माण्डवी रंजीत इंटर कॉलेज
| माण्डवी रंजीत इंटर कॉलेज | |
| स्थिति | |
|---|---|
| बिराटपुर, सहरसा, बिहार, भारत | |
| जानकारी | |
| प्रकार | इंटरमीडिएट कॉलेज |
| स्थापना | 1985 |
| संस्थापक | श्री रंजीत प्रसाद सिंह |
| प्रधानाचार्य | संतोष कुमार सिंह |
| परिसर | ग्रामीण |
| सम्बन्धता | बिहार विद्यालय परीक्षा समिति |
माण्डवी रंजीत इंटर कॉलेज एक प्रतिष्ठित इंटरमीडिएट शिक्षण संस्थान है, जो बिराटपुर, सहरसा, बिहार में स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 1985 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त,प्राचार्य एवं कोसी कमिश्नरी शिक्षक संघ के अध्यक्ष रंजीत प्रसाद सिंह द्वारा की गई थी। यह कॉलेज ग्रामीण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए जाना जाता है।
इतिहास
[संपादित करें]कॉलेज की स्थापना श्री रंजीत प्रसाद सिंह द्वारा शिक्षा के प्रचार-प्रसार और ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई थी। कॉलेज की स्थापना 1985 में हुई थी और इसके बाद श्री सिंह को भारत के राष्ट्रपति द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु सम्मानित किया गया था।
श्री सिंह के द्वारा दो और महाविद्यालय कि स्थापना कि गई जो क्रमशः हैं (i) Rs महिला कॉलेज बिराटपुर और (ii) Mr डिग्री कॉलेज बिराटपुर है
परिसर और सुविधाएँ
[संपादित करें]कॉलेज परिसर में एक भव्य मंदिर, सांस्कृतिक मंच, पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशालाएँ और कक्षाएँ मौजूद हैं। यह कॉलेज विभिन्न सांस्कृतिक, खेलकूद और शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
महिला शिक्षा और उपलब्धियाँ
[संपादित करें]यह कॉलेज ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा है। संस्थान का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। सत्र 2022-24 में इस कॉलेज की दो छात्राओं ने सहरसा जिले में टॉप किया, जिससे यह कॉलेज राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ। यह उपलब्धि ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है।
फोटो गैलरी
[संपादित करें]संस्थापक परिचय
[संपादित करें]श्री रंजीत प्रसाद सिंह माण्डवी रंजीत इंटर कॉलेज के संस्थापक, एक प्रख्यात शिक्षाविद्, समाजसेवी, लेखक एवं अधिवक्ता हैं। उनका जन्म बिराटपुर, सहरसा, बिहार में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय रामधारी प्रसाद सिंह एवं माता का नाम स्वर्गीय सरस्वती देवी है।
शैक्षणिक योग्यता
[संपादित करें]- बी.एससी. (ऑनर्स) – रसायन शास्त्र, भागलपुर विश्वविद्यालय (1964)
- एम.एससी. – प्राणी विज्ञान
- एम.ए. – अंग्रेज़ी
- बी.एड. एवं एल.एल.बी.
सम्मान एवं पुरस्कार
[संपादित करें]- भारत के राष्ट्रपति द्वारा शिक्षक दिवस (5 सितंबर, 2000) पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार
- खगड़िया के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा 2001 में सम्मान
- मलेशिया की "Mercy" संस्था द्वारा 2010 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
प्रमुख पद एवं अनुभव
[संपादित करें]- प्रधानाचार्य – इंटर व डिग्री कॉलेज (2007–2012)
- प्रधानाध्यापक – सेकेंडरी हाई स्कूल (1970–2007)
- समन्वयक – N.90S, नई दिल्ली (2000–2005)
- समन्वयक – जे.एन.यू. डिस्टेंस एजुकेशन, जयपुर (वर्तमान)
- अकादमिक काउंसलर – इग्नू (वर्तमान)
- सचिव – जीत सेवा सदन (एन.जी.ओ.), सहरसा (वर्तमान)
- अधिवक्ता – पटना उच्च न्यायालय (वर्तमान)
शिक्षण संस्थानों की स्थापना में योगदान
[संपादित करें]1. श्री चंडी हाई स्कूल, चंडिष्ठान (बिराटपुर)
2. मन जिबच्छ संस्कृत हाई स्कूल, बिराटपुर
3. संस्कृत मिडिल स्कूल, हरिपुर एवं बिसवनाथपुर
4. एम.डी.डी. हाई स्कूल, टेलवा (सहरसा)
5. कोशी आदर्श हाई स्कूल, महिसरहो-बलुआहा
6. माण्डवी रंजीत इंटर कॉलेज, बिराटपुर
7. आर.एस. महिला इंटर कॉलेज, बिराटपुर
8. माण्डवी रंजीत डिग्री कॉलेज, बिराटपुर
संगठनात्मक भूमिका
[संपादित करें]- अध्यक्ष – कोशी कमिश्नरी सेकेंडरी टीचर्स एसोसिएशन
- पूर्व अध्यक्ष – जिला इंटरमीडिएट शिक्षक एवं गैर-शिक्षक संघ, सहरसा
- पूर्व अध्यक्ष – जिला सेकेंडरी टीचर्स एसोसिएशन, खगड़िया
- उपाध्यक्ष – जिला स्काउट एवं गाइड, सहरसा
- उपाध्यक्ष – अखिल भारतीय अधिवक्ता जागरण समिति, नई दिल्ली
आजीवन सदस्यता
[संपादित करें]- बी.एस.टी.ए., पटना
- स्काउट व गाइड, बिहार
- बिहार स्टेट बार काउंसिल, पटना
साहित्यिक योगदान
[संपादित करें]1. आज़ादी की आधी अवधि (हिन्दी) 2. आंखें सुख गई हैं, आंसू टपकते नहीं (हिन्दी) 3. How and Why the Preposition (अंग्रेज़ी)