महावीर नायक
| महावीर नायक | |
|---|---|
| जन्म |
26 मार्च 1942 उरुगुत्तु, राँची, झारखंड, भारत |
| आवास | राँची , झारखंड |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| पेशा | लोक गायक और गीतकार |
| कार्यकाल | 1962–वर्तमान |
| पुरस्कार |
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2022 पद्म श्री, 2025 |
महावीर नायक (जन्म 1942), रांची , झारखंड के एक भारतीय कलाकार हैं। वह एक लोक गायक और गीतकार हैं। उनको अपने नागपुरी भिंसरिया, फगुवा, पावस और मर्दानी झूमर राग के लिए जाना जाता है।।[1] उनको भारत सरकार ने पद्म श्री (2025) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2022) से सम्मानित किया है।[2]
जीवन
[संपादित करें]उनका जन्म 26 मार्च 1942 को रामनवमी के दिन रांची जिले के कांके प्रखंड के उरुगुट्टू गांव में एक घासी परिवार में हुआ था. उनके पिता ख़ुद्दु नायक एक लोक गायक और मर्दानी झूमर नर्तक थे। उन्होंने गांव के मैदान आखरा में लोक संगीत सीखा।[3][4]
वे 1963 में हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन में शामिल हुए। उन्होंने गीत लिखा सुरु किया। उन्होंने पारंपरिक नागपुरी संगीत को संरक्षित करने का प्रयास किया। वह ठेठ नागपुरी गीतों के गायक हैं, जो 1962 से पारंपरिक नागपुरी लोक गीत गा रहे हैं। उन्हें बिशेश्वर प्रसाद केशरी ने नागपुरी संस्थान में आमंत्रित किया था, जहां उन्हें हनुमान सिंह, बरजू राम, घासी राम महली और दास महली जैसे नागपुरी कवियों की कविता के बारे में पता चला। फिर उन्होंने डॉ. बिश्वेश्वर प्रसाद केशरी के साथ नागपुरी संगीत रचना शुरू की। उन्होंने 1976 में मंच पर गाना शुरू किया। 1977 में उन्होंने मंच कार्यक्रम आयोजित करना शुरू किया और बुजुर्ग गायकों को गाने का मौका दिया। उन्होंने 1000 से ज्यादा स्टेज शो में गाना गाया है. उन्हें विंसरिया के राजा की उपाधि सिमडेगा जिले के लोगों द्वारा दी गई है। उन्होंने ऑडिशन दिया और 1984 में रेडियो और टेलीविजन शो में काम किया। न्होंने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन के लिए कई गीतों की रचना भी की।
युवा पीढ़ी को पारंपरिक नागपुरी संगीत सिखाने के लिए लोक कलाकार मुकुंद नायक और अन्य कलाकारों के साथ उन्होंने 1985 में कुंजबन संगठन की स्थापना की। वे 1992 में एक शो के लिए ताइपे गए। 31 मार्च 2021 को वे एचईसी से सेवानिवृत्त हो गये. उन्होंने लगभग 300 गीत लिखे थे और पुराने कवियों द्वारा लिखे 5000 गीत संग्रहित किये। उन्होंने हटिया में नागपुरी कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया। 1993 में दर्पण पत्रिका प्रकाशित की, जिसमें कई पुराने कवियों के लिखे गीत हैं। उनके अनुसार ठेठ नागपुरी संगीत शास्त्रीय संगीत का ही एक रूप है जिनके गीत और नृत्य, झूमर, पावस, उदासी और फगुआ जैसे त्योहारों और मौसमों पर आधारित हैं। इसमें सामाजिक, नैतिकता, संस्कृति और साहित्य शामिल हैं। आधुनिक नागपुरी गाने प्रदूषण से प्रभावित हुए हैं।[1]
पुरस्कार और सम्मान
[संपादित करें]- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2022)
- पद्म श्री , 2025
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 "पारंपरिक नागपुरी गीतों को सहेजने में जुटे 'भिनसरिया के राजा' महावीर नायक". प्रभात खबर. 14 फरवरी 2020. अभिगमन तिथि: 14 फरवरी 2025.
- ↑ "Mahabir Nayak gets Padma Shri for preserving Jharkhand's music; says hard work finally paid off". The Print. 26 जनवरी 2025. अभिगमन तिथि: 14 जनवरी 2025.
- ↑ "Mahabir Nayak Wins Sangeet Natak Akademi 'Amrit' Award". Times of India. 17 सितंबर 2023. अभिगमन तिथि: 14 फरवरी 2025.
- ↑ "नागपुरी राग-रागिनियों को संरक्षित कर रहे महावीर नायक". प्रभात खबर. 4 सितंबर 2019. अभिगमन तिथि: 14 फरवरी 2025.