मातृभाषा विकास परिषद

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भारतीय मातृभाषाओं

मातृभाषा विकास परिषद हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाने एवं उनके विकास को समर्पित संस्था है।

स्थापना[संपादित करें]

वर्ष 2000 के आरम्भ में देश में शिक्षा और संस्कृति की शोचनीय दशा तथा नैतिक मूल्यों के ह्नास को देखते हुए समाज के कुछ एक राष्ट्रप्रेमी व्यक्तियों ने महसूस किया कि इस दुरवस्था का प्रमुख कारण यह है कि संविधान के आरम्भ से लेकर पिछले 50 वर्षों में संविधान के अन्तर्गत शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में जो नीतियां बनाई गई हैं, केंद्रीय सरकार व विभिन्न राज्य सरकारों तथा इनके अधीनस्थ संस्थानों के प्रशासनिक अधिकारियों ने उन सांविधानिक नीतियों को लागू नहीं किया है और इस प्रकार देश के संविधान का उल्लंधन कर रहे हैं। अतः इस लघु समाज समूह ने यह निर्णय किया कि सांविधान के अन्तर्गत राजभाषा हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं के विकास हेतु जो नीतियां बनाई गई हैं उनको लागू करवाने का यथासंभव सांविधानिक प्रयास किया जाना चाहिए तथा अधिकारियों को उन्हें कार्यान्वित करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। इस हेतु मातृभाषा विकास परिषद का आविर्भाव हुआ।

उद्देश्य[संपादित करें]

1. भारत संघ तथा इसके विभिन्न राज्यों में संविधान के अधीन निर्मित राजभाषा हिंदी समेत अन्य प्रादेशिक भाषाओं से संबंधित नीतियों को शिक्षा के क्षेत्र और अन्य सरकारी कामकाज में लागू कराने हेतु प्रयास करना।

2. ' शिक्षा के प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम अनिवार्यतः शिशु की मातृभाषा हो ‘, इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना।

3. राजभाषा हिंदी समेत अन्य प्रादेशिक भाषाओं को प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा का माध्यम बनाने के लिए प्रयास करना।

4. पाठ्य-पुस्तकों/अनुपूरक पाठ्य सामग्री/परिक्षा प्रश्न-पत्रों आदि के प्रकाशनों में हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं की मानक तथा अधिकृत तकनीकी शब्दावली के प्रयोग को सुनिश्चित करवाना।

5. सरकारी कामकाज और न्यायालयों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करना जिससे देश वास्तविक रूप में स्वतंत्र कहला सके।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

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