मात्रात्मक अनुसंधान

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मात्रात्मक अनुसंधान शोध का एक प्रकार है। यह एक रेखीय होता है। इसके अंतर्गत संख्यात्मक तथ्यों की संकल्पना की जाती है। इसमें निगमनात्मक तर्क पद्धति का प्रयोग किया जाता है।

मात्रात्मक शोध एवं गुणात्मक शोध में अन्तर[संपादित करें]

परिमाणात्मक या मात्रात्मक शोध गुणात्मक शोध
मात्रात्मक शोध, मात्रात्मक या सांख्यकीय सूचनाओं पर आधारित होता है। यह सर्वेक्षण, संरचनात्मक साक्षात्कार, प्रेक्षण, रिकार्ड्स और रिपोर्टों की समीक्षा पर आधारित होता है। गुणात्मक शोध फोकस समूह, गहन साक्षात्कार, इंटरव्यु और दस्तावेजों की समीक्षा पर आधारित होता है।
मात्रात्मक शोध के अन्तर्गत मुख्यतः डिडकटिव मेथड (प्रक्रिया) का प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग पूर्व निर्धारित या पूर्व स्थापित कांसेप्ट या कंस्ट्रक्ट, या हाइपोथिसिस के परिक्षण के लिए किया जाता है. गुणात्मक शोध के अंतर्गत मुख्यतः इन्डकटिव मेथड (प्रक्रिया) का प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग सिद्धान्त और परिकल्पना (सिद्धान्तों और प्राक्कथन) के निर्माण के लिए किया जाता है।
मात्रात्मक शोध अधिकतर वस्तुनिष्ठ होता है। यह किसी भी स्थिति या समस्या के स्पष्ट दिखने वाले प्रभाव या परिणाम का वर्णन होता है। इसके अंतर्गत शोध से सम्बद्ध समस्या या स्थिति के प्रभाव या परिणाम स्पष्ट दृष्टिगत होते हैं। गुणात्मक शोध ज्यादातर विषयनिष्ठ होता है। इसके अन्तर्गत किसी समस्या या स्थिति का वर्णन करना शोधकर्ता (जो इन समस्याओं से सम्बद्ध हो) के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।
मात्रात्मक शोध संख्यात्मक (संख्या आधारित) होता है। गुणात्मक शोध गुणात्मक या वर्णनात्मक (वर्णन आधारित) होता है।
मात्रात्मक शोध में प्रयोग के सांख्यकीय परीक्षण और सांख्यकीय विश्लेषण की सम्भावना होती है। गुणात्मक शोध में किसी  भी सांख्यकीय परिक्षण की सम्भावना नहीं होती है।
मात्रात्मक शोध के अन्तर्गत गहन या कम गहन  परन्तु अधिकाधिक विषयों से सम्बंधित अधिक विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। गुणात्मक शोध के अंतर्गत कुछ विषयों पर ज्यादा विस्तृत जानकारी (विशद ज्ञान) प्राप्त होती है।
मात्रात्मक शोध के अन्तर्गत निश्चित प्रति-उत्तर का विकल्प होता है। गुणात्मक शोध के अंतर्गत अन-स्ट्रक्चर्ड और सेमी-स्ट्रक्चर्ड रिस्पांस के कारण उत्तर के विविध विकल्प होते हैं।
मात्रात्मक शोध के अन्तर्गत शोध के परिणाम की वैधता और विश्वसनीयता प्रयुक्त तकनीक (यंत्रों और मापक) पर निर्भर करता है। गुणात्मक शोध के अन्तर्गत शोध के परिणाम की वैधता और विश्वसनीयता शोधकर्ता के प्रयास और परिश्रम पर निर्भर करती है।
मात्रात्मक शोध में परियोजना के स्तर पर अधिक समय की आवश्यकता होती है परन्तु विश्लेषण में कम समय की आवश्यकता होती है। गुणात्मक शोध में परियोजना के स्तर पर कम समय की आवश्यकता होती है परन्तु विश्लेषण में अधिक समय की आवश्यकता होती है।
मात्रात्मक शोध में सामान्यीकरण की सम्भावना अधिक होती है। गुणात्मक शोध में सामान्यीकरण की सम्भावना कम है होती है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]