूरा न कर पाने की नाकामी पर ध्यान दिला सकते हैं लेकिन वे स्वयं अपनी कोई वैकल्पिक मुक्तिदाई परियोजना नहीं प्रस्तुत करते हैं।[59] दूसरे, जैसे जर्मन दार्शनिक हीदेगर प्राचीन यूनानी मॉडल पर स्वयं को मानवतावादी समझते थे लेकिन उनका विचार था कि मानवतावाद केवल जर्मन जाति और विशेष रूप से नाजियों पर ही लागू होता था और इस तरह डेवीस के शब्दों में वे मानवतावाद-विरोधी मानवतावादी थे।[60] डेवीस यह स्वीकार करते हैं कि बीसवीं सदी के युद्धों के भयंकर अनुभवों के बाद "गलतियों और वहशीपन जो वे अपने पीछे लेकर आते हैं, के शीघ्र बोध के बिना मनुष्य का प्रारब्ध या मानवीय तर्कों की विजय जैसे मुहावरे गढ़ना अब संभव नहीं हो सकेगा." क्योंकि "किसी ऐसे अपराध की कल्पना करना भी असंभव है जो मानव तर्क के नाम पर नहीं किया गया हो. फिर भी वह आगे कहते हैं "ऐतिहासिक मानवतावादियों द्वारा ग्रहण किये गए मैदान को छोड़ देना भी अविवेकपूर्ण होगा. क्योंकि मानवतावाद कई अवसरों पर धर्मान्धता और उत्पीड़न के लिए अकेला मौजूद विकल्प होता है। बोलने और लिखने की आज़ादी और व्यक्तिगत या सामूहिक हितों के पक्ष में अभियान, विरोध और अवज्ञा: इन सभी को मानवतावादी शब्दों में ही साफ़ तौर पर अभिव्यक्त किया जा सकता है।"[61]

अन्य स्वरूप[संपादित करें]

शैक्षणिक मानवतावाद[संपादित करें]

मानवतावाद शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रवाह के रूप में 19वीं सदी में अमेरिकी स्कूल प्रणालियों पर हावी होने लगा। इसका मानना यह था कि मानव बुद्धि का विकास करने वाले अध्ययन वे हैं जो मनुष्यों को "सबसे अधिक सही मायने में मनुष्य" बनाते हैं। इसके लिए व्यावहारिक आधार संकाय मनोविज्ञान या विशिष्ट बौद्धिक संकायों में विश्वास था जैसे कि विश्लेषणात्मक, गणितीय, भाषाई आदि। एक संकाय को मजबूत बनाना अन्य संकायों को भी फ़ायदा पहुँचाने वाला माना जाता था (प्रशिक्षण का हस्तांतरण). 19वीं-सदी के अंत में शैक्षणिक मानवतावाद के एक महत्वपूर्ण शाहकार थे अमेरिकी शिक्षा आयुक्त विलियम टोरी हैरिस, जिनके "फाइव विंडोज ऑफ द सोल" (गणित, भूगोल, इतिहास, व्याकरण और साहित्य/कला) को "संकायों के विकास" के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता था। टेरी ईगलटन जैसे मार्क्सवादियों ने कुछ नाजी यातना शिविर के रक्षकों के परिष्कृत सांस्कृतिक स्वाद को इंगित करते हुए इस तरह के विचारों की आलोचना की है।

समग्र मानवतावाद[संपादित करें]

मानवतावाद उत्तरोत्तर हमारी प्रजातियों, धरती और जीवन की एक समग्र संवेदनशीलता को दर्शाता है। व्यक्ति की जीवन दृष्टि के संबंध में आईएचईयू की परिभाषा को बनाए रखते हुए समग्र मानवतावाद मानव की उदारता की शक्तियों और दायित्वों पर विचार करने के लिए मनुष्यों (होमो सेपियेंस) के बीच अपने क्षेत्र को व्यापक बनाता है।

यह स्वीकार करने योग्य दृष्टिकोण पुनर्जागरण मानवतावाद की ओर वापसी करता है जिसमें यह शासन प्रणाली की ओर मानवतावादियों की पक्षधरता की भूमिका की पूर्व कल्पना करता है और यह अति सक्रिय जीवन दृष्टि की बराबरी के उत्तरदायित्त्व से लबालब है जो व्यक्तिगत मानवतावाद से आगे हैं। यह प्रदूषण, सैन्यवाद, राष्ट्रवाद, सेक्सवाद, निर्धनता और भ्रष्टाचार को हमारी प्रजातियों के हितों से असंगत, मानवीय चरित्र के स्थाई और ध्यान देने योग्य मुद्दों के रूप में पहचान करता है। यह जोर देकर कहता है कि मानवीय शासन प्रणाली एकीकृत होनी चाहिए और यह समग्र है, जिसमें यह किसी व्यक्ति को महज़ उसके अनुषांगिक विश्वासों के तर्क के आधार पर अलग नहीं करता है। इसे अपने आप में अघोषित मानवतावाद का पात्र कहा जा सकता है जो मनुष्य के व्यक्तिगत सिद्धांतों की पूर्ति करने के लिए प्रजाति के सिद्धांतों और विश्वासों की शिक्षा देता है।

यह समकालीन अमेरिकी और ब्रिटिश मानवतावाद के विपरीत है जिनकी प्रवृत्ति धर्म पर इस सीमा तक केन्द्रित रहने की है कि इन समाजों में अक्सर और विशेषकर नए अनुयाइयों द्वारा "मानवतावाद" को सामान्य नास्तिकता के समतुल्य रखा जाता है। एकल अविश्वास के साथ इस अत्यान्तिक पहचान करने को संभवतः अब मानवतावाद के व्यापक और योग्य अंगीकरण को हटाकर मानवता की सबसे मूल्यवान और संभावनाओं से पूर्ण बौद्धिक परंपराओं में से एक की अनुचित काट-छांट के रूप में देखा जा रहा है।

ड्वाइट गिल्बर्ट जोन्स लिखते हैं कि मानवतावाद हमारी प्रजातियों द्वारा पूरी तरह से अंगीकार किया जा सकने वाला अकेला दर्शन हो सकता है - इसलिए समग्र मानवतावादियों द्वारा अपने संभावी अनुयायियों पर ना तो बेबुनियाद और स्वार्थी शर्तें लगाना उचित है और ना ही इसको धार्मिक उग्रता से जोड़ना.[62]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • मानवतावादियों की सूची
  • प्राकृतिक अधिकार

सिद्धान्त और दर्शन शास्त्र से संबंधित[संपादित करें]

संगठन[संपादित करें]

  • अमेरिकन ह्युमनिस्ट एसोसिएशन
  • ब्रिटिश ह्युमनिस्ट एसोसिएशन
  • धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद के लिए काउंसिल
  • नैतिक संस्कृति
  • यूरोपीय ह्युमनिस्ट फेडरेशन
  • ह्यूमन-एटिस्क फॉरबाउंड, नार्वे ह्युमनिस्ट एसोसिएशन
  • कनाडा के ह्युमनिस्ट एसोसिएशन
  • आयरलैंड के ह्युमनिस्ट एसोसिएशन
  • मानवतावादी अंतर्राष्ट्रीय
  • मानवतावादी गतिविधि
  • स्कॉटलैंड के मानवतावादी समाज
  • ह्यूमेनिस्टेरना, स्वीडिश ह्युमनिस्ट एसोसिएशन
  • मानवतावादी अध्ययन के लिए संस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी और नैतिक संघ (आईएचइयू)
  • उत्तरी पूर्व मानवतावादी, यूनाइटेड किंगडम में सबसे बड़ा क्षेत्रीय मानवतावादी समूह
  • अंतर्राष्ट्रीय रेशनलिस्ट
  • सिडमेंट, आइसलैंडिक एथिकल मानवतावादी एसोसिएशन
  • ह्यूमेनिस्टिक यहूदी धर्म के लिए सोसायटी

अन्य[संपादित करें]

  • मानवतावाद विरोधी
  • समुदाय आयोजन
  • मानवतावादी मनोविज्ञान
  • मानव-द्वेष
  • सामाजिक मनोविज्ञान
  • स्पीसिज्म
  • दस धर्मादेशों के विकल्प - दस धर्मादेशों के धर्मनिरपेक्ष और मानवतावादी विकल्प

टिप्पणियां[संपादित करें]

  1. Edwords, Fred (1989). "What Is Humanism?". American Humanist Association. http://www.americanhumanist.org/who_we_are/about_humanism/What_is_Humanism. अभिगमन तिथि: 19 अगस्त 2009. "Secular and Religious Humanists both share the same worldview and the same basic principles... From the standpoint of philosophy alone, there is no difference between the two. It is only in the definition of religion and in the practice of the philosophy that Religious and Secular Humanists effectively disagree." 
  2. Compact Oxford English dictionary. Oxford University Press. 2007. "humanism n. 1 a rationalistic system of thought attaching prime importance to human rather than divine or supernatural matters. 2 a Renaissance cultural movement that turned away from medieval scholasticism and revived interest in ancient Greek and Roman thought."  कभी-कभी इस परिभाषा का संक्षेपण #1 को छोड़कर सभी अर्थों को मिटा देता है, जैसे कि कैम्ब्रिज एडवांस्ड लर्नर्स डिक्शनरी, कॉलिन्स एसेंशियल इंग्लिश डिक्शनरी और Webster's Concise Dictionary. New York: RHR Press. 2001. पृ॰ 177. 
  3. "Definitions of humanism (subsection)". Institute for Humanist Studies. http://humaniststudies.org/humphil.html. अभिगमन तिथि: 16 Jauary 2007. 
  4. उदाहरण के लिए, पोपुलोरम प्रोग्रेसियो, सेक्शन 42: "वास्तविक मानवतावाद ईश्वर की ओर जाने वाले रास्ते की ओर इंगित करता है और उस कार्य के बारे में बताता है जिसके लिए हमें बुलाया गया है, वह कार्य जो हमें मानव जीवन का असली अर्थ प्रदान करता है। आदमी, आदमी की अंतिम नियति नहीं है। आदमी केवल अपने आप से परे होकर ही सही मायनों में आदमी बनता है। पास्कल के शब्दों में: 'मनुष्य अनंत रूप से मनुष्य से बढ़कर है।' "इसके अलावा सीएफ. कैरिटास इन वेरिटेट, सेक्शन 78: "केवल अगर हम ईश्वर के बेटे और बेटियों के रूप में उनके परिवार का हिस्सा बनने के लिए व्यक्तियों के रूप में और एक समुदाय के रूप में अपने बुलाये जाने के बारे में जान लेते हैं तो क्या हम एक नयी दृष्टि पैदा करने और वास्तव में एक अभिन्न मानवतावाद की सेवा के लिए एक नई ऊर्जा जुटाने में सक्षम होंगे. तब विकास के लिए सबसे बड़ी सेवा एक ईसाई मानवतावाद है।"
  5. जैसा कि रिचर्ड ए. लैनहम द्वारा लिखित लिटरेसी एंड द सर्वाइवल ऑफ ह्यूमनिज्म (न्यू हेवेन: येल यूनिवर्सिटी प्रेस, 1983) में या जैसा कि "वैज्ञानिकों" और "मानवतावादियों" (यानी मानवता के शिक्षकों) के बीच अक्सर किये गए विरोध में है।
  6. जैसा कि जे. ए. साइमंड्स ने टिप्पणी की है, "ह्यूमनिज्म शब्द में एक जर्मन ध्वनि है और वास्तव में यह आधुनिक है" (देखें द रिनेसां इन इटली अंक 2:71एन, 1877) विटो गुस्तिनियानी लिखते हैं कि जर्मन-भाषी दुनिया में "ह्युमनिस्ट " ने अपने विशिष्ट अर्थ (उत्कृष्ट साहित्य के विद्वान के रूप में) को कायम रखते हुए "अगले व्युत्पन्न शब्दों को जन्म दिया, जैसे कि हुमनिस्टिश उनके लिए जो बाद में हुमनिस्टिश जिम्नेसियन कहलाये गए, जिनके शिक्षण के मुख्य विषय लैटिन और ग्रीक थे (1784). अंत में ह्युमनिस्मस को 'सामान्य पारंपरिक शिक्षा' (1808) को और अभी भी युग के लिए बाद में और पंद्रहवीं सदी के इतालवी मानवतावादियों की उपलब्धियों (1841) को निरूपित करने के लिए पेश किया गया था। यह कहना होगा कि "पारंपरिक शिक्षा" के लिए "मानवतावाद" सबसे पहले जर्मनी में सामने आया जहाँ इसे एक बार और सभी के लिए इस अर्थ में जॉर्ज वोइट (1859) द्वारा स्वीकृत किया गया, विटो गुइस्तिनियानी, "होमो, ह्युमानस और ह्यूमनिज्म के अर्थ में" जर्नल ऑफ द हिस्ट्री ऑफ आइडियाज 46 (वॉल्यूम 2, अप्रैल से जून, 1985): 172.
  7. Ephémérides du citoyen ou Bibliothèque raisonée des sciences morales et politiques की समीक्षा से निम्न को प्राप्त किया गया, “L’amour général de l’humanité ... vertu qui n’a point de nom parmi nous et que nous oserions appler ‘humanisme’, puisque’enfin il est temps de créer un mot pour une chose si belle et nécessaire "; (अध्याय 16, 17 दिसम्बर 1765): पृष्ठ 247, V. गुइस्तिनियानि में उद्धृत, ओप. सिट., पृष्ठ 175एन.
  8. हालांकि रूसो स्वयं श्रद्धापूर्वक एक व्यक्तिगत ईश्वर में विश्वास करते थे, उनकी पुस्तक, Emile: or, On Education, यह दिखाने की कोशिश करती है कि नास्तिक भी धार्मिक हो सकते हैं। इसे सार्वजनिक रूप से जला दिया गया था। क्रांति के दौरान जैकबिंस ने रूसो के सुझाव के अनुरूप सर्वोत्कृष्ट जीव (सुप्रीम बीइंग) के एक पंथ की स्थापना की थी। 19वीं शताब्दी में फ्रांसीसी प्रत्यक्षवादी दार्शनिक अगस्टे कॉम्ते (1798-1857) ने एक "मानवता के धर्म" की स्थापना की जिसके कैलेंडर और धार्मिक शिक्षाएं पूर्व क्रांतिकारी पंथ में प्रतिध्वनित होती रहीं. देखें कॉम्तिज्म
  9. The Oxford English Dictionary. VII (2nd सं॰). Oxford: Clarendon Press. 1989. पृ॰ 474–475. 
  10. "Ma conviction intime est que la religion de l’avenir sera le pur humanisme, c’est-à-dire le culte de tout ce qui est de l’homme, la vie entière santifiée et éléve a une valeur moral.”, गुइस्तिनियानि में उद्धृत, ओप. सिट.
  11. एक आधुनिक धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद की विचारधारा से मानवतावाद (ह्यूमनिज्म) शब्द के अर्थ के विकास का एक उदाहरण निकोलस वाल्टर के ह्यूमनिज्म (Humanism)  – व्हाट इज इन द वर्ड (लंदन: रेशनलिस्ट प्रेस एसोसिएशन, 1997 आईएसबीएन 0-301-97001-7) में पाया जा सकता है। उसी दृष्टिकोण से, लेकिन कुछ हद तक कम विवादात्मक उदाहरण रिचर्ड नॉर्मन के ऑन ह्यूमनिज्म (थिंकिंग इन एक्शन) (लंदन: रूटलेज: 2004) में पाया जा सकता है। एक ऐतिहासिक और भाषा-शास्त्र उन्मुख विचारधारा के लिए ऊपर उद्धृत विटो गुइस्तिनियानि, "होमो, ह्युमेनस, एंड द मीनिंग्स ऑफ ह्यूमनिज्म" (1985) को देखें.
  12. Potter, Charles (1930). Humanism A new Religion. Simon and Schuster. पृ॰ 64–69. 
  13. "Lesson 1: A brief history of humanist thought". Introduction to Humanism: A Primer on the History, Philosophy, and Goals of Humanism. The Continuum of Humanist Education. http://humanisteducation.com/class.html?module_id=1&page=1. अभिगमन तिथि: 21 अगस्त 2009. 
  14. Johnson, Paul (2000). The Renaissance. New York: The Modern Library. पृ॰ 32–34 and 37. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-679-64086-X. 
  15. Johnson, Paul (2000). The Renaissance. New York: The Modern Library. प॰ 37. 
  16. बाद के पुनर्जागरण संबंधी इतिहास लेखन पर जैकब बर्कहार्ट की सांस्कृतिक इतिहास की क्लासिक विशिष्ट कृति, द सिविलाइजेशन ऑफ द रिनेसां इन इटली (1860) का प्रभाव वालेस के. फर्ग्यूसन की द रिनेसां इन हिस्टोरिकल थॉट: फाइव सेंतुरीज ऑफ हिस्टोरिकल इंटरप्रेटेशन (1948) में देखा जा सकता है।
  17. उदाहरण के लिए जैकब बर्कहार्ट द्वारा 1860 में पूर्व स्थापित के साथ एक पूर्ण अंतराल के रूप में पुनार्जगारण की 19वीं सदी की सुदृढ़ व्याख्या (या मिथक) का अनुपालन करते हुए कैम्ब्रिज डिक्शनरी ऑफ फिलॉसफी पारंपरिक रचनाओं की दुबारा-खोज के मुक्तिकारक प्रभावों का वर्णन इस तरह करता है:

    यहाँ मानव मन पर किसी ने भक्ति और निष्ठा की मांग के अलौकिक दबाव का कोई वजन महसूस नहीं किया। मानवता - अपनी सभी विशिष्ट क्षमताओं, प्रतिभाओं, चिंताओं, समस्याओं, संभावनाओं के साथ - अभिरुचि का केंद्र था। यह कहा गया है कि मध्ययुगीन विचारकों ने अपने घुटनों झुककर दार्शनिक चिंतन किया, लेकिन नए अध्ययनों से उन्हें बल मिला और उन्होंने अपनी पूरी क्षमता के साथ खड़े होने और आगे बढ़ने का साहस किया। “Humanism”। "The Cambridge Dictionary of Philosophy, Second Edition। (1999)। Cambridge University Press।

  18. युमनिस्ता शब्द स्टडिया ह्युमनिटेटिस के पुनरुद्धार से जुदा हुआ था जिसमें ग्रैमेटिका, रेटोरिका, कविता, हिस्टोरिया और फिलोसोफिया मोरैलिस को शामिल किया गया था क्योंकि इन शब्दों को समझ लिया गया था। अठारहवीं सदी के उदारवादी कला के विपरीत उन्होंने दृश्य कला (विजुअल आर्ट), संगीत, नृत्य, या बागवानी को शामिल नहीं किया था। मानविकी उन विषयों को भी शामिल करने में नाकाम रहा जो बाद में मध्य युग के दौरान और संपूर्ण नवजागरण में विश्वविद्यालयों में शिक्षा की प्रमुख विषय वस्तुएं थीं जैसे कि धर्मशास्त्र, न्यायशास्त्र और चिकित्सा और नैतिकता से अलग दार्शनिक विषय, जैसे तर्क, प्राकृतिक दर्शन और तत्त्वमीमांसा (मेटाफिजिक्स). दूसरे शब्दों में जैसा कि अक्सर माना जाता है, मानवता पुनर्जागरण संबंधी समस्त विचारों और शिक्षा के कुल योग का नहीं बल्कि यह केवल इसके एक अच्छी तरह से परिभाषित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। मानवतावाद का मानविकी में अपना एक उचित डोमेन या गृह क्षेत्र है जबकि शिक्षा, दर्शन सहित (नैतिकता के अलावा) के अन्य सभी क्षेत्रों ने अपने स्वयं के पाठ्यक्रम, मोटे तौर पर अपनी मध्ययुगीन परंपरा द्वारा निर्धारित और नई टिप्पणियों, समस्याओं या सिद्धांतों के माध्यम से अपने स्थिर परिवर्तन का अनुकरण किया। इन विषयों पर मानवतावाद का प्रभाव मुख्यतः बाहर से और एक अप्रत्यक्ष तरीके से, हालांकि अक्सर काफी दृढ़ता से पड़ा."पॉल ऑस्कर क्रिस्टलर, ह्यूमनिज्म, पृष्ठ 113-114, चार्ल्स बी श्मिट, क्वेंटिन स्किनर (एडिटर्स) में, द कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ रिनेसां फिलॉसफी (1990).
  19. उनकी संबंधित प्रविष्टियों को सर जॉन हेल के कॉन्साइज एनसाइकलोपीडिया ऑफ द इटालियन रिनेसां (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1981) में देखें.
  20. बाद की पीढ़ियों के लिए डच मानवतावादी, डेसिडेरियस इरास्मस ने इस सामंजस्य की प्रवृत्ति को एक प्रतीक बनाया). स्टैनफोर्ड एनसाइकलोपीडिया ऑफ फिलॉसफी के अनुसार "ज्ञानोदय संबंधी विचारकों ने इरास्मस को (काफी सटीकता से नहीं) आधुनिक बौद्धिक स्वतंत्रता के अग्रदूत और प्रोटेस्टेंट एवं कैथोलिक दोनों रिवाजों के दुश्मन के रूप में याद किया।इरास्मस स्वयं काब्बाला में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते थे लेकिन कई अन्य मानवतावादियों, उल्लेखनीय रूप से पिको डेला मिरान्डोला को इसमें दिलचस्पी थी। (क्रिश्चियन काब्बाला को देखें.)
  21. Bergin, Thomas; Speake, Jennifer (1987). The Encyclopedia of the Renaissance. Oxford: Facts On File Publications. पृ॰ 216–217. 
  22. पिको डेला मिरान्डोला के नौ सौ थीसिस में से केवल तेरह को उनकी जाँच करने वाले पोप आयोग द्वारा धर्मशास्त्र की दृष्टि से आपत्तिजनक समझा गया था।.. [यह] बताता है कि उनकी बौद्धिक अक्षमताओं के लिए उनके एपोलोजिया में सार्वजनिक रूप से व्यक्त उनकी अवमानना के बावजूद, क्युरियल अधिकारियों ने इन थीसिस को शायद ही लूथर या केल्विन जैसे खतरनाक धार्मिक आधुनिकतावादियों की रचनाओं के सामान देखा था। हालांकि वे अपरंपरागत थे और उनमें उठाये गए अधिकांश मुद्दे सदियों से और आयोग के लिए धार्मिक विवाद का विषय रहे थे।.. उनकी निंदा अन्वेषणों के लिए नहीं बल्कि गैर ईसाई दार्शनिकों की कई त्रुटियों को पुनर्जीवित करने" के लिए की गयी जो पहले से ही अमान्य और अप्रचलित हैं। डेवीस (1997), पृष्ठ 103
  23. रिचर्ड एच. पोप्किन (संपादक), दी कोलंबिया हिस्ट्री ऑफ वेस्टर्न फिलोसॉफी (1998), पी. 293 और पी. 301.
  24. 100 साल से अधिक समय पहले डिवाइन कॉमेडी (1308-1321 ई.) में दांते ने कॉनस्टेंटाइन के डोनेशन (जिसे उन्होंने सच के रूप में स्वीकार किया) को एक बड़ी भूल और चर्च के भ्रष्टाचार सहित इटली की सभी राजनीतिक और धार्मिक समस्याओं का कारण कहकर निर्देशित किया। हालांकि दांते ने गरजते हुए इस विचार का विरोध किया कि चर्च के पास लौकिक के साथ-साथ अलौकिक शक्तियाँ हो सकती थीं, यह धारणा उस समय तह रही जब वाला ने निर्णायक रूप से यह साबित कर दिया कि ऐसी शक्तियों के लिए कानूनी औचित्य अवैध था।
  25. विडंबना यह है कि एक मानवतावादी विद्वान, इसहाक कासौबोन ने ही 17वीं सदी में भाषाशास्त्र का उपयोग यह बताने के लिए किया कि कॉर्पस हर्मेटिकम बहुत प्राचीन नहीं था जैसा कि चौथी सदी में, लेकिन ईसाई युग से दिनांकित, संत अगस्टीन और लैक्टेंशियस ने इसके बारे में दावा किया था। देखें एंथोनी ग्राफ्टन, डिफेंडर्स ऑफ द टेक्स्ट: द ट्रेडिशंस ऑफ स्कॉलरशिप इन एन एज ऑफ साइंस, 1450-1800 (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1991).
  26. “Humanism”। Encyclopedic Dictionary of Religion F-N: 1733। (1979)। Corpus Publications।"पुनर्जागरण संबंधी मानवतावादियों ने अधिक प्राचीन दर्शन और ईसाई सच्चाइयों की पारस्परिक अनुकूलता का फ़ायदा उठाया", एम.ए. स्क्रीच, लाफ्टर एट द फूट ऑफ द क्रॉस (1997), पृष्ठ 13.
  27. मेनांडर द्वारा लिखित एक यूनानी कॉमेडी (न्यू लॉस्ट) से रूपांतरित या उधार स्वरूप लिये गए एक नाटक के इस कथन की उत्पत्ति संभवतः हल्के अंदाज में - एक बूढ़े आदमी की दखल के लिए एक हास्य संबंधी तर्क के रूप में - हुई थी लेकिन यह तुरंत एक कहावत बन गया और इसे कई युगों तक सिसरो एवं संत अगस्टीन जैसी कुछ शख्सियतों और सबसे अधिक उल्लेखनीय रूप से सेनेका द्वारा एक गहरे अर्थ के साथ उद्धृत किया गया था। रिचर्ड बाउमेन लिखते हैं: "होमो सम: हमानी निहिल ए मी एलियेनम पुटो., मैं एक आदमी हूँ: और मैं यह समझता हूँ कि आदमी से संबंधित कुछ भी मेरे लिए अजनबी नहीं है।' हास्य नाटककार पी. टेरेंशियस आफ्टर के शब्द दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के मध्य और उससे आगे पूरी रोमन दुनिया में प्रतिध्वनित होते रहे. एक अफ्रीकी और एक पूर्व दास को टेरेंस को सार्वभौमिकता, मानव जाति की अनिवार्य एकता के संदेश, जो यूनानियों से दार्शनिक स्वरूप में नीचे आ गया था लेकिन एक व्यावहारिक वास्तविकता बनने के क्रम में रोम के तथ्यात्मक शक्तियों की जरूरत थी, का उपदेश देने के लिये काफी सम्मान दिया गया था। मानव अधिकारों के बारे में रोमन विचारों पर टेरेंस के परम सुखी वाक्यांश के प्रभाव को शायद ही वास्तविकता से अधिक समझा जा सकता है। दो सौ साल बाद सीनेका ने एक क्लेरियन-कॉल के साथ मानवता की एकता के लिये अपने मौलिक प्रदर्शन को समाप्त कर दिया:

    एक संक्षिप्त नियम है जिसके जरिये मानवीय रिश्तों को विनियमित करना चाहिए. दिव्य और मानवीय, जो कुछ भी आप देखते हैं, दोनों एक ही है। हम सभी एक ही महान शरीर के हिस्से हैं। प्रकृति ने हमें एक ही स्रोत से और एक ही में समाप्त होने के लिये बनाया है। उसने हामरे दिल में आपसी स्नेह और सुशीलता का भाव दिया है, उसने हमें निष्पक्ष और सच के साथ रहना, चोट पहुँचाने की बजाय इसे सहना सिखाया है। वह हमसे मदद की जरूरत पड़ने सभी के लिये आगे बढ़ने और हाथ बढ़ाने की अपेक्षा रखती है। आओ उस प्रसिद्ध पंक्ति को अपने दिल में और अपने होठों पर बिठा लें: होमो सम, हमानी निहिल ए मी एलियेनाम पुटो ." -- बाउमैन, ह्यूमन राइट्स इन एन्सियेंट रोम, रूटलेज क्लासिकल मोनोग्राफ्स, 1999 पृष्ठ 1).

  28. एसी क्रोम्बी, साइंस, आर्ट एंड नेचर इन मेडाइवल एंड मॉडर्न थॉट (1996) में हिस्टोरियंस एंड द साइंटिफिक रिवोल्यूशन, पृष्ठ 456.
  29. Gottlieb, Anthony (2000). The Dream of Reason: a history of western philosophy from the Greeks to the Renaissance. New York: W. W. Norton & Company. पृ॰ 410–411. 
  30. Alleby, Brad। (2003)। “Humanism”। Encyclopedia of Science & Religion (2nd) 1: 426–428। Macmillan Reference USA।
  31. पी.ओ. क्रिस्टेलर (ओप सिट.), पृष्ठ 114.
  32. ओएस गिनीज - द डस्ट ऑफ डेथ (इंटरवर्सिटी प्रेस 1973), पृष्ठ 5
  33. टोनी डेवीस ह्यूमनिज्म (रूटलेज, 1997) पृष्ठ 26-27.
  34. इन ला कंडीशन पोस्टमोर्डेन
  35. डेवीस (1997), पृष्ठ 27.
  36. आइबिड, पृष्ठ 28
  37. डेवीस में उद्धृत (1997), पी. 27.
  38. डेवीस के अनुसार, "कॉम्ते का पंथनिरपेक्ष धर्म मानवीय करुणा का एक अस्थिर प्रवाह नहीं है बल्कि यह ईसाइयों की पूजा विधि और संस्कारों के साथ धारणा और रिवाजों, पुरोहिताई और पोंटिफ़, मानवता की सार्वजनिक पूजा के आसपास सभी संगठित, नोव्यू ग्रांड-एट्रे सुप्रीम (नयाँ सर्वोपरि महान जीव) है, जिसे बाद में ग्रांड फेटिश (पृथ्वी) और ग्रांड मिलियु (भाग्य) द्वारा एक प्रत्यक्षवादी त्रिमूर्ति में अनुपूरित किया गया।" पृष्ठ 28-29), मानवता के बारे में कॉम्ते की सख्त और "कुछ हद तक निराशाजनक" दर्शन को अलग से एक उदासीन ब्रह्मांड में देखा गया (जिसकी व्याख्या केवल "सकारात्मक" विज्ञान द्वारा ही की जा सकती है) और कहीं भी जाने के लिये नहीं बल्कि एक दूसरे के लिये, चार्ल्स डार्विन या कार्ल मार्क्स के सिद्धांतों की तुलना में विक्टोरियाई इंग्लैंड में कही अधिक प्रभावशाली था।
  39. आइबिड, पृष्ठ 29
  40. Morain, Lloyd and Mary (2007). Humanism as the Next Step. Washington, D.C.: Humanist Press. पृ॰ 109. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-931779-16-2. Archived from the original on 2009-03-19. http://web.archive.org/web/20090319202656/http://www.americanhumanist.org/publications/Hum_as_the_Next_Step.pdf. 
  41. "History: New York Society for Ethical Culture". New York Society for Ethical Culture. 2008. http://www.nysec.org/sitemap/about-ethical-culture/history/. अभिगमन तिथि: 2009-03-06. 
  42. "Ethical Culture". American Ethical Union. Archived from the original on 2012-02-15. http://web.archive.org/web/20120215123502/http://aeu.org/library/articles/Ethical_Culture.pdf. अभिगमन तिथि: 2009-02-23. 
  43. Stringer-Hye, Richard. "Charles Francis Potter". Dictionary of Unitarian and Universalist Biography. Unitarian Universalist Historical Society. http://wWorldWarII5.uua.org/uuhs/duub/articles/charlesfrancispotter.html. अभिगमन तिथि: 2008-05-01. 
  44. अमेरिकन ह्युमनिस्ट एसोसिएशन
  45. Wilson, Edwin H. (1995). The Genesis of a Humanist Manifesto. Amherst, NY: Humanist Press.  यह पुस्तक 1853 में स्थापित ह्युमनिस्टिक रिलीजियस एसोसिएशन ऑफ लंदन के संविधान को यह कहते हुए उद्धृत करता है, "हमें एक प्रगतिशील धार्मिक शरीर में बनाने में, हमने यह बताने के लिये 'ह्युमनिस्टिक रिलीजियस एसोसिएशन' के नाम को अपनाया है कि धर्म मनुष्य में निहित एक सिद्धांत है और यह अधिक से अधिक पूर्णता की ओर उसके विकास का साधन है। हमने स्वयं को प्राचीन अनिवार्य रिवाजों, मिथकों और एशिया से उधार स्वरूप लिये गए पुराने और हमारे युग के शासकीय चर्च अब तक व्यापक रूप से मौजूद समारोहों से बंधनमुक्त किया है।
  46. Kurtz, Paul (1995). Living Without Religion: Eupraxophy. Amherst, NY: Prometheus Books. प॰ 8. 
  47. टोरकासो वी. वेट्किंस (1961)
  48. वैश्विक समन्वयक निकाय, इंटरनेशनल ह्युमनिस्ट एंड एथिकल यूनियन, लंदन "मानवतावाद" (Humanism) का इस्तेमाल किसी भी योग्यता संबंधी विशेषण के बगैर और कैपिटल "एच" के साथ करने का सुझाव देता है जो विद्वतापूर्ण अध्ययन और प्रदर्शन की एक सदी के तीन तिमाहियों के बाद एक स्पष्ट रूप से सुपरिभाषित विश्वदृष्टि में फिट बैठता है। Baggini, Julian (2003). Atheism: A Very Short Introduction. Oxford: Oxford University Press. पृ॰ 3–4. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-19-280424-3. "The atheist's rejection of belief in God is usually accompanied by a broader rejection of any supernatural or transcendental reality. For example, an atheist does not usually believe in the existence of immortal souls, life after death, ghosts, or supernatural powers. Although strictly speaking an atheist could believe in any of these things and still remain an atheist... the arguments and ideas that sustain atheism tend naturally to rule out other beliefs in the supernatural or transcendental." 
  49. Winston, Robert (Ed.) (2004). Human. New York: DK Publishing, Inc. प॰ 299. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-7566-1901-7. "Neither atheism nor agnosticism is a full belief system, because they have no fundamental philosophy or lifestyle requirements. These forms of thought are simply the absence of belief in, or denial of, the existence of deities." 
  50. नोट: इस लेख की विषय-वस्तु में एक दर्शन के नाम के लिए निर्देशित विकिपीडिया दिशानिर्देश के रूप में एक छोटा प्रारंभिक अक्षर शामिल है। लाइफ स्टांस ने अपने समर्पित आलेख में मानवतावाद (Humanijm) को एक धर्म का नाम देने के लिये निर्देशानुसार कैपिटल स्वरूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन बाकी जगहों पर जीवन-उद्देश्य, धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष "मानववाद" के रूप में चित्रण के लिये इसे लोअर केस में ही रखा है।
  51. Lamont, Corliss (1997). The Philosophy of Humanism, Eighth Edition. Humanist Press: Amherst, New York. पृ॰ 252–253. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-931779-07-3. "Conscience, the sense of right and wrong and the insistent call of one's better, more idealistic, more social-minded self, is a social product. Feelings of right and wrong that at first have their locus within the family gradually develop into a pattern for the tribe or city, then spread to the larger unit of the nation, and finally from the nation to humanity as a whole. Humanism sees no need for resorting to supernatural explanations, or sanctions at any point in the ethical process." 
  52. साइंस एंड दी मॉडर्न वर्ल्ड (न्यूयॉर्क: सिमोन और स्चसटर, [1925] 1997) पी. 96.
  53. Doerr, Edd (November/December 2002). "Humanism Unmodified". The Humanist. http://www.thehumanist.org/humanist/articles/DoerrND02.htm. अभिगमन तिथि: 2008-07-05. 
  54. "Amsterdam Declaration 2002". International Humanist and Ethical Union. http://www.iheu.org/amsterdamdeclaration. अभिगमन तिथि: 2008-07-05. 
  55. "IHEU's Bylaws". International Humanist and Ethical Union. http://www.iheu.org/bylaws. अभिगमन तिथि: 2008-07-05. 
  56. फासीवादी समर्थक एजरा पाउंड ने भावुक मानवतावाद (सेंटीमेंटल ह्यूमनिज्म) को "एन ओल्ड बिच गोन इन द टीथ" कहा है। देखें टोनी डेवीस, ह्यूमनिज्म (Humanism) (रूटलेज, 1997) पृष्ठ 48.
  57. ह्यूमनिज्म एंड एंटी ह्यूमनिज्म (प्रॉब्लेम्स ऑफ मॉडर्न यूरोपियन थॉट) में (ला सैले, इलिनोईस: ओपन कोर्ट प्रेस, 1986, पृष्ठ 128.
  58. डेवीस में उद्धृत (1997) पी. 49.
  59. हैबरमास पारंपरिक मानवतावाद के स्तर पर कुछ आलोचनाओं को स्वीकार करते हैं लेकिन उनका मानना है कि मानवतावाद को ऐसे ही छोड़ देने की बजाय इस पर अनिवार्य रूप से पुनर्विचार क्या जाना चाहिए और इसे संशोधित किया जाना चाहिए.
  60. "हेडेगर का मानव विरोधी मानवतावाद (एंटीह्युमनिस्ट ह्यूमनिज्म) और फौकॉल्ट एवं ऑल्थुसर का मानवीय मानवता-विरोध (ह्युमनिस्ट एंटीह्यूमनिज्म)" (डेवीस [1997], पृष्ठ 131.
  61. डेवीस (1997), पीपी. 131-32
  62. Jones, Dwight (2009). Essays in the Philosophy of Humanism. 17 (1). http://www.essaysinhumanism.org. 

सन्दर्भ[संपादित करें]

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  • गे, पीटर. दी पार्टी ऑफ ह्यूमिनिटी: एसेज इन दी फ्रेंच एन्लाइटमेन्ट . न्यू यॉर्क: डब्ल्यू. डब्ल्यू. नोर्टन (1971). OCLC 11672592
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  • ग्रेफ्टन, एंथनी. डिफेंडर्स ऑफ दी टेक्स्ट: दी ट्रेडिशनस ऑफ स्कॉलरशिप इन एन एज़ ऑफ साइंस, 1450-1800 . हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1991
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