अमर सिंह प्रथम

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अमर सिंह प्रथम
13वें मेवाड़ के महाराणा
13वें मेवाड़ के महाराणा
शासनावधि23 जनवरी 1597 – 26जनवरी 1620
राज्याभिषेक23 जनवरी 1597 उदयपुर, राजस्थान, भारत
पूर्ववर्तीमहाराणा प्रताप
उत्तरवर्तीकरण सिंह द्वितीय
जन्म16 मार्च 1559
चित्तौड़गढ़ दुर्ग, राजस्थान
निधन26 जनवरी 1620(1620-01-26) (उम्र 60)
उदयपुर, राजस्थान
संतानकरण सिंह द्वितीय
सूरजमल
(2/7 अन्य)
घरानासिसोदिया
पितामहाराणा प्रताप
माताअजबदे पंवार
धर्महिंदू धर्म

राणा अमर सिंह (1597 – 1620 ई० ) मेवाड के शिशोदिया राजवंश के शासक थे। वे महाराणा प्रताप के पुत्र तथा महाराणा उदयसिंह के पौत्र थे।[1]


प्रारम्भ में मुगल सेना के आक्रमण न होने से अमर सिंह ने राज्य में सुव्यवस्था बनाया। मुगल सम्राट जहांगीर ने अपने बड़े बेटे शहजादे खुर्रम(शाहज़हां) को मेवाड के बचे कुचे हिस्से को मुगल सम्राज्य के अंतराल लाने के लिए भेजा। मुगल फौज को उदयपुर की ओर बढ़ता देख अमर सिंह ने मुगल अधीनता को स्वीकार लिया जिसके कारण बादशाह जहांगीर ने उन्हे चितौड़ भेट में दिया और उन्हें मेवाड का सूबेदार बना दिया। अमरसिंह मेवाड के अंतिम स्वतन्त्र शासक थे। 1622 में पिता से बगावत करके शहजादे खुर्रम कुछ दिन मेवाड रुके थे और इसी के चलते उनमें और अमरसिंह में गहरी दोस्ती भी हो गई थी। बाद में शहजादे के बादशाह बनने की जंग में अमरसिंह ने भी उनका साथ दिया था और मुगल सम्राट बनने के बाद शहंशाह शाहज़हां ने अपने मित्र अमर सिंह को दरबार में बहुत ऊंचा स्थान दिया था।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Sharma, Sri Ram (1971). Maharana Raj Singh and his Times. पृ॰ 14. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8120823982.