महाशय कृष्ण

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महाशय कृष्ण () भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी एवं पत्रकार थे जिन्होने 'प्रताप' नाम से एक पत्र का सम्पादन शुरू किया।

सन १९१९ में दरबार साहिब के पास जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन निहत्थे और निर्दोष पंजाबियों पर जनरल डायर ने गोलियाँ चलवा दीं थी। लाहौर में बैठे एक पत्रकार महाशय कृष्ण को यह घटना चैन लेने नहीं दे रही थी। उन्हीं दिनों इस खूनी खेल पर एक पुस्तक प्रकाशित हुई। ब्रिटिश सरकार ने उसे जब्त कर लिया। पंजाब का अंग्रेज गवर्नर खामोश रहा। यह बात भी उस पत्रकार को आंदोलित कर गई। उन्होंने ‘प्रताप’ नाम से अखबार शुरू कर दिया।

महाशय कृष्ण जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन अपने देश व पत्रकारिता के स्तर को शिखर पर पहुंचाने में लगा दिया। उन्होंने अपने कलम को माध्यम बनाते हुए पूरे भारत में आजादी की अलख जगाई। आर्य समाज के कट्टर समर्थक एवं अंग्रेजी हुकूमत में उर्दू एवं हिन्दी पत्रकारिता का झंडा बुलंद करने वाले महाशय कृष्ण ने अपनी कड़क लेखनी के बूते पर देशवासियों में आजादी का संचार पैदा किया। अंग्रेजों द्वारा उनके समाचार पत्र `डेली प्रताप' पर अनेक अत्याचार भी किए, लेकिन महाशय जी ने उस समय में भी हार नहीं मानी।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • वीरेन्द्र वीर (महाशय कृष्ण के पुत्र जिन्होने 'प्रताप' का सम्पादन जारी रखा)